🔬 Most Important Points (NCERT BASED)
- तत्वों को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत करना ही आवर्त वर्गीकरण कहलाता है।
- इस वर्गीकरण से तत्वों के अध्ययन को आसान बनाया जाता है।
- समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा जाता है।
- प्रारम्भ में तत्वों को केवल धातु, अधातु और उपधातु में बाँटा गया।
- बाद में वैज्ञानिकों ने अधिक वैज्ञानिक पद्धति अपनाई।
- डॉबेरेइनर ने त्रिक (Triads) की अवधारणा दी।
- त्रिक में तीन समान गुणों वाले तत्व होते हैं।
- न्यू लैंड्स ने अष्टक नियम दिया।
- अष्टक नियम में हर आठवाँ तत्व समान गुण दिखाता है।
- यह नियम केवल हल्के तत्वों पर लागू हुआ।
- मेंडलीफ ने पहला व्यवस्थित आवर्त सारणी बनाई।
- मेंडलीफ ने तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के आधार पर सजाया।
- उन्होंने गुणों की आवर्तता को सिद्ध किया।
- मेंडलीफ ने नए तत्वों के लिए स्थान छोड़ा।
- उन्होंने भविष्यवाणी भी की।
- गैलियम और जर्मेनियम उनकी भविष्यवाणी के उदाहरण हैं।
- आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है।
- हेनरी मोसले ने परमाणु संख्या का महत्व बताया।
- परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या।
- आधुनिक आवर्त सारणी में 118 तत्व हैं।
- तत्वों को 7 आवर्तों में बाँटा गया है।
- आवर्त क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं।
- समूह ऊर्ध्व स्तंभ होते हैं।
- कुल 18 समूह होते हैं।
- एक ही समूह के तत्वों के गुण समान होते हैं।
- क्योंकि उनके बाह्य कक्षा में इलेक्ट्रॉन समान होते हैं।
- धातुएँ बाईं ओर होती हैं।
- अधातुएँ दाईं ओर होती हैं।
- उपधातु बीच में पाए जाते हैं।
- हाइड्रोजन एक विशेष तत्व है।
- हाइड्रोजन को अलग स्थान दिया गया है।
- हीलियम एक निष्क्रिय गैस है।
- समूह 18 को निष्क्रिय गैस समूह कहते हैं।
- ये रासायनिक रूप से कम सक्रिय होते हैं।
- लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स नीचे रखे जाते हैं।
- इन्हें f-ब्लॉक तत्व कहते हैं।
- आवर्त सारणी में चार ब्लॉक होते हैं।
- s-ब्लॉक, p-ब्लॉक, d-ब्लॉक और f-ब्लॉक।
- s-ब्लॉक में क्षार धातु होती हैं।
- p-ब्लॉक में अधिकतर अधातु होते हैं।
- d-ब्लॉक को संक्रमण तत्व कहते हैं।
- ये रंगीन यौगिक बनाते हैं।
- f-ब्लॉक तत्व रेडियोधर्मी होते हैं।
- परमाणु आकार बाएँ से दाएँ घटता है।
- ऊपर से नीचे बढ़ता है।
- वैद्युत ऋणात्मकता दाएँ बढ़ती है।
- धात्विक गुण नीचे बढ़ते हैं।
- अधात्विक गुण ऊपर बढ़ते हैं।
- आधुनिक आवर्त सारणी अधिक वैज्ञानिक है।
- यह तत्वों के गुणों को अच्छे से समझाती है।
- इससे नए तत्वों का स्थान पता चलता है।
- रासायनिक व्यवहार का अनुमान लगाया जा सकता है।
- यह शिक्षा और अनुसंधान में उपयोगी है।
- तत्वों की संरचना समझने में मदद करती है।
- यौगिकों की प्रकृति ज्ञात होती है।
- प्रतिक्रियाशीलता का पता चलता है।
- तत्वों के उपयोग समझ में आते हैं।
- यह रसायन विज्ञान की आधारशिला है।
- सभी वैज्ञानिक प्रयोगों में सहायक है।
- आवर्त वर्गीकरण तत्वों की दुनिया को व्यवस्थित करता है।
Short Answer type Quesiton (NCERT BASED)
1. तत्वों का आवर्त वर्गीकरण क्या है?
उत्तर:
तत्वों को उनके रासायनिक और भौतिक गुणों के आधार पर एक व्यवस्थित रूप में रखना ही आवर्त वर्गीकरण कहलाता है। इसमें समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा जाता है। इससे तत्वों का अध्ययन सरल हो जाता है। आवर्त वर्गीकरण से तत्वों के गुणों में पाई जाने वाली नियमितता समझी जा सकती है। यह रसायन विज्ञान की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इससे नए तत्वों के गुणों का भी अनुमान लगाया जा सकता है।
2. तत्वों को वर्गीकृत करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उत्तर:
जब तत्वों की संख्या बहुत अधिक हो गई तो उनका अध्ययन कठिन हो गया। अलग-अलग तत्वों के गुणों को याद रखना मुश्किल था। इसलिए वैज्ञानिकों ने उन्हें समूहों में बाँटना शुरू किया। वर्गीकरण से समान गुणों वाले तत्वों को साथ रखा गया। इससे तुलना करना आसान हो गया। यह रसायन विज्ञान को व्यवस्थित बनाता है।
3. डॉबेरेइनर के त्रिक क्या थे? (CBSE 2018)
उत्तर:
डॉबेरेइनर ने तीन तत्वों के समूह को त्रिक कहा। इन तीनों तत्वों के गुण आपस में मिलते-जुलते होते थे। मध्य तत्व का परमाणु द्रव्यमान पहले और तीसरे तत्व के औसत के लगभग बराबर होता था। जैसे लिथियम, सोडियम और पोटैशियम। यह आवर्तता का प्रारंभिक प्रयास था। लेकिन यह सभी तत्वों पर लागू नहीं हो सका।
4. न्यू लैंड्स का अष्टक नियम क्या था? (ICSE 2017)
उत्तर:
न्यू लैंड्स ने तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के अनुसार सजाया। उन्होंने पाया कि हर आठवाँ तत्व पहले जैसा गुण दिखाता है। इसे अष्टक नियम कहा गया। यह संगीत के सप्तक से प्रेरित था। यह नियम केवल हल्के तत्वों पर सही था। भारी तत्वों पर यह असफल रहा।
5. मेंडलीफ ने तत्वों को किस आधार पर वर्गीकृत किया? (UP Board 2019)
उत्तर:
मेंडलीफ ने तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के अनुसार व्यवस्थित किया। उन्होंने समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा। उनकी सारणी में गुणों की आवर्तता दिखाई देती थी। उन्होंने कुछ खाली स्थान भी छोड़े। यह भविष्य के तत्वों के लिए था। उनकी आवर्त सारणी बहुत उपयोगी सिद्ध हुई।
6. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की विशेषता क्या थी?
उत्तर:
मेंडलीफ की सारणी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने नए तत्वों के लिए स्थान छोड़ा। उन्होंने उनके गुणों की भविष्यवाणी भी की। बाद में ये भविष्यवाणियाँ सही सिद्ध हुईं। यह उनकी वैज्ञानिक सोच को दर्शाता है। उनकी सारणी गुणों पर आधारित थी। इसने रसायन विज्ञान को नई दिशा दी।
7. आधुनिक आवर्त नियम क्या है? (CBSE 2020)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के गुण उनके परमाणु संख्या का आवर्त फलन होते हैं। यानी गुण परमाणु संख्या पर निर्भर करते हैं। इसे हेनरी मोसले ने दिया था। इससे आवर्त सारणी अधिक वैज्ञानिक बनी। परमाणु संख्या तत्व की पहचान होती है। यह नियम आज स्वीकार किया जाता है।
8. परमाणु संख्या क्या होती है?
उत्तर:
परमाणु संख्या किसी तत्व में प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाती है। यह हर तत्व के लिए अलग होती है। इसी से तत्व की पहचान होती है। आधुनिक आवर्त सारणी इसी पर आधारित है। इससे इलेक्ट्रॉन व्यवस्था भी पता चलती है। यह रासायनिक गुणों को निर्धारित करती है।
9. आवर्त किसे कहते हैं?
उत्तर:
आवर्त आवर्त सारणी की क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं। इनमें तत्वों को बढ़ती परमाणु संख्या के अनुसार रखा जाता है। एक आवर्त में तत्वों के गुण धीरे-धीरे बदलते हैं। कुल 7 आवर्त होते हैं। हर आवर्त एक नए ऊर्जा स्तर को दर्शाता है। इससे तत्वों की संरचना समझी जाती है।
10. समूह क्या होते हैं? (UP Board 2021)
उत्तर:
समूह आवर्त सारणी के ऊर्ध्व स्तंभ होते हैं। इनमें रखे तत्वों के गुण समान होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके बाहरी कक्षा के इलेक्ट्रॉन समान होते हैं। कुल 18 समूह होते हैं। एक ही समूह के तत्व समान रासायनिक व्यवहार दिखाते हैं। यह वर्गीकरण को आसान बनाता है।
11. धातु और अधातु का स्थान आवर्त सारणी में कहाँ होता है?
उत्तर:
धातुएँ सामान्यतः आवर्त सारणी के बाईं ओर पाई जाती हैं। अधातुएँ दाईं ओर स्थित होती हैं। इनके बीच में उपधातु होते हैं। धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं। अधातुएँ प्रायः कुचालक होती हैं। इस व्यवस्था से गुणों की तुलना आसान होती है।
12. हाइड्रोजन को विशेष तत्व क्यों माना जाता है?
उत्तर:
हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं और हैलोजन दोनों से मिलते हैं। इसके पास केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह कभी इलेक्ट्रॉन छोड़ता है और कभी ग्रहण करता है। इसलिए इसे किसी एक समूह में पूरी तरह नहीं रखा जा सकता। इसे अलग स्थान दिया गया है। यह इसे विशेष बनाता है।
13. निष्क्रिय गैसें क्या होती हैं? (CBSE 2019)
उत्तर:
निष्क्रिय गैसें वे तत्व होते हैं जो रासायनिक रूप से बहुत कम सक्रिय होते हैं। ये समूह 18 में पाई जाती हैं। इनके बाहरी कक्षा में इलेक्ट्रॉन पूरे होते हैं। जैसे हीलियम, नीयन और आर्गन। ये आसानी से यौगिक नहीं बनाते। इसलिए इन्हें निष्क्रिय कहा जाता है।
14. समूह 18 को विशेष क्यों माना जाता है?
उत्तर:
समूह 18 में सभी निष्क्रिय गैसें होती हैं। इनके बाहरी इलेक्ट्रॉन पूरे होते हैं। इसलिए ये स्थिर होती हैं। ये बहुत कम प्रतिक्रिया करती हैं। इनका उपयोग गैस भरने और प्रकाश में होता है। इनका रासायनिक व्यवहार अलग होता है।
15. लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स क्या हैं?
उत्तर:
लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स f-ब्लॉक के तत्व होते हैं। इन्हें आवर्त सारणी के नीचे अलग से रखा जाता है। ये भारी तत्व होते हैं। इनमें से कई रेडियोधर्मी होते हैं। इनका उपयोग ऊर्जा और तकनीक में होता है। ये विशेष श्रेणी के तत्व हैं।
16. s-ब्लॉक तत्व क्या होते हैं?
उत्तर:
s-ब्लॉक तत्व वे होते हैं जिनके बाहरी कक्षा में s-ऑर्बिटल भरा होता है। इनमें समूह 1 और 2 के तत्व आते हैं। ये बहुत क्रियाशील होते हैं। इन्हें क्षार और क्षारीय पृथ्वी धातु कहा जाता है। ये आसानी से यौगिक बनाते हैं। इनका उपयोग उद्योगों में होता है।
17. p-ब्लॉक तत्वों की विशेषता क्या है? (ICSE 2020)
उत्तर:
p-ब्लॉक तत्वों में धातु, अधातु और उपधातु शामिल होते हैं। इनके बाहरी कक्षा में p-ऑर्बिटल भरा होता है। ये विभिन्न प्रकार के यौगिक बनाते हैं। इनमें जीवन के लिए आवश्यक तत्व भी होते हैं। जैसे कार्बन और ऑक्सीजन। ये रसायन विज्ञान में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
18. संक्रमण तत्व किसे कहते हैं?
उत्तर:
d-ब्लॉक के तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है। ये रंगीन यौगिक बनाते हैं। इनके कई ऑक्सीकरण अवस्था होती हैं। ये अच्छे उत्प्रेरक होते हैं। जैसे लोहा, तांबा और निकल। इनका उपयोग उद्योगों में बहुत होता है।
19. परमाणु आकार में क्या परिवर्तन होता है? (UP Board 2022)
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार घटता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। ऐसा इलेक्ट्रॉनों की संख्या और आकर्षण के कारण होता है। यह रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है। छोटे परमाणु अधिक आकर्षक होते हैं। यह आवर्तता को दर्शाता है।
20. वैद्युत ऋणात्मकता क्या है?
उत्तर:
किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन खींचने की क्षमता को वैद्युत ऋणात्मकता कहते हैं। आवर्त में दाएँ जाने पर यह बढ़ती है। समूह में नीचे जाने पर घटती है। यह बंधन बनने में सहायक होती है। इससे यौगिकों का स्वभाव पता चलता है। यह रासायनिक गुणों से जुड़ी होती है।
21. धात्विक गुण क्या होता है?
उत्तर:
धात्विक गुण वह क्षमता है जिससे तत्व इलेक्ट्रॉन छोड़ता है। समूह में नीचे जाने पर यह बढ़ता है। आवर्त में बाएँ से दाएँ घटता है। धातुएँ इस गुण में अधिक होती हैं। यह रासायनिक प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है। इससे धातुओं की पहचान होती है।
22. अधात्विक गुण किसे कहते हैं?
उत्तर:
अधात्विक गुण वह क्षमता है जिससे तत्व इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। आवर्त में दाएँ जाने पर यह बढ़ता है। समूह में नीचे जाने पर घटता है। यह अधातुओं में अधिक होता है। इससे वे ऋणात्मक आयन बनाते हैं। यह रासायनिक व्यवहार दर्शाता है।
23. आधुनिक आवर्त सारणी क्यों बेहतर है? (CBSE 2021)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है। इससे तत्वों की सही स्थिति मिलती है। इसमें समस्थानिकों को एक ही स्थान मिलता है। गुणों की आवर्तता स्पष्ट होती है। यह वैज्ञानिक रूप से अधिक सही है। इसलिए इसे आज उपयोग किया जाता है।
24. समस्थानिकों को एक ही स्थान क्यों मिलता है?
उत्तर:
समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है। आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है। इसलिए उन्हें एक ही स्थान दिया जाता है। इससे उनकी रासायनिक समानता बनी रहती है। यह पुराने प्रणाली से बेहतर है। यह वैज्ञानिक दृष्टि से सही है।
25. आवर्त वर्गीकरण का जीवन में क्या महत्व है?
उत्तर:
आवर्त वर्गीकरण से तत्वों का सही उपयोग संभव होता है। इससे दवाइयाँ, धातुएँ और रसायन बनाए जाते हैं। उद्योगों में इसका उपयोग होता है। विज्ञान में अनुसंधान आसान होता है। यह शिक्षा के लिए बहुत उपयोगी है। यह रसायन विज्ञान की नींव है।
26. आधुनिक आवर्त सारणी का आधार क्या है? (CBSE 2020)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी का आधार परमाणु संख्या है। परमाणु संख्या किसी तत्व में प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाती है। इसी संख्या के अनुसार तत्वों को क्रम में रखा गया है। इससे तत्वों के गुणों में नियमितता स्पष्ट होती है। परमाणु संख्या बदलने से इलेक्ट्रॉन संरचना भी बदलती है। यही रासायनिक गुणों को निर्धारित करती है। इसलिए आधुनिक आवर्त नियम वैज्ञानिक रूप से अधिक सही माना जाता है। इससे समस्थानिकों को भी एक ही स्थान मिल पाता है।
27. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की दो कमियाँ लिखिए। (UP Board 2021)
उत्तर:
मेंडलीफ की सारणी परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी, जो हमेशा सही नहीं होता। कुछ तत्वों की स्थिति उलटी रखनी पड़ी थी। समस्थानिकों के लिए इसमें कोई स्थान नहीं था। हाइड्रोजन की स्थिति भी स्पष्ट नहीं थी। कुछ समान गुणों वाले तत्व अलग समूहों में आ गए। यह वैज्ञानिक रूप से पूर्ण नहीं थी। फिर भी यह एक महत्वपूर्ण खोज थी। इसी से आधुनिक आवर्त सारणी का विकास हुआ।
28. आवर्त सारणी में कुल कितने समूह होते हैं?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 18 समूह होते हैं। ये समूह ऊर्ध्व स्तंभों के रूप में होते हैं। प्रत्येक समूह में तत्वों के बाहरी कक्षा के इलेक्ट्रॉन समान होते हैं। इसी कारण इनके रासायनिक गुण भी मिलते-जुलते होते हैं। जैसे समूह 1 के सभी तत्व बहुत सक्रिय होते हैं। समूह 18 के सभी तत्व निष्क्रिय गैसें होती हैं। समूहों से तत्वों की प्रकृति समझी जाती है। यह वर्गीकरण को आसान बनाता है।
29. आवर्त सारणी में कुल कितने आवर्त होते हैं? (ICSE 2019)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त होते हैं। ये क्षैतिज पंक्तियों के रूप में होते हैं। हर आवर्त एक नए ऊर्जा स्तर को दर्शाता है। पहले आवर्त में केवल 2 तत्व होते हैं। जैसे-जैसे आवर्त बढ़ता है, तत्वों की संख्या भी बढ़ती है। हर आवर्त में तत्वों के गुण धीरे-धीरे बदलते हैं। यह आवर्तता की विशेषता है। इससे इलेक्ट्रॉन संरचना समझ में आती है।
30. समूह 1 के तत्वों को क्षार धातु क्यों कहते हैं? (CBSE 2018)
उत्तर:
समूह 1 के तत्वों को क्षार धातु कहा जाता है क्योंकि ये पानी से क्रिया कर क्षार बनाते हैं। ये बहुत अधिक क्रियाशील होते हैं। इनके बाहरी कक्षा में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। ये आसानी से वह इलेक्ट्रॉन छोड़ देते हैं। इससे ये धनायन बनाते हैं। जैसे सोडियम और पोटैशियम। ये नरम और हल्की धातुएँ होती हैं। इनका उपयोग कई रासायनिक कार्यों में होता है।
31. समूह 2 के तत्वों की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
समूह 2 के तत्वों को क्षारीय पृथ्वी धातु कहा जाता है। इनके बाहरी कक्षा में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये समूह 1 से कम क्रियाशील होते हैं। ये ऑक्साइड और हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं। इनके यौगिक स्थिर होते हैं। जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम। ये शरीर और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनके बिना जीवन संभव नहीं है।
32. हैलोजन किसे कहते हैं? (UP Board 2020)
उत्तर:
समूह 17 के तत्वों को हैलोजन कहा जाता है। इनका अर्थ है “लवण बनाने वाले”। ये धातुओं से मिलकर लवण बनाते हैं। इनके बाहरी कक्षा में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर स्थिर होते हैं। जैसे फ्लोरीन, क्लोरीन और ब्रोमीन। ये बहुत सक्रिय अधातु होते हैं। इनका उपयोग कीटाणुनाशक और दवाओं में होता है।
33. परमाणु त्रिज्या क्या होती है?
उत्तर:
परमाणु त्रिज्या परमाणु के आकार को दर्शाती है। यह नाभिक से बाहरी इलेक्ट्रॉन तक की दूरी होती है। समूह में नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर यह घटती है। इसका कारण नाभिकीय आकर्षण होता है। यह रासायनिक गुणों को प्रभावित करती है। बड़े परमाणु अधिक आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं। यह धात्विक गुण से जुड़ी होती है।
34. आयनीकरण ऊर्जा क्या है? (CBSE 2022)
उत्तर:
आयनीकरण ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकालने में लगती है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर यह बढ़ती है। समूह में नीचे जाने पर यह घटती है। छोटे परमाणु इलेक्ट्रॉन को मजबूती से पकड़ते हैं। इसलिए उनकी आयनीकरण ऊर्जा अधिक होती है। यह धात्विक और अधात्विक गुणों को प्रभावित करती है। यह तत्व की क्रियाशीलता बताती है।
35. इलेक्ट्रॉन अभिरुचि क्या है?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन अभिरुचि किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता होती है। अधातुओं में यह अधिक होती है। आवर्त में दाएँ जाने पर यह बढ़ती है। समूह में नीचे जाने पर यह घटती है। इससे यह पता चलता है कि तत्व ऋणायन कितनी आसानी से बनाता है। यह बंधन निर्माण में सहायक होती है। यह रासायनिक प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करती है।
36. धातुएँ अच्छे चालक क्यों होती हैं?
उत्तर:
धातुओं में बाहरी इलेक्ट्रॉन ढीले बंधे होते हैं। ये आसानी से चल सकते हैं। इसलिए वे विद्युत और ऊष्मा के अच्छे चालक होते हैं। धातुएँ इलेक्ट्रॉन छोड़ने में सक्षम होती हैं। यही कारण है कि वे तार और उपकरणों में उपयोग होती हैं। तांबा और एल्युमिनियम इसके अच्छे उदाहरण हैं। यह धात्विक गुण का परिणाम है। यह आवर्त सारणी से समझा जा सकता है।
37. उपधातु क्या होते हैं? (ICSE 2021)
उत्तर:
उपधातु वे तत्व होते हैं जिनमें धातु और अधातु दोनों के गुण होते हैं। ये आवर्त सारणी में धातु और अधातु के बीच पाए जाते हैं। जैसे बोरॉन और सिलिकॉन। ये अर्धचालक होते हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में होता है। ये तकनीक के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनके बिना कंप्यूटर संभव नहीं होते। यह आधुनिक विज्ञान की नींव हैं।
38. f-ब्लॉक तत्वों का महत्व बताइए।
उत्तर:
f-ब्लॉक तत्वों में लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स आते हैं। इनमें कई तत्व रेडियोधर्मी होते हैं। इनका उपयोग परमाणु ऊर्जा में होता है। कुछ तत्व दवाओं और तकनीक में उपयोग होते हैं। ये भारी तत्व होते हैं। इनकी संरचना जटिल होती है। इन्हें नीचे अलग से दिखाया जाता है। यह आवर्त सारणी को संतुलित बनाता है।
39. समस्थानिक क्या होते हैं? (UP Board 2022)
उत्तर:
समस्थानिक वे परमाणु होते हैं जिनकी परमाणु संख्या समान होती है लेकिन द्रव्यमान अलग होता है। इनके प्रोटॉन समान होते हैं। न्यूट्रॉन की संख्या अलग होती है। इनके रासायनिक गुण समान होते हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में इन्हें एक ही स्थान मिलता है। यह परमाणु संख्या आधारित व्यवस्था का लाभ है। यह वैज्ञानिक रूप से सही है।
40. आवर्त सारणी से किसी तत्व की वैलेंसी कैसे ज्ञात होती है?
उत्तर:
वैलेंसी बाहरी कक्षा के इलेक्ट्रॉनों से निर्धारित होती है। आवर्त सारणी में समूह संख्या से बाहरी इलेक्ट्रॉन पता चलता है। समूह 1 में वैलेंसी 1 होती है। समूह 17 में वैलेंसी 1 या 7 होती है। इससे यौगिक बनाना समझ में आता है। यह रासायनिक बंधन को दर्शाता है। आवर्त सारणी इसे आसान बनाती है।
41. समूह 18 के तत्व क्यों स्थिर होते हैं? (CBSE 2021)
उत्तर:
समूह 18 के तत्वों के बाहरी कक्षा में इलेक्ट्रॉन पूरे होते हैं। इसलिए इन्हें इलेक्ट्रॉन लेने या देने की आवश्यकता नहीं होती। यह उन्हें स्थिर बनाता है। ये बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। इसी कारण इन्हें निष्क्रिय गैस कहा जाता है। ये यौगिक नहीं बनाते। इनका उपयोग बल्ब और गैस भरने में होता है। यह उनकी स्थिरता को दर्शाता है।
42. आवर्त वर्गीकरण का शिक्षा में क्या उपयोग है?
उत्तर:
आवर्त वर्गीकरण से छात्रों को तत्वों को समझना आसान होता है। यह रसायन विज्ञान को व्यवस्थित बनाता है। इससे गुणों की तुलना की जा सकती है। नए तत्वों का अध्ययन सरल होता है। यह परीक्षा की तैयारी में मदद करता है। शिक्षक भी इसे पढ़ाने में उपयोग करते हैं। यह वैज्ञानिक सोच को बढ़ाता है। यह ज्ञान का आधार बनता है।
43. परमाणु संख्या बढ़ने पर गुण कैसे बदलते हैं?
उत्तर:
परमाणु संख्या बढ़ने से इलेक्ट्रॉन संरचना बदलती है। इससे तत्वों के रासायनिक गुण बदलते हैं। आवर्त में यह धीरे-धीरे बदलते हैं। समूह में गुण समान रहते हैं। यही आवर्तता का सिद्धांत है। यह आधुनिक आवर्त नियम का आधार है। इससे तत्वों का व्यवहार समझ में आता है। यह वैज्ञानिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
44. मेंडलीफ की भविष्यवाणियाँ क्यों महत्वपूर्ण थीं? (ICSE 2018)
उत्तर:
मेंडलीफ ने कुछ अज्ञात तत्वों के लिए स्थान छोड़ा था। उन्होंने उनके गुणों की भी भविष्यवाणी की थी। बाद में जब वे तत्व खोजे गए तो उनके गुण मेल खाए। इससे उनकी सारणी की विश्वसनीयता सिद्ध हुई। यह एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि थी। इसने रसायन विज्ञान को नई दिशा दी। यह आधुनिक आवर्त सारणी का आधार बनी।
45. धात्विक गुण समूह में क्यों बढ़ता है?
उत्तर:
समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं। इसलिए वे आसानी से निकल जाते हैं। इससे धात्विक गुण बढ़ता है। तत्व अधिक इलेक्ट्रॉन छोड़ने लगते हैं। यह रासायनिक सक्रियता बढ़ाता है। यह आवर्त सारणी की एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति है। इससे धातुओं की पहचान होती है।
46. अधात्विक गुण आवर्त में क्यों बढ़ता है?
उत्तर:
आवर्त में दाएँ जाने पर नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है। परमाणु आकार घटता है। इससे इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। इसलिए अधात्विक गुण बढ़ता है। तत्व ऋणात्मक आयन बनाते हैं। यह बंधन निर्माण को प्रभावित करता है। यह यौगिकों के स्वभाव को दर्शाता है। यह आवर्तता का परिणाम है।
47. आधुनिक आवर्त सारणी उद्योगों में कैसे उपयोगी है?
उत्तर:
आवर्त सारणी से तत्वों के गुण पता चलते हैं। इससे सही धातु और रसायन चुने जाते हैं। उद्योगों में मिश्रधातु बनाने में इसका उपयोग होता है। दवाइयों और प्लास्टिक में भी इसका प्रयोग होता है। यह उत्पादन को सुरक्षित बनाता है। वैज्ञानिक प्रयोगों में यह मार्गदर्शक होती है। यह तकनीक के विकास में सहायक है।
48. आवर्त सारणी से यौगिकों की प्रकृति कैसे समझते हैं? (UP Board 2023)
उत्तर:
आवर्त सारणी से तत्व की वैलेंसी और प्रकृति पता चलती है। इससे यह समझा जाता है कि वह किस प्रकार का यौगिक बनाएगा। धातु और अधातु का संयोजन आयनिक यौगिक बनाता है। दो अधातु सहसंयोजक यौगिक बनाते हैं। यह जानकारी रसायन विज्ञान में बहुत उपयोगी है। इससे पदार्थों का व्यवहार समझ में आता है। यह औषधि और उद्योग में महत्वपूर्ण है।
49. आवर्त वर्गीकरण विज्ञान की नींव क्यों है?
उत्तर:
आवर्त वर्गीकरण से तत्वों की दुनिया व्यवस्थित होती है। यह रसायन विज्ञान को समझने का आधार है। इसके बिना तत्वों का अध्ययन कठिन होता। यह गुणों की तुलना आसान बनाता है। नए तत्वों की खोज में मदद करता है। यह अनुसंधान में मार्गदर्शन करता है। यह शिक्षा और तकनीक दोनों के लिए आवश्यक है। इसलिए इसे विज्ञान की नींव कहा जाता है।
50. आधुनिक आवर्त सारणी से भविष्य की खोज कैसे संभव है? (CBSE 2022)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों की सही स्थिति दिखाती है। इससे यह पता चलता है कि कौन सा स्थान खाली है। वैज्ञानिक नए तत्वों की खोज उसी आधार पर करते हैं। उनके गुणों का अनुमान पहले ही लगाया जा सकता है। यह अनुसंधान को दिशा देता है। यह विज्ञान को आगे बढ़ाता है। नई तकनीक और दवाओं की खोज संभव होती है। यह मानव जीवन को बेहतर बनाता है।
51. आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था किस क्रम में होती है?
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को उनकी परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में रखा जाता है। परमाणु संख्या से तत्व की पहचान होती है। इससे इलेक्ट्रॉन संरचना भी समझ में आती है। इसी के आधार पर गुणों में परिवर्तन दिखाई देता है। यह व्यवस्था वैज्ञानिक रूप से सही है। इससे तत्वों की सही स्थिति मिलती है। आवर्तता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
52. परमाणु संख्या और रासायनिक गुणों में क्या संबंध है? (CBSE 2021)
उत्तर:
परमाणु संख्या से इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात होती है। इलेक्ट्रॉन संरचना ही रासायनिक गुणों को निर्धारित करती है। जब परमाणु संख्या बदलती है तो गुण भी बदलते हैं। इसी कारण आवर्तता दिखाई देती है। आधुनिक आवर्त नियम इसी पर आधारित है। इससे तत्वों का व्यवहार समझ में आता है। यह वर्गीकरण को अधिक वैज्ञानिक बनाता है।
53. आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को अलग क्यों रखा गया है?
उत्तर:
हाइड्रोजन में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। इसके गुण क्षार धातुओं और हैलोजन दोनों से मिलते हैं। यह कभी इलेक्ट्रॉन छोड़ता है और कभी ग्रहण करता है। इसलिए इसे किसी एक समूह में रखना कठिन होता है। इसे विशेष स्थान दिया गया है। यह इसकी अनोखी प्रकृति को दर्शाता है। इसलिए इसे अलग रखा गया है।
54. समूह 1 और समूह 17 के तत्वों में क्या अंतर है? (UP Board 2020)
उत्तर:
समूह 1 के तत्वों के बाहरी कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन होता है। समूह 17 के तत्वों के बाहरी कक्षा में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। समूह 1 के तत्व इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं जबकि समूह 17 के तत्व इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं। इसलिए दोनों की प्रकृति विपरीत होती है। दोनों मिलकर लवण बनाते हैं। यह रासायनिक प्रतिक्रियाओं को दर्शाता है। यह आवर्त सारणी से समझा जा सकता है।
55. आधुनिक आवर्त सारणी में समस्थानिकों को एक ही स्थान क्यों मिलता है? (ICSE 2019)
उत्तर:
समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है। आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है। इसलिए समस्थानिकों को एक ही स्थान दिया जाता है। उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं। इससे वर्गीकरण सही बनता है। पुराने द्रव्यमान आधारित वर्गीकरण में यह संभव नहीं था। यह आधुनिक प्रणाली की बड़ी विशेषता है।
56. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्वों के गुण कैसे बदलते हैं?
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु संख्या बढ़ती है। परमाणु आकार घटता है। इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। धात्विक गुण घटता है और अधात्विक गुण बढ़ता है। रासायनिक क्रियाशीलता बदलती है। यह आवर्तता को दर्शाता है। इससे तत्वों की प्रकृति समझ में आती है।
57. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार क्यों बढ़ता है? (CBSE 2020)
उत्तर:
समूह में नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन परतों की संख्या बढ़ती है। बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं। इससे परमाणु का आकार बढ़ता है। नाभिकीय आकर्षण बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर कम होता है। इसलिए वे आसानी से निकल जाते हैं। यह धात्विक गुण को बढ़ाता है। यह आवर्त सारणी की महत्वपूर्ण प्रवृत्ति है।
58. संक्रमण तत्वों को विशेष क्यों माना जाता है?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों में अनेक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ होती हैं। ये रंगीन यौगिक बनाते हैं। ये अच्छे उत्प्रेरक होते हैं। इनके गुण धातुओं से कुछ अलग होते हैं। इनका उपयोग उद्योगों में बहुत होता है। जैसे लोहा और तांबा। इसलिए इन्हें विशेष समूह माना जाता है।
59. आवर्त वर्गीकरण से तत्वों की क्रियाशीलता कैसे पता चलती है?
उत्तर:
आवर्त सारणी से बाहरी इलेक्ट्रॉन की संख्या ज्ञात होती है। इससे यह पता चलता है कि तत्व इलेक्ट्रॉन छोड़ या ग्रहण करेगा। यही उसकी क्रियाशीलता तय करता है। समूह और आवर्त से यह अनुमान लगाया जाता है। इससे रासायनिक व्यवहार समझ में आता है। यह प्रयोगों में मदद करता है। यह वर्गीकरण का बड़ा लाभ है।
60. आधुनिक आवर्त सारणी में ब्लॉकों का क्या महत्व है? (ICSE 2021)
उत्तर:
आवर्त सारणी को s, p, d और f ब्लॉकों में बाँटा गया है। यह इलेक्ट्रॉन संरचना पर आधारित है। इससे तत्वों के गुण समझना आसान होता है। एक ही ब्लॉक के तत्वों के गुण मिलते-जुलते होते हैं। यह वर्गीकरण को वैज्ञानिक बनाता है। इससे अध्ययन सरल हो जाता है। यह आधुनिक रसायन विज्ञान का आधार है।
61. s-ब्लॉक तत्व अधिक क्रियाशील क्यों होते हैं?
उत्तर:
s-ब्लॉक तत्वों के बाहरी कक्षा में एक या दो इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन ढीले बंधे होते हैं। इसलिए ये आसानी से निकल जाते हैं। इससे ये बहुत सक्रिय होते हैं। ये जल्दी यौगिक बनाते हैं। यह उनकी धात्विक प्रकृति को दर्शाता है। यह आवर्त सारणी से समझा जा सकता है।
62. p-ब्लॉक तत्वों का जीवन में क्या महत्व है? (UP Board 2022)
उत्तर:
p-ब्लॉक में कई आवश्यक तत्व होते हैं। जैसे कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन। ये जीवन के लिए जरूरी हैं। इनके बिना भोजन, श्वसन और ऊर्जा संभव नहीं। ये यौगिकों की विविधता बनाते हैं। यह रसायन विज्ञान का महत्वपूर्ण भाग है। यह जैविक जीवन का आधार है।
63. हैलोजन बहुत सक्रिय क्यों होते हैं?
उत्तर:
हैलोजन के बाहरी कक्षा में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन्हें केवल एक इलेक्ट्रॉन चाहिए स्थिर होने के लिए। इसलिए ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की कोशिश करते हैं। यह उन्हें बहुत सक्रिय बनाता है। ये धातुओं से जल्दी क्रिया करते हैं। इससे लवण बनते हैं। यह उनकी रासायनिक प्रकृति है।
64. निष्क्रिय गैसें यौगिक क्यों नहीं बनातीं? (CBSE 2019)
उत्तर:
निष्क्रिय गैसों के बाहरी कक्षा में इलेक्ट्रॉन पूरे होते हैं। इसलिए उन्हें न इलेक्ट्रॉन लेने की जरूरत होती है न देने की। वे पहले से ही स्थिर होती हैं। इस कारण वे रासायनिक क्रिया नहीं करतीं। इसलिए ये यौगिक नहीं बनातीं। यही कारण है कि इन्हें निष्क्रिय कहा जाता है।
65. आवर्त वर्गीकरण से नए तत्वों का अनुमान कैसे लगाया जाता है?
उत्तर:
आवर्त सारणी में यदि कोई स्थान खाली हो तो वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि वहाँ नया तत्व हो सकता है। उस स्थान से उसके गुणों का अंदाजा लगाया जाता है। यह मेंडलीफ ने भी किया था। आधुनिक सारणी में यह और आसान हो गया है। इससे अनुसंधान को दिशा मिलती है। यह विज्ञान को आगे बढ़ाता है।
66. आधुनिक आवर्त सारणी क्यों अधिक विश्वसनीय है? (ICSE 2020)
उत्तर:
यह परमाणु संख्या पर आधारित है जो हमेशा निश्चित होती है। द्रव्यमान की तरह इसमें भ्रम नहीं होता। इससे समस्थानिकों की सही स्थिति मिलती है। गुणों की आवर्तता स्पष्ट होती है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है। इसलिए इसे अधिक विश्वसनीय माना जाता है। यह आज पूरी दुनिया में प्रयोग की जाती है।
67. आवर्त वर्गीकरण से तत्वों के उपयोग कैसे तय होते हैं?
उत्तर:
आवर्त सारणी से तत्व की धात्विक या अधात्विक प्रकृति पता चलती है। इससे उसका उपयोग तय होता है। धातुएँ मशीनों में और अधातुएँ दवाओं में उपयोग होती हैं। यह गुणों पर आधारित होता है। यह उद्योगों में बहुत मदद करता है। यह वैज्ञानिक योजना को आसान बनाता है।
68. परमाणु संख्या को तत्व की पहचान क्यों कहते हैं?
उत्तर:
परमाणु संख्या से प्रोटॉनों की संख्या पता चलती है। यही किसी तत्व की वास्तविक पहचान होती है। दो अलग तत्वों की परमाणु संख्या कभी समान नहीं होती। इससे इलेक्ट्रॉन संरचना तय होती है। यही रासायनिक गुणों को निर्धारित करती है। इसलिए परमाणु संख्या को पहचान कहा जाता है। यह आधुनिक रसायन विज्ञान का आधार है।
69. आवर्त सारणी से रासायनिक बंधन कैसे समझते हैं? (CBSE 2022)
उत्तर:
आवर्त सारणी से बाहरी इलेक्ट्रॉन की संख्या ज्ञात होती है। इससे पता चलता है कि तत्व इलेक्ट्रॉन छोड़ेगा या ग्रहण करेगा। इससे आयनिक या सहसंयोजक बंधन का पता चलता है। यह यौगिकों की प्रकृति बताता है। यह रासायनिक प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद करता है। यह विज्ञान में बहुत उपयोगी है।
70. तत्वों के अध्ययन में आवर्त वर्गीकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
आवर्त वर्गीकरण से तत्वों को समझना आसान हो जाता है। यह उन्हें एक व्यवस्थित ढाँचे में रखता है। इससे गुणों की तुलना की जा सकती है। नए तत्वों का अनुमान लगाया जा सकता है। यह शिक्षा और अनुसंधान दोनों में उपयोगी है। यह रसायन विज्ञान की बुनियाद है। इसके बिना अध्ययन कठिन होता।
Long Answer type Question (NCERT BASED)
1. तत्वों का आवर्त वर्गीकरण क्या है? इसके महत्व को समझाइए। (CBSE 2020)
उत्तर:
तत्वों को उनके रासायनिक और भौतिक गुणों के आधार पर व्यवस्थित करना ही आवर्त वर्गीकरण कहलाता है। इसमें समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा जाता है। इससे तत्वों के अध्ययन में आसानी होती है। आवर्त वर्गीकरण से तत्वों के गुणों में नियमितता दिखाई देती है। यह रसायन विज्ञान को व्यवस्थित बनाता है। इससे नए तत्वों के गुणों का अनुमान भी लगाया जा सकता है। उद्योगों और दवाओं में सही तत्व चुनने में यह सहायक है। यह विज्ञान के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. डॉबेरेइनर के त्रिक नियम को उदाहरण सहित समझाइए। (ICSE 2019)
उत्तर:
डॉबेरेइनर ने तत्वों को तीन-तीन के समूह में बाँटा जिन्हें त्रिक कहा गया। इन तीनों तत्वों के गुण एक जैसे होते थे। मध्य तत्व का परमाणु द्रव्यमान पहले और तीसरे तत्व के औसत के बराबर होता था। जैसे लिथियम, सोडियम और पोटैशियम। यह नियम तत्वों में समानता को दर्शाता है। यह आवर्तता का प्रारंभिक प्रयास था। लेकिन यह सभी तत्वों पर लागू नहीं हुआ। इसलिए इसे सीमित सफलता मिली।
3. न्यू लैंड्स के अष्टक नियम का वर्णन कीजिए। (UP Board 2021)
उत्तर:
न्यू लैंड्स ने तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के अनुसार क्रमबद्ध किया। उन्होंने पाया कि हर आठवाँ तत्व पहले तत्व जैसा गुण दिखाता है। इसे अष्टक नियम कहा गया। यह संगीत के सप्तक से प्रेरित था। यह हल्के तत्वों पर सही बैठा। लेकिन भारी तत्वों के लिए यह असफल रहा। इसके कारण नए तत्वों के लिए स्थान नहीं था। फिर भी यह आवर्तता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
4. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की दो विशेषताएँ लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर:
मेंडलीफ की आवर्त सारणी में तत्वों को परमाणु द्रव्यमान के अनुसार रखा गया था। उन्होंने समान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखा। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने अज्ञात तत्वों के लिए स्थान छोड़ा। उन्होंने उनके गुणों की भविष्यवाणी भी की। बाद में वे भविष्यवाणियाँ सही सिद्ध हुईं। इससे उनकी सारणी की विश्वसनीयता बढ़ी। यह आधुनिक आवर्त सारणी की नींव बनी।
5. मेंडलीफ की आवर्त सारणी की सीमाएँ बताइए। (ICSE 2020)
उत्तर:
मेंडलीफ की सारणी परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी जो हमेशा सही नहीं होता। कुछ तत्वों की स्थिति गलत थी। समस्थानिकों के लिए इसमें कोई स्थान नहीं था। हाइड्रोजन की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। कुछ समान गुणों वाले तत्व अलग समूहों में आ गए। यह पूरी तरह वैज्ञानिक नहीं थी। फिर भी इसने आवर्त वर्गीकरण को दिशा दी। इसी से आधुनिक प्रणाली विकसित हुई।
6. आधुनिक आवर्त नियम को समझाइए। (CBSE 2021)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या का आवर्त फलन होते हैं। परमाणु संख्या से इलेक्ट्रॉन संरचना ज्ञात होती है। यही रासायनिक गुणों को निर्धारित करती है। इस नियम को हेनरी मोसले ने दिया। इससे आवर्त सारणी अधिक वैज्ञानिक बनी। इसमें समस्थानिकों को एक ही स्थान मिलता है। यह गुणों की आवर्तता को सही रूप में दर्शाता है। आज यही नियम स्वीकार किया जाता है।
7. आधुनिक आवर्त सारणी की संरचना बताइए। (UP Board 2022)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी में 7 आवर्त और 18 समूह होते हैं। आवर्त क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं। समूह ऊर्ध्व स्तंभ होते हैं। तत्वों को परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में रखा गया है। इसमें s, p, d और f चार ब्लॉक होते हैं। प्रत्येक ब्लॉक इलेक्ट्रॉन संरचना को दर्शाता है। इससे तत्वों के गुण समझना आसान होता है। यह रसायन विज्ञान को व्यवस्थित बनाती है।
8. आवर्त और समूह में क्या अंतर है? (CBSE 2018)
उत्तर:
आवर्त क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं जबकि समूह ऊर्ध्व स्तंभ होते हैं। आवर्त में तत्वों के गुण बदलते रहते हैं। समूह में तत्वों के गुण लगभग समान होते हैं। आवर्त इलेक्ट्रॉन परतों की संख्या दर्शाता है। समूह बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताता है। समूह से रासायनिक व्यवहार पता चलता है। दोनों मिलकर तत्वों की सही स्थिति बताते हैं। यह आवर्त सारणी को वैज्ञानिक बनाता है।
9. समूह 1 और समूह 2 के तत्वों की तुलना कीजिए। (ICSE 2021)
उत्तर:
समूह 1 के तत्वों के बाहरी कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन होता है। समूह 2 के तत्वों के बाहरी कक्षा में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं। समूह 1 के तत्व अधिक क्रियाशील होते हैं। समूह 2 के तत्व उनसे कम सक्रिय होते हैं। दोनों धातु होते हैं और क्षार बनाते हैं। समूह 1 नरम होते हैं जबकि समूह 2 अपेक्षाकृत कठोर होते हैं। दोनों का उपयोग उद्योग और जीवन में होता है।
10. हैलोजन तत्वों के गुण लिखिए। (UP Board 2020)
उत्तर:
हैलोजन समूह 17 के तत्व होते हैं। इनके बाहरी कक्षा में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर स्थिर होते हैं। ये बहुत अधिक क्रियाशील अधातु होते हैं। ये धातुओं के साथ लवण बनाते हैं। जैसे सोडियम क्लोराइड। ये कीटाणुनाशक और दवाओं में उपयोग होते हैं। इनके यौगिक जीवन में बहुत उपयोगी हैं।
11. निष्क्रिय गैसों की विशेषताएँ बताइए। (CBSE 2022)
उत्तर:
निष्क्रिय गैसें समूह 18 में पाई जाती हैं। इनके बाहरी कक्षा में इलेक्ट्रॉन पूरे होते हैं। इसलिए ये रासायनिक रूप से स्थिर होती हैं। ये यौगिक नहीं बनातीं। जैसे हीलियम, नीयन और आर्गन। इनका उपयोग बल्ब, वेल्डिंग और गैस भरने में होता है। ये वातावरण में भी सुरक्षित होती हैं। यह उनकी विशेषता है।
12. परमाणु आकार में आवर्तीय परिवर्तन समझाइए। (ICSE 2018)
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार घटता है। इसका कारण नाभिकीय आकर्षण बढ़ना है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। क्योंकि इलेक्ट्रॉन परतों की संख्या बढ़ जाती है। बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं। यह रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है। बड़े परमाणु अधिक धात्विक होते हैं। यह आवर्तता का महत्वपूर्ण नियम है।
13. वैद्युत ऋणात्मकता में आवर्तीय परिवर्तन समझाइए। (CBSE 2021)
उत्तर:
वैद्युत ऋणात्मकता इलेक्ट्रॉन खींचने की क्षमता होती है। आवर्त में दाएँ जाने पर यह बढ़ती है। क्योंकि परमाणु आकार घटता है। समूह में नीचे जाने पर यह घटती है। क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन दूर होते हैं। यह बंधन निर्माण को प्रभावित करती है। इससे यौगिकों की प्रकृति समझ में आती है। यह रसायन विज्ञान में बहुत महत्वपूर्ण है।
14. धात्विक और अधात्विक गुणों में आवर्तीय परिवर्तन बताइए। (UP Board 2023)
उत्तर:
आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक गुण घटता है। अधात्विक गुण बढ़ता है। समूह में नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ता है। अधात्विक गुण घटता है। इसका कारण परमाणु आकार और इलेक्ट्रॉन संरचना है। यह तत्वों की प्रकृति को दर्शाता है। इससे उनका उपयोग तय होता है। यह आवर्त सारणी का महत्वपूर्ण नियम है।
15. आधुनिक आवर्त सारणी के उपयोग बताइए। (CBSE 2020)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी से तत्वों के गुण समझे जाते हैं। इससे नए तत्वों का अनुमान लगाया जाता है। यह यौगिकों की प्रकृति बताती है। उद्योगों में सही तत्व चुनने में मदद करती है। दवाओं और रसायनों के निर्माण में उपयोगी है। यह शिक्षा और अनुसंधान का आधार है। वैज्ञानिक प्रयोगों में इसका प्रयोग होता है। यह जीवन को बेहतर बनाती है।
16. समूह और आवर्त के आधार पर तत्वों के रासायनिक गुण कैसे समझे जाते हैं? (CBSE 2022)
उत्तर:
आवर्त सारणी में समूह और आवर्त तत्वों की स्थिति बताते हैं। समूह से बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात होती है। इसी से तत्व की वैलेंसी और क्रियाशीलता पता चलती है। आवर्त से इलेक्ट्रॉन परतों की संख्या पता चलती है। यह परमाणु आकार और ऊर्जा स्तर को दर्शाता है। इन दोनों के कारण रासायनिक गुण निर्धारित होते हैं। एक ही समूह के तत्व समान व्यवहार दिखाते हैं। आवर्त में गुण धीरे-धीरे बदलते हैं। इससे रासायनिक प्रतिक्रिया को समझना आसान होता है। यह आधुनिक रसायन विज्ञान का आधार है।
17. हाइड्रोजन की स्थिति आधुनिक आवर्त सारणी में क्यों विशेष है? (ICSE 2021)
उत्तर:
हाइड्रोजन का परमाणु बहुत छोटा होता है। इसके पास केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह कभी इलेक्ट्रॉन छोड़ सकता है और कभी ग्रहण कर सकता है। इसके गुण क्षार धातुओं और हैलोजन दोनों से मिलते हैं। इसलिए इसे किसी एक समूह में पूरी तरह नहीं रखा जा सकता। कुछ गुणों में यह धातु जैसा और कुछ में अधातु जैसा होता है। इसी कारण इसे अलग स्थान दिया गया है। इसकी रासायनिक प्रकृति बहुत अनोखी है। यह आवर्त सारणी को और रोचक बनाता है।
18. समस्थानिकों की समस्या को आधुनिक आवर्त सारणी कैसे हल करती है? (CBSE 2021)
उत्तर:
समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है। पुराने द्रव्यमान आधारित वर्गीकरण में उन्हें अलग-अलग स्थान मिलता था। आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है। इसलिए सभी समस्थानिकों को एक ही स्थान मिलता है। उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं। इससे वर्गीकरण सही और वैज्ञानिक बनता है। यह एक बड़ी समस्या का समाधान है। इससे तत्वों की पहचान स्पष्ट होती है। आधुनिक प्रणाली अधिक विश्वसनीय बन जाती है।
19. s-ब्लॉक और p-ब्लॉक तत्वों में अंतर स्पष्ट कीजिए। (UP Board 2022)
उत्तर:
s-ब्लॉक तत्वों के बाहरी कक्षा में s-ऑर्बिटल भरा होता है। p-ब्लॉक तत्वों के बाहरी कक्षा में p-ऑर्बिटल भरा होता है। s-ब्लॉक के तत्व अधिक क्रियाशील धातु होते हैं। p-ब्लॉक में धातु, अधातु और उपधातु तीनों मिलते हैं। s-ब्लॉक के यौगिक अधिक आयनिक होते हैं। p-ब्लॉक के यौगिक सहसंयोजक भी हो सकते हैं। s-ब्लॉक जीवन में आधारभूत भूमिका निभाते हैं। p-ब्लॉक जीवन के लिए आवश्यक तत्व देता है। दोनों का विज्ञान में बड़ा महत्व है।
20. d-ब्लॉक तत्वों को संक्रमण तत्व क्यों कहते हैं? (ICSE 2020)
उत्तर:
d-ब्लॉक तत्व आवर्त सारणी के मध्य भाग में पाए जाते हैं। ये s और p ब्लॉक के बीच स्थित होते हैं। इनके गुण धीरे-धीरे बदलते हैं। ये कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं। ये रंगीन यौगिक बनाते हैं। ये अच्छे उत्प्रेरक होते हैं। इनके धात्विक गुण मजबूत होते हैं। उद्योगों में इनका बहुत उपयोग होता है। इसलिए इन्हें संक्रमण तत्व कहा जाता है।
21. f-ब्लॉक तत्वों का विज्ञान में क्या महत्व है? (CBSE 2020)
उत्तर:
f-ब्लॉक तत्वों में लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स शामिल होते हैं। इनमें कई तत्व रेडियोधर्मी होते हैं। इनका उपयोग परमाणु ऊर्जा में किया जाता है। कुछ तत्व चिकित्सा में उपयोगी होते हैं। ये आधुनिक तकनीक में भी काम आते हैं। इनके चुंबकीय और प्रकाशीय गुण विशेष होते हैं। इन्हें नीचे अलग दिखाया जाता है। ये आवर्त सारणी को संतुलित बनाते हैं। इनका वैज्ञानिक महत्व बहुत अधिक है।
22. परमाणु आकार में आवर्तीय प्रवृत्ति को विस्तार से समझाइए। (UP Board 2021)
उत्तर:
परमाणु आकार नाभिक से बाहरी इलेक्ट्रॉन तक की दूरी है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर आकार घटता है। क्योंकि नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आकार बढ़ता है। क्योंकि इलेक्ट्रॉन परतें बढ़ जाती हैं। बाहरी इलेक्ट्रॉन दूर हो जाते हैं। यह रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है। बड़े परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं। यह धात्विक गुण को बढ़ाता है। यह आवर्त सारणी का महत्वपूर्ण नियम है।
23. आयनीकरण ऊर्जा में आवर्तीय परिवर्तन समझाइए। (CBSE 2022)
उत्तर:
आयनीकरण ऊर्जा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा है। आवर्त में दाएँ जाने पर यह बढ़ती है। क्योंकि परमाणु आकार घटता है। नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है। समूह में नीचे जाने पर यह घटती है। क्योंकि इलेक्ट्रॉन दूर होते हैं। यह धात्विक और अधात्विक गुणों को प्रभावित करती है। उच्च आयनीकरण ऊर्जा अधात्विक प्रकृति दर्शाती है। यह रासायनिक सक्रियता बताती है।
24. वैद्युत ऋणात्मकता का रासायनिक बंधन में महत्व बताइए। (ICSE 2019)
उत्तर:
वैद्युत ऋणात्मकता इलेक्ट्रॉन खींचने की क्षमता है। यह बंधन की प्रकृति तय करती है। अधिक अंतर होने पर आयनिक बंधन बनता है। कम अंतर होने पर सहसंयोजक बंधन बनता है। यह यौगिकों के गुणों को प्रभावित करती है। इससे ध्रुवीयता समझ में आती है। यह रासायनिक प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आवर्त सारणी से इसे जाना जा सकता है। यह रसायन विज्ञान का मूल सिद्धांत है।
25. धात्विक गुण में आवर्तीय परिवर्तन स्पष्ट कीजिए। (UP Board 2023)
उत्तर:
धात्विक गुण इलेक्ट्रॉन छोड़ने की क्षमता है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर यह घटता है। क्योंकि परमाणु आकार घटता है। समूह में नीचे जाने पर यह बढ़ता है। क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन दूर हो जाते हैं। इससे वे आसानी से निकलते हैं। धातुएँ अच्छे चालक होती हैं। यह रासायनिक सक्रियता को प्रभावित करता है। यह आवर्त सारणी का महत्वपूर्ण नियम है।
26. अधात्विक गुण में आवर्तीय परिवर्तन समझाइए। (CBSE 2021)
उत्तर:
अधात्विक गुण इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता है। आवर्त में दाएँ जाने पर यह बढ़ता है। क्योंकि परमाणु छोटा होता जाता है। समूह में नीचे जाने पर यह घटता है। क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन दूर होते हैं। अधातु ऋणात्मक आयन बनाते हैं। यह बंधन निर्माण को प्रभावित करता है। यह यौगिकों की प्रकृति बताता है। यह आवर्त सारणी का मुख्य नियम है।
27. आवर्त सारणी से किसी तत्व की वैलेंसी कैसे ज्ञात होती है? (ICSE 2022)
उत्तर:
वैलेंसी बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या से तय होती है। समूह संख्या से यह पता चलता है। समूह 1 में वैलेंसी 1 होती है। समूह 2 में वैलेंसी 2 होती है। समूह 17 में वैलेंसी 1 या 7 होती है। इससे यौगिक बनाना समझ में आता है। यह रासायनिक बंधन को दर्शाता है। आवर्त सारणी इसे सरल बनाती है। यह रसायन विज्ञान में बहुत उपयोगी है।
28. आधुनिक आवर्त सारणी उद्योगों में कैसे उपयोगी है? (CBSE 2020)
उत्तर:
आवर्त सारणी से तत्वों के गुण पता चलते हैं। इससे सही धातु और रसायन चुने जाते हैं। मिश्रधातु बनाने में यह सहायक है। दवाओं और प्लास्टिक के निर्माण में इसका उपयोग होता है। यह उत्पादन को सुरक्षित बनाता है। वैज्ञानिक प्रयोगों में यह मार्गदर्शक होती है। यह नई तकनीक विकसित करने में मदद करती है। उद्योगों की दक्षता बढ़ाती है। यह जीवन को आसान बनाती है।
29. आवर्त वर्गीकरण से यौगिकों की प्रकृति कैसे समझी जाती है? (UP Board 2022)
उत्तर:
आवर्त सारणी से तत्व की धात्विक या अधात्विक प्रकृति पता चलती है। इससे यह समझा जाता है कि वह किस प्रकार का यौगिक बनाएगा। धातु और अधातु मिलकर आयनिक यौगिक बनाते हैं। दो अधातु सहसंयोजक यौगिक बनाते हैं। वैलेंसी और वैद्युत ऋणात्मकता भी मदद करती है। इससे यौगिकों की स्थिरता समझ में आती है। यह दवाओं और उद्योग में बहुत उपयोगी है। यह रसायन विज्ञान को व्यावहारिक बनाता है।
30. आधुनिक आवर्त सारणी को मेंडलीफ की सारणी से बेहतर क्यों माना जाता है? (CBSE 2021)
उत्तर:
आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है। मेंडलीफ की सारणी द्रव्यमान पर आधारित थी। आधुनिक प्रणाली समस्थानिकों को सही स्थान देती है। इसमें तत्वों की स्थिति अधिक सटीक है। गुणों की आवर्तता स्पष्ट दिखाई देती है। हाइड्रोजन और भारी तत्वों की स्थिति बेहतर है। यह वैज्ञानिक रूप से अधिक सही है। पूरी दुनिया में यही उपयोग की जाती है। यह रसायन विज्ञान को अधिक व्यवस्थित बनाती है।
31. आधुनिक आवर्त सारणी का आधार क्या है? (CBSE बोर्ड – 2020)
आधुनिक आवर्त सारणी का आधार परमाणु संख्या है। परमाणु संख्या किसी तत्व में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या होती है। हेनरी मोसले ने यह सिद्ध किया कि तत्वों के गुण परमाणु संख्या के अनुसार आवर्तित होते हैं। जब तत्वों को बढ़ती हुई परमाणु संख्या के क्रम में रखा जाता है, तो उनके रासायनिक गुण नियमित रूप से दोहराते हैं। इससे तत्वों को सही स्थान मिलता है। इस विधि से पहले की कई गलतियाँ दूर हो गईं। इससे समस्थानिकों को भी एक ही स्थान पर रखा जा सका। आधुनिक आवर्त सारणी वैज्ञानिक दृष्टि से अधिक सही मानी जाती है। यह तत्वों के व्यवहार को समझने में सहायक है।
32. आधुनिक आवर्त सारणी में समूह और आवर्त का क्या महत्व है? (UP बोर्ड – 2019)
आधुनिक आवर्त सारणी में समूह और आवर्त तत्वों की स्थिति को दर्शाते हैं। समूह ऊर्ध्व स्तंभ होते हैं जिनमें समान बाह्य इलेक्ट्रॉन वाले तत्व होते हैं। इसलिए एक ही समूह के तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं। आवर्त क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं, जो तत्वों की ऊर्जा स्तर को दर्शाती हैं। जैसे-जैसे हम आवर्त में आगे बढ़ते हैं, गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है। इससे तत्वों की तुलना करना आसान हो जाता है। समूह और आवर्त की मदद से तत्वों की प्रतिक्रियाशीलता समझी जाती है। यह आवर्त सारणी को व्यवस्थित बनाता है।
33. धातु, अधातु और उपधातु का आवर्त सारणी में वितरण बताइए। (ICSE बोर्ड – 2021)
आवर्त सारणी में धातुएँ अधिकतर बाईं ओर पाई जाती हैं। ये चमकीली, चालक और अभिक्रियाशील होती हैं। अधातुएँ दाईं ओर स्थित होती हैं और ये भंगुर तथा खराब चालक होती हैं। उपधातु धातु और अधातु के बीच पाए जाते हैं। इनके गुण दोनों से मिलते-जुलते होते हैं। बोरॉन, सिलिकॉन जैसे तत्व उपधातु हैं। यह वितरण तत्वों के गुणों को समझने में मदद करता है। इससे रासायनिक व्यवहार का अनुमान लगाया जा सकता है।
34. निष्क्रिय गैसों की स्थिति और विशेषताएँ बताइए। (CBSE बोर्ड – 2018)
निष्क्रिय गैसें आवर्त सारणी के 18वें समूह में स्थित होती हैं। इनमें हीलियम, नीयॉन, आर्गन जैसे तत्व आते हैं। इनके बाहरी कक्ष में इलेक्ट्रॉन पूर्ण होते हैं। इसलिए ये रासायनिक रूप से बहुत कम सक्रिय होती हैं। ये आसानी से किसी अन्य तत्व से अभिक्रिया नहीं करतीं। ये रंगहीन और गंधहीन गैसें होती हैं। इनका उपयोग बल्ब और विज्ञापन लाइटों में होता है। इनकी स्थिर प्रकृति इन्हें विशेष बनाती है।
35. आवर्त प्रवृत्तियाँ क्या होती हैं? (UP बोर्ड – 2022)
आवर्त प्रवृत्तियाँ वे परिवर्तन हैं जो आवर्त सारणी में क्रम से चलते हैं। परमाणु आकार, आयनीकरण ऊर्जा और विद्युत ऋणात्मकता इसमें शामिल हैं। बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार घटता है। ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। विद्युत ऋणात्मकता दाएँ जाने पर बढ़ती है। धात्विक गुण नीचे की ओर बढ़ते हैं। इन प्रवृत्तियों से तत्वों का व्यवहार समझा जाता है। ये रसायन विज्ञान में बहुत उपयोगी हैं।
31. आधुनिक आवर्त सारणी का आधार क्या है? (CBSE बोर्ड – 2020)
आधुनिक आवर्त सारणी का आधार परमाणु संख्या है। परमाणु संख्या किसी तत्व में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या होती है। हेनरी मोसले ने यह सिद्ध किया कि तत्वों के गुण परमाणु संख्या के अनुसार आवर्तित होते हैं। जब तत्वों को बढ़ती हुई परमाणु संख्या के क्रम में रखा जाता है, तो उनके रासायनिक गुण नियमित रूप से दोहराते हैं। इससे तत्वों को सही स्थान मिलता है। इस विधि से पहले की कई गलतियाँ दूर हो गईं। इससे समस्थानिकों को भी एक ही स्थान पर रखा जा सका। आधुनिक आवर्त सारणी वैज्ञानिक दृष्टि से अधिक सही मानी जाती है। यह तत्वों के व्यवहार को समझने में सहायक है।
32. आधुनिक आवर्त सारणी में समूह और आवर्त का क्या महत्व है? (UP बोर्ड – 2019)
आधुनिक आवर्त सारणी में समूह और आवर्त तत्वों की स्थिति को दर्शाते हैं। समूह ऊर्ध्व स्तंभ होते हैं जिनमें समान बाह्य इलेक्ट्रॉन वाले तत्व होते हैं। इसलिए एक ही समूह के तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं। आवर्त क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं, जो तत्वों की ऊर्जा स्तर को दर्शाती हैं। जैसे-जैसे हम आवर्त में आगे बढ़ते हैं, गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है। इससे तत्वों की तुलना करना आसान हो जाता है। समूह और आवर्त की मदद से तत्वों की प्रतिक्रियाशीलता समझी जाती है। यह आवर्त सारणी को व्यवस्थित बनाता है।
33. धातु, अधातु और उपधातु का आवर्त सारणी में वितरण बताइए। (ICSE बोर्ड – 2021)
आवर्त सारणी में धातुएँ अधिकतर बाईं ओर पाई जाती हैं। ये चमकीली, चालक और अभिक्रियाशील होती हैं। अधातुएँ दाईं ओर स्थित होती हैं और ये भंगुर तथा खराब चालक होती हैं। उपधातु धातु और अधातु के बीच पाए जाते हैं। इनके गुण दोनों से मिलते-जुलते होते हैं। बोरॉन, सिलिकॉन जैसे तत्व उपधातु हैं। यह वितरण तत्वों के गुणों को समझने में मदद करता है। इससे रासायनिक व्यवहार का अनुमान लगाया जा सकता है।
34. निष्क्रिय गैसों की स्थिति और विशेषताएँ बताइए। (CBSE बोर्ड – 2018)
निष्क्रिय गैसें आवर्त सारणी के 18वें समूह में स्थित होती हैं। इनमें हीलियम, नीयॉन, आर्गन जैसे तत्व आते हैं। इनके बाहरी कक्ष में इलेक्ट्रॉन पूर्ण होते हैं। इसलिए ये रासायनिक रूप से बहुत कम सक्रिय होती हैं। ये आसानी से किसी अन्य तत्व से अभिक्रिया नहीं करतीं। ये रंगहीन और गंधहीन गैसें होती हैं। इनका उपयोग बल्ब और विज्ञापन लाइटों में होता है। इनकी स्थिर प्रकृति इन्हें विशेष बनाती है।
35. आवर्त प्रवृत्तियाँ क्या होती हैं? (UP बोर्ड – 2022)
आवर्त प्रवृत्तियाँ वे परिवर्तन हैं जो आवर्त सारणी में क्रम से चलते हैं। परमाणु आकार, आयनीकरण ऊर्जा और विद्युत ऋणात्मकता इसमें शामिल हैं। बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार घटता है। ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। विद्युत ऋणात्मकता दाएँ जाने पर बढ़ती है। धात्विक गुण नीचे की ओर बढ़ते हैं। इन प्रवृत्तियों से तत्वों का व्यवहार समझा जाता है। ये रसायन विज्ञान में बहुत उपयोगी हैं।
36. परमाणु आकार की आवर्त प्रवृत्ति को समझाइए। (CBSE बोर्ड – 2019)
परमाणु आकार से तात्पर्य परमाणु की त्रिज्या से होता है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार घटता है। इसका कारण नाभिकीय आवेश का बढ़ना होता है। नाभिक का आकर्षण इलेक्ट्रॉनों को अधिक पास खींचता है। वहीं समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है। क्योंकि प्रत्येक नए तत्व में एक नया ऊर्जा स्तर जुड़ जाता है। इससे इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं। यह प्रवृत्ति तत्वों की रासायनिक प्रकृति को प्रभावित करती है।
37. आयनीकरण ऊर्जा क्या है? इसकी आवर्त प्रवृत्ति बताइए। (UP बोर्ड – 2020)
आयनीकरण ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉन हटाने में लगती है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर आयनीकरण ऊर्जा बढ़ती है। इसका कारण परमाणु आकार का घटना है। छोटे परमाणु इलेक्ट्रॉन को मजबूती से पकड़ते हैं। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनीकरण ऊर्जा घटती है। क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं। यह प्रवृत्ति तत्वों की अभिक्रियाशीलता को दर्शाती है।
38. वैद्युत ऋणात्मकता की आवर्त प्रवृत्ति को स्पष्ट कीजिए। (ICSE बोर्ड – 2021)
वैद्युत ऋणात्मकता किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन खींचने की क्षमता है। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर यह बढ़ती है। क्योंकि परमाणु आकार घटता है और नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर वैद्युत ऋणात्मकता घटती है। क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं। फ्लोरीन सबसे अधिक वैद्युत ऋणात्मक तत्व है। यह प्रवृत्ति बंध निर्माण में सहायक होती है।
39. धात्विक गुणों की आवर्त प्रवृत्ति समझाइए। (CBSE बोर्ड – 2018)
धात्विक गुण किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन छोड़ने की क्षमता को दर्शाते हैं। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर धात्विक गुण घटते हैं। क्योंकि परमाणु आकार घटता है और नाभिक का आकर्षण बाहरी इलेक्ट्रॉन पर अधिक होता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर धात्विक गुण बढ़ते हैं। क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं और आसानी से निकल जाते हैं। बड़े परमाणु अधिक सक्रिय धातु होते हैं। धातुएँ आम तौर पर चमकीली, घनी और अच्छे चालक होती हैं। यह प्रवृत्ति रासायनिक प्रतिक्रियाओं और धात्विक यौगिकों के निर्माण को प्रभावित करती है।
40. अधात्विक गुणों की आवर्त प्रवृत्ति बताइए। (UP बोर्ड – 2021)
अधात्विक गुण किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता को दर्शाते हैं। आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर अधात्विक गुण बढ़ते हैं। क्योंकि नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है और परमाणु आकार घटता है। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर अधात्विक गुण घटते हैं। क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं और ग्रहण करना कठिन होता है। अधिक अधातु तत्व जैसे फ्लोरीन, ऑक्सीजन और क्लोरीन होते हैं। अधात्विक गुण यौगिकों की प्रकृति और रासायनिक बंध निर्माण को प्रभावित करते हैं। यह प्रवृत्ति तत्वों के रासायनिक व्यवहार को समझने में मदद करती है।
41. आधुनिक आवर्त सारणी की उपलब्धियाँ बताइए। (CBSE बोर्ड – 2020)
आधुनिक आवर्त सारणी ने रासायनशास्त्र के अध्ययन को व्यवस्थित किया। यह परमाणु संख्या पर आधारित है। समस्थानिकों को सही स्थान दिया गया। तत्वों की तुलना करना सरल हुआ। इससे नए तत्वों की खोज और उनके गुणों का अनुमान लगाया जा सकता है। रासायनिक अभिक्रियाएँ और यौगिकों का निर्माण समझने में मदद मिली। यह शिक्षा और अनुसंधान में उपयोगी है। उद्योग और तकनीक में भी इसका महत्व है। आधुनिक आवर्त सारणी वैज्ञानिक दृष्टि से सटीक और व्यापक रूप से स्वीकार्य है।
42. आधुनिक आवर्त सारणी की सीमाएँ बताइए। (ICSE बोर्ड – 2019)
आधुनिक आवर्त सारणी पूर्ण रूप से सही नहीं मानी जाती। हाइड्रोजन की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स को नीचे अलग रखा गया है। इससे पूरी सारणी की निरंतरता थोड़ी टूटती है। कुछ तत्वों के गुण अपेक्षाकृत असामान्य होते हैं। कुछ भारी तत्वों की तुलना में हल्के तत्वों की स्थिति अधिक स्पष्ट होती है। फिर भी यह सबसे वैज्ञानिक और उपयोगी आवर्त सारणी मानी जाती है। रासायनिक गुणों का पूर्वानुमान करने में यह बहुत मददगार है।
43. हाइड्रोजन की स्थिति क्यों विशेष मानी जाती है? (UP बोर्ड – 2018)
हाइड्रोजन सबसे हल्का तत्व है और इसमें केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। यह किसी समय इलेक्ट्रॉन छोड़ सकता है और कभी ग्रहण भी कर सकता है। इसलिए हाइड्रोजन के गुण धातु और अधातु दोनों से मिलते-जुलते हैं। इसे किसी एक समूह में पूरी तरह रखना कठिन है। कुछ गुणों के अनुसार इसे समूह 1 में रखा जाता है और कुछ गुणों में समूह 17 के समान माना जाता है। इसी कारण इसकी स्थिति आवर्त सारणी में विशेष मानी जाती है। इसका अध्ययन रासायनशास्त्र में बहुत महत्वपूर्ण है।
44. d-ब्लॉक तत्वों की विशेषताएँ बताइए। (CBSE बोर्ड – 2021)
d-ब्लॉक तत्वों को संक्रमण तत्व कहा जाता है। ये आवर्त सारणी के मध्य में स्थित होते हैं। इनमें कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ होती हैं। ये रंगीन यौगिक बनाते हैं और अच्छे उत्प्रेरक के रूप में काम आते हैं। इनका गलनांक और घनत्व अधिक होता है। ये धातु होते हुए भी विभिन्न रासायनिक व्यवहार दिखाते हैं। उद्योग और विज्ञान में इनका व्यापक उपयोग है। इनके अध्ययन से धात्विक और रासायनिक प्रक्रियाओं को समझना आसान होता है।
45. f-ब्लॉक तत्वों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (ICSE बोर्ड – 2020)
f-ब्लॉक तत्वों में लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स शामिल होते हैं। ये आवर्त सारणी के नीचे अलग ब्लॉक में रखे जाते हैं। इनकी बाहरी कक्षा में f-ऑर्बिटल भरी जाती है। अधिकतर एक्टिनाइड्स रेडियोधर्मी होते हैं। ये परमाणु ऊर्जा उत्पादन और तकनीकी उपकरणों में उपयोग किए जाते हैं। इनका घनत्व और जटिलता अधिक होती है। इनके अध्ययन से रेडियोधर्मी और दुर्लभ तत्वों की समझ बढ़ती है। इनका वैज्ञानिक महत्व बहुत अधिक है।
46. s-ब्लॉक तत्वों की विशेषताएँ बताइए। (UP बोर्ड – 2019)
s-ब्लॉक तत्वों में समूह 1 और 2 के तत्व आते हैं। इनमें बाहरी कक्षा में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये अत्यधिक अभिक्रियाशील होते हैं। इनका उपयोग उद्योग और दैनिक जीवन में होता है। उदाहरण के लिए सोडियम और कैल्शियम। ये आसानी से आयनिक यौगिक बनाते हैं। इनके धात्विक गुण मजबूत होते हैं। ये सामान्यतः चमकीले और अच्छे चालक होते हैं। इनके अध्ययन से रासायनिक अभिक्रियाओं को समझना आसान होता है।
47. p-ब्लॉक तत्वों का महत्व बताइए। (CBSE बोर्ड – 2018)
p-ब्लॉक तत्वों में धातु, अधातु और उपधातु शामिल होते हैं। ये विभिन्न रासायनिक गुण प्रदर्शित करते हैं। ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और कार्बन जीवन के लिए आवश्यक हैं। ये सहसंयोजक और आयनिक यौगिक बना सकते हैं। इनका उपयोग रसायन विज्ञान, उद्योग और जैविक प्रक्रियाओं में होता है। इनका अध्ययन रासायनिक विविधता को समझने में मदद करता है। p-ब्लॉक तत्वों की उपस्थिति आवर्त सारणी में संतुलन बनाए रखती है।
48. आधुनिक आवर्त नियम को परिभाषित कीजिए। (UP बोर्ड – 2022)
आधुनिक आवर्त नियम हेनरी मोसले ने प्रतिपादित किया। इसके अनुसार तत्वों के गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं। जब तत्वों को बढ़ती परमाणु संख्या में रखा जाता है, तो उनके रासायनिक गुण दोहराते हैं। यह नियम अधिक वैज्ञानिक है। इससे तत्वों की स्थिति सटीक और समस्थानिकों का स्थान सही होता है। आधुनिक आवर्त सारणी इसी नियम पर आधारित है। यह रासायनशास्त्र को व्यवस्थित और समझने में आसान बनाता है।
49. आवर्त वर्गीकरण के अध्ययन का महत्व बताइए। (ICSE बोर्ड – 2021)
आवर्त वर्गीकरण से तत्वों के गुण व्यवस्थित रूप से समझे जाते हैं। समान गुणों वाले तत्व एक समूह में रखे जाते हैं। इससे रासायनिक अभिक्रियाओं की भविष्यवाणी आसान होती है। नए तत्वों के गुणों का अनुमान लगाया जा सकता है। यह वैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षा के लिए आवश्यक है। उद्योग और तकनीक में सही तत्व चुनने में मदद करता है। आवर्त वर्गीकरण रसायन विज्ञान का आधार है।
50. मेंडलीफ और आधुनिक आवर्त सारणी में अंतर लिखिए। (CBSE बोर्ड – 2020)
मेंडलीफ की आवर्त सारणी परमाणु द्रव्यमान पर आधारित थी। आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है। मेंडलीफ सारणी में समस्थानिकों की समस्या थी, जबकि आधुनिक सारणी में यह समस्या हल हो गई। आधुनिक सारणी में तत्वों की स्थिति अधिक सटीक है। हाइड्रोजन और भारी तत्वों की स्थिति स्पष्ट है। आधुनिक आवर्त सारणी अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और प्रयोग में उपयोगी है। यह रासायनशास्त्र की समझ को सरल बनाती है।
1. आधुनिक आवर्त सारणी किसके आधार पर बनाई गई है?
A) परमाणु द्रव्यमान
B) परमाणु संख्या
C) आणविक संख्या
D) नाभिकीय भार
सही उत्तर: B) परमाणु संख्या
व्याख्या: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ती हुई परमाणु संख्या के आधार पर रखा गया है। इससे तत्वों के गुण आवर्तित होते हैं और समस्थानिकों को सही स्थान मिलता है।
2. निष्क्रिय गैसों का समूह कौन‑सा है?
A) समूह 1B) समूह 2
C) समूह 17
D) समूह 18
सही उत्तर: D) समूह 18
व्याख्या: समूह 18 के तत्व बाहरी कक्षा में पूर्ण इलेक्ट्रॉनों के कारण रासायनिक रूप से स्थिर होते हैं और निष्क्रिय गैस कहलाते हैं।
3. समूहों में तत्वों के गुण कैसे होते हैं?
A) अलग‑2B) समान
C) यादृच्छिक
D) अप्रत्याशित
सही उत्तर: B) समान
व्याख्या: समान समूह के तत्वों में बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं।
4. आवर्त सारणी में क्षैतिज पंक्तियों को क्या कहते हैं?
A) समूहB) ब्लॉक
C) आवर्त
D) श्रेणी
सही उत्तर: C) आवर्त
व्याख्या: आवर्त सारणी की क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त कहते हैं। इसमें तत्वों की ऊर्जा स्तर संख्या समान होती है।
5. अनेक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ किसमें पाई जाती हैं?
A) s‑ब्लॉकB) p‑ब्लॉक
C) d‑ब्लॉक
D) f‑ब्लॉक
सही उत्तर: C) d‑ब्लॉक
व्याख्या: d‑ब्लॉक तत्वों में इलेक्ट्रॉन की विविध संयोजन अवस्थाएँ होती हैं, इसलिए ये कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाते हैं।
6. हाइड्रोजन को सामान्यतः किस समूह में रखा जाता है?
A) समूह 1B) समूह 2
C) समूह 17
D) समूह 18
सही उत्तर: A) समूह 1
व्याख्या: हाइड्रोजन धातु और अधातु दोनों गुण दिखाता है, लेकिन सामान्यतः इसे समूह 1 में रखा जाता है क्योंकि यह एक इलेक्ट्रॉन छोड़ सकता है।
7. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार क्या होता है?
A) बढ़ता हैB) घटता है
C) समान रहता है
D) अनिश्चित
सही उत्तर: B) घटता है
व्याख्या: नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक खिंचते हैं, जिससे परमाणु आकार घटता है।
8. समूह 1 के तत्वों को क्या कहा जाता है?
A) क्षारीय पृथ्वी धातुB) संक्रमण तत्व
C) क्षार धातु
D) निष्क्रिय गैस
सही उत्तर: C) क्षार धातु
व्याख्या: समूह 1 के तत्व अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ होती हैं, जिन्हें क्षार धातु कहा जाता है।
9. वैद्युत ऋणात्मकता किस दिशा में बढ़ती है?
A) आवर्त में बाएँ से दाएँB) आवर्त में दाएँ से बाएँ
C) समूह में ऊपर से नीचे
D) समूह में नीचे से ऊपर
सही उत्तर: A) आवर्त में बाएँ से दाएँ
व्याख्या: जैसे-जैसे परमाणु बाएँ से दाएँ बढ़ता है, नाभिकीय आवेश अधिक होता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन खींचने की क्षमता बढ़ती है।
10. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार क्या होता है?
A) घटता हैB) बढ़ता है
C) समान रहता है
D) अनिश्चित
सही उत्तर: B) बढ़ता है
व्याख्या: समूह में नीचे जाने पर प्रत्येक तत्व में नया ऊर्जा स्तर जुड़ता है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं और आकार बढ़ता है।
11. f‑ब्लॉक तत्वों का किस ब्लॉक में वर्गीकरण किया जाता है?
A) s‑ब्लॉक
B) p‑ब्लॉक
C) d‑ब्लॉक
D) f‑ब्लॉक
सही उत्तर: D) f‑ब्लॉक
व्याख्या: f‑ब्लॉक तत्वों में लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स आते हैं और ये आवर्त सारणी के नीचे अलग ब्लॉक में रखे जाते हैं।
12. समान परमाणु संख्या लेकिन अलग परमाणु द्रव्यमान वाले तत्वों को क्या कहते हैं?
A) समस्थानिक
B) सममितीय
C) सहबद्ध
D) समकक्ष
सही उत्तर: A) समस्थानिक
व्याख्या: समस्थानिक तत्वों में परमाणु संख्या समान होती है लेकिन न्यूट्रॉन की संख्या अलग होती है, इसलिए द्रव्यमान अलग होता है।
13. कौन‑से तत्व अच्छे उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं?
A) समूह 1
B) d‑ब्लॉक
C) निष्क्रिय गैस
D) s‑ब्लॉक
सही उत्तर: B) d‑ब्लॉक
व्याख्या: संक्रमण धातुएँ d‑ब्लॉक में आती हैं और इनमें रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने की क्षमता होती है।
14. p‑ब्लॉक में कौन‑से तत्व पाए जाते हैं?
A) केवल धातु
B) केवल अधातु
C) धातु, अधातु और उपधातु
D) केवल संक्रमण तत्व
सही उत्तर: C) धातु, अधातु और उपधातु
व्याख्या: p‑ब्लॉक तत्वों में विभिन्न प्रकार के गुण पाए जाते हैं, जो रासायनिक विविधता दिखाते हैं।
15. समूह 17 में कौन‑सा तत्व शामिल है?
A) ऑक्सीजन
B) क्लोरीन
C) हीलियम
D) सोडियम
सही उत्तर: B) क्लोरीन
व्याख्या: समूह 17 को हलोजन समूह कहा जाता है, जिसमें क्लोरीन प्रमुख सदस्य है।
16. नीयन और आर्गन किस समूह के सदस्य हैं?
A) समूह 1
B) समूह 2
C) समूह 17
D) समूह 18
सही उत्तर: D) समूह 18
व्याख्या: ये निष्क्रिय गैसें हैं, जिनमें बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या पूर्ण है।
17. s‑ब्लॉक तत्वों में बाहरी इलेक्ट्रॉन किस ऑर्बिटल में होते हैं?
A) s‑ऑर्बिटल
B) p‑ऑर्बिटल
C) d‑ऑर्बिटल
D) f‑ऑर्बिटल
सही उत्तर: A) s‑ऑर्बिटल
व्याख्या: s‑ब्लॉक में तत्वों का बाहरी इलेक्ट्रॉन हमेशा s‑ऑर्बिटल में होता है।
18. कौन‑सा तत्व धातु और अधातु दोनों गुण दिखाता है?
A) सिलिकॉन
B) हीलियम
C) नेऑन
D) सोडियम
सही उत्तर: A) सिलिकॉन
व्याख्या: सिलिकॉन उपधातु है, जो धातु और अधातु दोनों के गुण दिखाता है।
19. समूह 2 के तत्वों को क्या कहा जाता है?
A) क्षार धातु
B) क्षारीय पृथ्वी धातु
C) संक्रमण तत्व
D) निष्क्रिय गैस
सही उत्तर: B) क्षारीय पृथ्वी धातु
व्याख्या: समूह 2 के तत्व जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम क्षारीय पृथ्वी धातु कहलाते हैं।
20. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर वैद्युत ऋणात्मकता क्या होती है?
A) बढ़ती है
B) घटती है
C) समान रहती है
D) यादृच्छिक
सही उत्तर: B) घटती है
व्याख्या: बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं, इसलिए इलेक्ट्रॉन खींचने की क्षमता घट जाती है।
21. कौन‑सा तत्व संक्रमण धातु है?
A) कैल्शियम
B) लोहा
C) क्लोरीन
D) हाइड्रोजन
सही उत्तर: B) लोहा
व्याख्या: लोहा d‑ब्लॉक में आता है और इसमें कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ होती हैं।
22. एक ही समूह के तत्वों के गुण कैसे होते हैं?
A) समान
B) भिन्न
C) यादृच्छिक
D) अप्रत्याशित
सही उत्तर: A) समान
व्याख्या: समान समूह के तत्वों में बाहरी इलेक्ट्रॉन संख्या समान होने के कारण गुण समान होते हैं।
23. तत्वों की क्रियाशीलता और गुण किस सारणी में दिखाई जाती है?
A) विकिरण सारणी
B) आवर्त सारणी
C) द्रव्यमान सारणी
D) ऊर्जा स्तर सारणी
सही उत्तर: B) आवर्त सारणी
व्याख्या: आवर्त सारणी तत्वों के गुणों को आवर्तित रूप में प्रदर्शित करती है और रासायनिक क्रियाओं का पूर्वानुमान संभव बनाती है।
24. आधुनिक आवर्त सारणी में कुल कितने समूह होते हैं?
A) 7
B) 14
C) 18
D) 20
सही उत्तर: C) 18
व्याख्या: आधुनिक आवर्त सारणी में 18 समूह हैं, जिनमें तत्वों के समान गुण वाले समूह शामिल हैं।
25. परमाणु आकार किस पर निर्भर करता है?
A) बाहरी इलेक्ट्रॉन परतों पर
B) परमाणु द्रव्यमान पर
C) आयनीकरण ऊर्जा पर
D) रासायनिक गुणों पर
सही उत्तर: A) बाहरी इलेक्ट्रॉन परतों पर
व्याख्या: बाहरी इलेक्ट्रॉन परतों की संख्या और नाभिकी
26. समूह 1 के तत्वों की अभिक्रियाशीलता किस दिशा में बढ़ती है?
A) ऊपर से नीचे
B) नीचे से ऊपर
C) बाएँ से दाएँ
D) दाएँ से बाएँ
सही उत्तर: A) ऊपर से नीचे
व्याख्या: समूह में नीचे जाने पर बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं, जिससे ये तत्व और अधिक अभिक्रियाशील हो जाते हैं।
27. आवर्त सारणी में कौन‑सा तत्व सबसे हल्का है?
A) हाइड्रोजन
B) हीलियम
C) ऑक्सीजन
D) लिथियम
सही उत्तर: A) हाइड्रोजन
व्याख्या: हाइड्रोजन का परमाणु केवल एक प्रोटॉन और एक इलेक्ट्रॉन से बना है, इसलिए यह सबसे हल्का तत्व है।
28. कौन‑सा समूह हलोजन समूह कहलाता है?
A) समूह 1
B) समूह 2
C) समूह 17
D) समूह 18
सही उत्तर: C) समूह 17
व्याख्या: समूह 17 के तत्व उच्च अभिक्रियाशील अधातु हैं, जिन्हें हलोजन कहा जाता है।
29. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर आयनीकरण ऊर्जा क्या होती है?
A) घटती है
B) बढ़ती है
C) समान रहती है
D) यादृच्छिक
सही उत्तर: B) बढ़ती है
व्याख्या: नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण बाहरी इलेक्ट्रॉन को हटाना कठिन होता है, इसलिए आयनीकरण ऊर्जा बढ़ती है।
30. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनीकरण ऊर्जा क्या होती है?
A) बढ़ती है
B) घटती है
C) समान रहती है
D) यादृच्छिक
सही उत्तर: B) घटती है
व्याख्या: बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होने के कारण इसे हटाना आसान होता है, इसलिए आयनीकरण ऊर्जा घटती है।
31. कौन‑सा ब्लॉक मुख्य रूप से रंगीन यौगिक बनाता है?
A) s‑ब्लॉक
B) p‑ब्लॉक
C) d‑ब्लॉक
D) f‑ब्लॉक
सही उत्तर: C) d‑ब्लॉक
व्याख्या: d‑ब्लॉक तत्वों में अधूरा d‑ऑर्बिटल होने के कारण ये रंगीन यौगिक बनाते हैं।
32. कौन‑से तत्व रेडियोधर्मी होते हैं?
A) लैंथेनाइड्स
B) एक्टिनाइड्स
C) s‑ब्लॉक तत्व
D) हलोजन
सही उत्तर: B) एक्टिनाइड्स
व्याख्या: f‑ब्लॉक के एक्टिनाइड्स रेडियोधर्मी होते हैं और ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किए जाते हैं।
33. आवर्त सारणी में तत्वों की किस प्रवृत्ति को वैद्युत ऋणात्मकता कहा जाता है?
A) इलेक्ट्रॉनों को खोने की प्रवृत्ति
B) इलेक्ट्रॉनों को पाने की प्रवृत्ति
C) परमाणु आकार
D) घनत्व
सही उत्तर: B) इलेक्ट्रॉनों को पाने की प्रवृत्ति
व्याख्या: वैद्युत ऋणात्मकता किसी तत्व की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता को दर्शाती है।
34. हाइड्रोजन किस प्रकार का तत्व है?
A) केवल धातु
B) केवल अधातु
C) उपधातु
D) धातु और अधातु दोनों
सही उत्तर: D) धातु और अधातु दोनों
व्याख्या: हाइड्रोजन में धातु और अधातु दोनों गुण पाए जाते हैं, इसलिए इसे विशेष तत्व माना जाता है।
35. s‑ब्लॉक में किस समूह के तत्व शामिल हैं?
A) समूह 1 और 2
B) समूह 13 और 14
C) समूह 17 और 18
D) d‑ब्लॉक तत्व
सही उत्तर: A) समूह 1 और 2
व्याख्या: s‑ब्लॉक तत्वों की बाहरी कक्षा में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
36. p‑ब्लॉक तत्वों में कौन‑सा आवश्यक जीवन तत्व है?
A) कार्बन
B) कैल्शियम
C) सोडियम
D) मैग्नीशियम
सही उत्तर: A) कार्बन
व्याख्या: p‑ब्लॉक तत्वों में कार्बन और नाइट्रोजन जैविक जीवन के लिए आवश्यक हैं।
37. समूह 18 के तत्व क्यों निष्क्रिय होते हैं?
A) उनमें कम इलेक्ट्रॉन हैं
B) बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या पूर्ण है
C) परमाणु द्रव्यमान अधिक है
D) आयनीकरण ऊर्जा कम है
सही उत्तर: B) बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या पूर्ण है
व्याख्या: पूर्ण बाहरी इलेक्ट्रॉनों के कारण ये रासायनिक अभिक्रियाओं में शामिल नहीं होते।
38. परमाणु आकार में सबसे बड़ी प्रवृत्ति किस दिशा में होती है?
A) आवर्त में बाएँ से दाएँ
B) आवर्त में दाएँ से बाएँ
C) समूह में ऊपर से नीचे
D) समूह में नीचे से ऊपर
सही उत्तर: C) समूह में ऊपर से नीचे
व्याख्या: समूह में नीचे जाने पर बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं, जिससे परमाणु आकार बढ़ता है।
39. d‑ब्लॉक तत्वों की कौन‑सी विशेषता उन्हें उद्योग में महत्वपूर्ण बनाती है?
A) रंगीन यौगिक बनाना
B) उच्च द्रव्यमान
C) निष्क्रिय गैस होना
D) हल्के तत्व होना
सही उत्तर: A) रंगीन यौगिक बनाना
व्याख्या: d‑ब्लॉक तत्वों के रंगीन यौगिक पेंट, रसायन और उत्प्रेरक उद्योग में उपयोग किए जाते हैं।
40. कौन‑सा तत्व p‑ब्लॉक का अधातु है?
A) सिलिकॉन
B) ऑक्सीजन
C) सोडियम
D) कैल्शियम
सही उत्तर: B) ऑक्सीजन
व्याख्या: ऑक्सीजन p‑ब्लॉक का प्रमुख अधातु है और यह जीवन और रासायनिक प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण है।
41. समस्थानिकों में अंतर क्या होता है?
A) परमाणु संख्या
B) न्यूट्रॉन संख्या
C) इलेक्ट्रॉन संख्या
D) गुण
सही उत्तर: B) न्यूट्रॉन संख्या
व्याख्या: समस्थानिकों में न्यूट्रॉन की संख्या अलग होती है, जबकि परमाणु संख्या समान रहती है।
42. समूह 2 के तत्वों की अभिक्रियाशीलता समूह 1 के मुकाबले कैसी होती है?
A) अधिक
B) कम
C) समान
D) यादृच्छिक
सही उत्तर: B) कम
व्याख्या: समूह 2 के तत्वों के बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होने के कारण ये कम अभिक्रियाशील होते हैं।
43. कौन‑सा तत्व उपधातु है?
A) सिलिकॉन
B) लोहा
C) सोडियम
D) हीलियम
सही उत्तर: A) सिलिकॉन
व्याख्या: सिलिकॉन उपधातु है, जो धातु और अधातु दोनों के गुण दिखाता है।
44. किस प्रकार के तत्व अक्सर उत्प्रेरक के रूप में उपयोग किए जाते हैं?
A) s‑ब्लॉक
B) d‑ब्लॉक
C) p‑ब्लॉक
D) निष्क्रिय गैस
सही उत्तर: B) d‑ब्लॉक
व्याख्या: d‑ब्लॉक तत्वों में अधूरा d‑ऑर्बिटल होने से ये रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करते हैं।
45. हलोजन समूह के तत्वों की विशेषता क्या है?
A) उच्च धात्विक गुण
B) उच्च अभिक्रियाशीलता
C) निष्क्रिय गैस होना
D) रेडियोधर्मी होना
सही उत्तर: B) उच्च अभिक्रियाशीलता
व्याख्या: हलोजन तत्व उच्च अभिक्रियाशील अधातु होते हैं और आसानी से यौगिक बनाते हैं।
46. कौन‑सा तत्व सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है?
A) सोडियम
B) कैल्शियम
C) लोहा
D) हीलियम
सही उत्तर: A) सोडियम
व्याख्या: सोडियम समूह 1 का सदस्य है और इसका एक बाहरी इलेक्ट्रॉन आसानी से खो जाता है, इसलिए यह अत्यधिक अभिक्रियाशील है।
47. आधुनिक आवर्त सारणी की विशेषता क्या है?
A) परमाणु द्रव्यमान पर आधारित
B) परमाणु संख्या पर आधारित
C) गुणों में समानता नहीं दिखाती
D) केवल धातु दिखाती है
सही उत्तर: B) परमाणु संख्या पर आधारित
व्याख्या: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ती हुई परमाणु संख्या के आधार पर रखा गया है, जिससे गुण आवर्तित होते हैं।
48. समूह 18 के तत्वों का सामान्य नाम क्या है?
A) हलोजन
B) निष्क्रिय गैस
C) क्षार धातु
D) संक्रमण धातु
सही उत्तर: B) निष्क्रिय गैस
व्याख्या: समूह 18 के तत्व बाहरी इलेक्ट्रॉनों में पूर्णता के कारण रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
49. किस तत्व की स्थिति आवर्त सारणी में विशेष मानी जाती है?
A) हाइड्रोजन
B) लोहा
C) सोडियम
D) ऑक्सीजन
सही उत्तर: A) हाइड्रोजन
व्याख्या: हाइड्रोजन में धातु और अधातु दोनों गुण पाए जाते हैं, इसलिए इसे किसी एक समूह में रखना कठिन है।
50. कौन‑सा ब्लॉक लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स को दिखाता है?
A) s‑ब्लॉक
B) p‑ब्लॉक
C) d‑ब्लॉक
D) f‑ब्लॉक
सही उत्तर: D) f‑ब्लॉक
व्याख्या: l-और a-श्रृंखला के तत्व f‑ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉन भरते हैं, इसलिए इन्हें f‑ब्लॉक में रखा गया है।य आकर्षण परमाणु आकार को निर्धारित करते हैं।
51. कौन‑से तत्व समूह में समान रासायनिक गुण दिखाते हैं?
A) उसी आवर्त में क्षैतिज
B) उसी समूह में ऊर्ध्वाधर
C) यादृच्छिक तत्व
D) f‑ब्लॉक के तत्व
सही उत्तर: B) उसी समूह में ऊर्ध्वाधर
व्याख्या: समूह में ऊर्ध्वाधर तत्वों में बाहरी इलेक्ट्रॉन की संख्या समान होती है, जिससे उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं।
52. कौन‑सा तत्व सबसे अधिक नॉन‑मेटलlic गुण दिखाता है?
A) क्लोरीन
B) सोडियम
C) कैल्शियम
D) लोहा
सही उत्तर: A) क्लोरीन
व्याख्या: क्लोरीन समूह 17 का हलोजन है और अत्यधिक अधात्विक गुणों के कारण यह नॉन‑मेटल की श्रेणी में आता है।
53. f‑ब्लॉक तत्वों में लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स किस स्थिति में रखे जाते हैं?
A) मुख्य ब्लॉक
B) d‑ब्लॉक के नीचे
C) समूह 1 और 2 के बीच
D) p‑ब्लॉक के ऊपर
सही उत्तर: B) d‑ब्लॉक के नीचे
व्याख्या: f‑ब्लॉक तत्वों को सारणी में नीचे रखा गया है ताकि आवर्त सारणी का आकार नियंत्रित रहे।
54. वैद्युत ऋणात्मकता किससे प्रभावित होती है?
A) परमाणु आकार
B) परमाणु द्रव्यमान
C) न्यूट्रॉन संख्या
D) तत्व का नाम
सही उत्तर: A) परमाणु आकार
व्याख्या: छोटे परमाणु आकार के तत्व नाभिक से इलेक्ट्रॉनों को अधिक खींचते हैं, जिससे उनकी वैद्युत ऋणात्मकता अधिक होती है।
55. समूह 2 के तत्वों की क्रियाशीलता किस दिशा में बढ़ती है?
A) ऊपर से नीचे
B) नीचे से ऊपर
C) बाएँ से दाएँ
D) दाएँ से बाएँ
सही उत्तर: A) ऊपर से नीचे
व्याख्या: समूह में नीचे जाने पर बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं, जिससे तत्व अधिक अभिक्रियाशील हो जाते हैं।
56. कौन‑सा तत्व सबसे हल्का निष्क्रिय गैस है?
A) हीलियम
B) नीयन
C) आर्गन
D) क्रिप्टॉन
सही उत्तर: A) हीलियम
व्याख्या: हीलियम का परमाणु केवल 2 प्रोटॉन और 2 इलेक्ट्रॉन वाला है, इसलिए यह सबसे हल्का निष्क्रिय गैस है।
57. समूह 1 और 2 के तत्वों की मुख्य विशेषता क्या है?
A) उच्च वैद्युत ऋणात्मकता
B) क्षारीय धातु और क्षारीय पृथ्वी धातु
C) निष्क्रिय गैस होना
D) उपधातु होना
सही उत्तर: B) क्षारीय धातु और क्षारीय पृथ्वी धातु
व्याख्या: समूह 1 के तत्व क्षार धातु हैं और समूह 2 के तत्व क्षारीय पृथ्वी धातु कहलाते हैं।
58. d‑ब्लॉक तत्वों में सबसे सामान्य गुण क्या है?
A) रंगीन यौगिक बनाना
B) पूर्ण बाहरी कक्षा
C) निष्क्रिय गैस गुण
D) उच्च धात्विक घनत्व
सही उत्तर: A) रंगीन यौगिक बनाना
व्याख्या: d‑ब्लॉक में अधूरा d‑ऑर्बिटल होने से ये रंगीन यौगिक बनाते हैं और उत्प्रेरक के रूप में उपयोगी होते हैं।
59. हलोजन तत्व किससे प्रतिक्रिया करते हैं?
A) क्षारीय धातु
B) संक्रमण धातु
C) निष्क्रिय गैस
D) उपधातु
सही उत्तर: A) क्षारीय धातु
व्याख्या: हलोजन तत्व अत्यधिक अभिक्रियाशील होते हैं और आसानी से क्षारीय धातुओं के साथ यौगिक बनाते हैं।
60. आवर्त सारणी में सबसे बड़ी वैद्युत ऋणात्मकता किस तत्व में पाई जाती है?
A) फ्लोरीन
B) ऑक्सीजन
C) क्लोरीन
D) नीयन
सही उत्तर: A) फ्लोरीन
व्याख्या: फ्लोरीन सबसे छोटा n‑ब्लॉक नॉन‑मेटल है और इसमें इलेक्ट्रॉन को खींचने की क्षमता सबसे अधिक है।
61. समूह 18 के तत्वों की मुख्य विशेषता क्या है?
A) उच्च अभिक्रियाशीलता
B) निष्क्रिय होना
C) रंगीन यौगिक बनाना
D) क्षारीय धातु होना
सही उत्तर: B) निष्क्रिय होना
व्याख्या: समूह 18 के तत्व बाहरी इलेक्ट्रॉन कक्षा पूरी होने के कारण रासायनिक रूप से स्थिर और निष्क्रिय होते हैं।
62. p‑ब्लॉक में सबसे हल्का तत्व कौन‑सा है?
A) कार्बन
B) नाइट्रोजन
C) ऑक्सीजन
D) फ्लोरीन
सही उत्तर: B) नाइट्रोजन
व्याख्या: p‑ब्लॉक तत्वों में नाइट्रोजन सबसे हल्का है और जीवन और जैव रसायन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
63. कौन‑सा समूह क्षारीय धातु कहलाता है?
A) समूह 1
B) समूह 2
C) समूह 17
D) समूह 18
सही उत्तर: A) समूह 1
व्याख्या: समूह 1 के तत्व अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ होती हैं, जिन्हें क्षार धातु कहा जाता है।
64. कौन‑से तत्व उपधातु के उदाहरण हैं?
A) सिलिकॉन और आर्सेनिक
B) सोडियम और पोटैशियम
C) हीलियम और नीयन
D) लोहा और तांबा
सही उत्तर: A) सिलिकॉन और आर्सेनिक
व्याख्या: उपधातु में धातु और अधातु दोनों गुण होते हैं, जैसे सिलिकॉन और आर्सेनिक।
65. समूह में नीचे जाने पर आयनीकरण ऊर्जा क्यों घटती है?
A) न्यूट्रॉन की संख्या कम होने से
B) बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होने से
C) परमाणु द्रव्यमान बढ़ने से
D) गुणों में समानता के कारण
सही उत्तर: B) बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होने से
व्याख्या: जैसे-जैसे तत्व समूह में नीचे जाते हैं, बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं और उन्हें हटाना आसान होता है।
66. कौन‑सा तत्व सबसे हल्का क्षारीय धातु है?
A) सोडियम
B) पोटैशियम
C) लिथियम
D) कैल्शियम
सही उत्तर: C) लिथियम
व्याख्या: लिथियम समूह 1 का सदस्य है और इसका परमाणु सबसे हल्का होने के कारण इसे सबसे हल्का क्षारीय धातु माना जाता है।
67. d‑ब्लॉक तत्वों की क्या विशेषता है?
A) केवल अधातु गुण
B) कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
C) निष्क्रिय गैस होना
D) s‑ऑर्बिटल में इलेक्ट्रॉन
सही उत्तर: B) कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
व्याख्या: d‑ब्लॉक तत्वों में अधूरा d‑ऑर्बिटल होने के कारण ये कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
68. हलोजन तत्व कौन‑से गुण दिखाते हैं?
A) धात्विक
B) अधात्विक और अत्यधिक अभिक्रियाशील
C) निष्क्रिय
D) उपधातु
सही उत्तर: B) अधात्विक और अत्यधिक अभिक्रियाशील
व्याख्या: हलोजन तत्व अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातु होते हैं और आसानी से यौगिक बनाते हैं।
69. आवर्त सारणी में तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता किस पर निर्भर करती है?
A) बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
B) परमाणु द्रव्यमान
C) न्यूट्रॉन संख्या
D) समूह संख्या
सही उत्तर: A) बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
व्याख्या: तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता उनकी बाहरी इलेक्ट्रॉन कक्षा में मौजूद इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है।
70. कौन‑सा समूह क्षारीय पृथ्वी धातु कहलाता है?
A) समूह 1
B) समूह 2
C) समूह 17
D) समूह 18
सही उत्तर: B) समूह 2
व्याख्या: समूह 2 के तत्व जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम क्षारीय पृथ्वी धातु कहलाते हैं।
71. s‑ब्लॉक तत्वों में मुख्य गुण क्या है?
A) अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु
B) निष्क्रिय गैस
C) उपधातु
D) रंगीन यौगिक बनाना
सही उत्तर: A) अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु
व्याख्या: s‑ब्लॉक तत्वों में एक या दो बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो इन्हें अत्यधिक अभिक्रियाशील बनाते हैं।
72. वैद्युत ऋणात्मकता किस तत्व में सबसे अधिक होती है?
A) फ्लोरीन
B) क्लोरीन
C) ऑक्सीजन
D) नीयन
सही उत्तर: A) फ्लोरीन
व्याख्या: फ्लोरीन में नाभिकीय आकर्षण अधिक और परमाणु आकार छोटा होने के कारण इलेक्ट्रॉन खींचने की क्षमता सबसे अधिक होती है।
73. कौन‑सा तत्व क्षार धातु है?
A) सोडियम
B) कैल्शियम
C) लोहा
D) ऑक्सीजन
सही उत्तर: A) सोडियम
व्याख्या: सोडियम समूह 1 का सदस्य है और अत्यधिक अभिक्रियाशील क्षारीय धातु है।
74. f‑ब्लॉक तत्वों की कौन‑सी श्रृंखला रेडियोधर्मी है?
A) लैंथेनाइड्स
B) एक्टिनाइड्स
C) s‑ब्लॉक
D) p‑ब्लॉक
सही उत्तर: B) एक्टिनाइड्स
व्याख्या: एक्टिनाइड्स में अधिकांश तत्व रेडियोधर्मी होते हैं और ऊर्जा उत्पादन में उपयोग किए जाते हैं।
75. कौन‑सा तत्व d‑ब्लॉक का संक्रमण धातु है?
A) तांबा
B) सोडियम
C) हीलियम
D) सिलिकॉन
सही उत्तर: A) तांबा
व्याख्या: तांबा d‑ब्लॉक में आता है और इसमें अधूरा d‑ऑर्बिटल होने के कारण यह संक्रमण धातु कहलाता है।
76. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार क्यों बढ़ता है?
A) न्यूट्रॉन घटने से
B) बाहरी इलेक्ट्रॉन परत बढ़ने से
C) आयनीकरण ऊर्जा घटने से
D) वैद्युत ऋणात्मकता बढ़ने से
सही उत्तर: B) बाहरी इलेक्ट्रॉन परत बढ़ने से
व्याख्या: जैसे-जैसे तत्व नीचे जाते हैं, इलेक्ट्रॉन की परतें बढ़ती हैं और नाभिकीय आकर्षण कम होने के कारण परमाणु आकार बढ़ जाता है।
77. कौन‑सा समूह हलोजन कहलाता है?
A) समूह 1
B) समूह 2
C) समूह 17
D) समूह 18
सही उत्तर: C) समूह 17
व्याख्या: समूह 17 के तत्व अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातु होते हैं, जिन्हें हलोजन कहा जाता है।
78. d‑ब्लॉक तत्वों की प्रमुख विशेषता क्या है?
A) रंगीन यौगिक बनाना
B) निष्क्रिय गैस गुण
C) हल्के तत्व होना
D) केवल धातु होना
सही उत्तर: A) रंगीन यौगिक बनाना
व्याख्या: d‑ब्लॉक तत्व अधूरा d‑ऑर्बिटल होने के कारण रंगीन यौगिक बनाते हैं और उद्योग में उत्प्रेरक के रूप में उपयोग होते हैं।
79. f‑ब्लॉक तत्वों में कौन‑सी श्रृंखला रेडियोधर्मी है?
A) लैंथेनाइड्स
B) एक्टिनाइड्स
C) s‑ब्लॉक
D) p‑ब्लॉक
सही उत्तर: B) एक्टिनाइड्स
व्याख्या: एक्टिनाइड्स रेडियोधर्मी होते हैं और इन्हें ऊर्जा उत्पादन और परमाणु उद्योग में इस्तेमाल किया जाता है।
80. किस तत्व में सबसे अधिक वैद्युत ऋणात्मकता होती है?
A) फ्लोरीन
B) क्लोरीन
C) ऑक्सीजन
D) नीयन
सही उत्तर: A) फ्लोरीन
व्याख्या: फ्लोरीन में नाभिकीय आकर्षण अधिक और परमाणु आकार छोटा होने के कारण यह इलेक्ट्रॉन को सबसे अधिक खींचता है।
81. समूह 1 के तत्वों की बाहरी इलेक्ट्रॉन संख्या कितनी होती है?
A) 1
B) 2
C) 7
D) 8
सही उत्तर: A) 1
व्याख्या: समूह 1 के तत्वों में केवल एक बाहरी इलेक्ट्रॉन होता है, जिससे ये अत्यधिक अभिक्रियाशील होते हैं।
82. समूह 2 के तत्वों को क्या कहा जाता है?
A) क्षार धातु
B) क्षारीय पृथ्वी धातु
C) संक्रमण धातु
D) निष्क्रिय गैस
सही उत्तर: B) क्षारीय पृथ्वी धातु
व्याख्या: समूह 2 के तत्वों जैसे मैग्नीशियम और कैल्शियम क्षारीय पृथ्वी धातु कहलाते हैं।
83. p‑ब्लॉक में किस प्रकार के तत्व पाए जाते हैं?
A) धातु
B) अधातु
C) उपधातु
D) सभी
सही उत्तर: D) सभी
व्याख्या: p‑ब्लॉक में धातु, अधातु और उपधातु तीनों प्रकार के तत्व पाए जाते हैं।
84. कौन‑सा तत्व उपधातु का उदाहरण है?
A) सिलिकॉन
B) सोडियम
C) हीलियम
D) लोहा
सही उत्तर: A) सिलिकॉन
व्याख्या: सिलिकॉन उपधातु है क्योंकि इसमें धातु और अधातु दोनों गुण पाए जाते हैं।
85. कौन‑सा तत्व सबसे हल्का क्षारीय धातु है?
A) लिथियम
B) सोडियम
C) पोटैशियम
D) कैल्शियम
सही उत्तर: A) लिथियम
व्याख्या: लिथियम समूह 1 का सदस्य है और इसका परमाणु सबसे हल्का होने के कारण इसे सबसे हल्का क्षारीय धातु माना जाता है।
86. कौन‑सा तत्व d‑ब्लॉक का संक्रमण धातु है?
A) तांबा
B) सोडियम
C) हीलियम
D) सिलिकॉन
सही उत्तर: A) तांबा
व्याख्या: तांबा में अधूरा d‑ऑर्बिटल होने के कारण यह संक्रमण धातु कहलाता है और उद्योग में उपयोग होता है।
87. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनीकरण ऊर्जा क्यों घटती है?
A) परमाणु द्रव्यमान बढ़ने से
B) बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होने से
C) न्यूट्रॉन संख्या कम होने से
D) वैद्युत ऋणात्मकता बढ़ने से
सही उत्तर: B) बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होने से
व्याख्या: बाहरी इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण कम होने से इन्हें हटाना आसान हो जाता है।
88. समूह 18 के तत्वों को क्या कहा जाता है?
A) हलोजन
B) निष्क्रिय गैस
C) क्षार धातु
D) संक्रमण धातु
सही उत्तर: B) निष्क्रिय गैस
व्याख्या: समूह 18 के तत्व पूर्ण बाहरी इलेक्ट्रॉन कक्षा होने के कारण रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
89. कौन‑सा तत्व हलोजन है?
A) क्लोरीन
B) सोडियम
C) कैल्शियम
D) ऑक्सीजन
सही उत्तर: A) क्लोरीन
व्याख्या: क्लोरीन समूह 17 का सदस्य है और अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातु है।
90. कौन‑सा तत्व s‑ब्लॉक में आता है?
A) लिथियम
B) क्लोरीन
C) ऑक्सीजन
D) सिलिकॉन
सही उत्तर: A) लिथियम
व्याख्या: s‑ब्लॉक में समूह 1 और 2 के तत्व आते हैं और इनमें 1 या 2 बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं।
91. d‑ब्लॉक तत्वों में क्या विशेषता होती है?
A) उपधातु गुण
B) कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
C) निष्क्रिय गैस गुण
D) हल्का वजन
सही उत्तर: B) कई ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
व्याख्या: अधूरा d‑ऑर्बिटल d‑ब्लॉक तत्वों को विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करने में सक्षम बनाता है।
92. f‑ब्लॉक तत्वों में कौन‑से तत्व रेडियोधर्मी होते हैं?
A) लैंथेनाइड्स
B) एक्टिनाइड्स
C) s‑ब्लॉक
D) p‑ब्लॉक
सही उत्तर: B) एक्टिनाइड्स
व्याख्या: एक्टिनाइड्स रेडियोधर्मी होते हैं और इन्हें परमाणु ऊर्जा और अनुसंधान में उपयोग किया जाता है।
93. हलोजन तत्व किसके साथ आसानी से प्रतिक्रिया करते हैं?
A) क्षारीय धातु
B) निष्क्रिय गैस
C) उपधातु
D) d‑ब्लॉक धातु
सही उत्तर: A) क्षारीय धातु
व्याख्या: हलोजन अत्यधिक अभिक्रियाशील होते हैं और आसानी से क्षारीय धातुओं के साथ यौगिक बनाते हैं।
94. कौन‑सा तत्व p‑ब्लॉक का अधातु है?
A) ऑक्सीजन
B) लोहा
C) सोडियम
D) मैग्नीशियम
सही उत्तर: A) ऑक्सीजन
व्याख्या: ऑक्सीजन p‑ब्लॉक का प्रमुख अधातु है और जीवन और रासायनिक प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
95. समूह 2 के तत्वों की क्रियाशीलता समूह 1 के मुकाबले कैसी होती है?
A) अधिक
B) कम
C) समान
D) यादृच्छिक
सही उत्तर: B) कम
व्याख्या: समूह 2 के तत्वों में बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होने के कारण ये कम अभिक्रियाशील होते हैं।
96. कौन‑सा तत्व उपधातु है?
A) सिलिकॉन
B) सोडियम
C) हीलियम
D) लोहा
सही उत्तर: A) सिलिकॉन
व्याख्या: सिलिकॉन उपधातु है क्योंकि इसमें धातु और अधातु दोनों गुण पाए जाते हैं।
97. s‑ब्लॉक तत्वों की मुख्य विशेषता क्या है?
A) अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु
B) निष्क्रिय गैस
C) उपधातु
D) रंगीन यौगिक बनाना
सही उत्तर: A) अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु
व्याख्या: s‑ब्लॉक में समूह 1 और 2 के तत्व आते हैं, जिनमें 1–2 बाहरी इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो इन्हें अभिक्रियाशील बनाते हैं।
98. कौन‑सा तत्व क्षारीय धातु है?
A) सोडियम
B) कैल्शियम
C) लोहा
D) ऑक्सीजन
सही उत्तर: A) सोडियम
व्याख्या: सोडियम समूह 1 का सदस्य है और अत्यधिक अभिक्रियाशील क्षारीय धातु है।
99. f‑ब्लॉक तत्वों में कौन‑सी श्रृंखला अधिक रेडियोधर्मी है?
A) लैंथेनाइड्स
B) एक्टिनाइड्स
C) s‑ब्लॉक
D) p‑ब्लॉक
सही उत्तर: B) एक्टिनाइड्स
व्याख्या: एक्टिनाइड्स में अधिकांश तत्व रेडियोधर्मी होते हैं और परमाणु उद्योग में उपयोग किए जाते हैं।
100. कौन‑सा तत्व d‑ब्लॉक का संक्रमण धातु है?
A) तांबा
B) सोडियम
C) हीलियम
D) सिलिकॉन
सही उत्तर: A) तांबा
व्याख्या: तांबा में अधूरा d‑ऑर्बिटल होने के कारण यह संक्रमण धातु कहलाता है और उद्योग में उपयोग होता है।
Most Important Diagram (NCERT BASED)
1). Modern Periodic Table
1. Groups (1–18)
- Meaning: Groups वो columns होते हैं जो vertical यानी ऊपर से नीचे की ओर चलते हैं।
- Significance:
- एक ही group के elements में बाहरी इलेक्ट्रॉन्स की संख्या समान होती है।
- इससे उनके रासायनिक गुण और अभिक्रियाशीलता में समानता आती है।
- Example: Group 1 → Alkali metals, Group 17 → Halogens, Group 18 → Noble gases।
- Exam Tip: कभी-कभी diagram में पूछा जाता है “कौन से elements एक group में हैं” या “Group number identify करो।”
2. Periods (1–7)
- Meaning: Periods वो rows होते हैं जो horizontal यानी बाएँ से दाएँ की ओर चलते हैं।
- Significance:
- एक period के elements में ऊपरी कक्षा (outer shell) में इलेक्ट्रॉन्स क्रमशः भरते हैं।
- इससे परमाणु आकार, आयनीकरण ऊर्जा, वैद्युत ऋणात्मकता के trends समझ में आते हैं।
- Example: Period 2 → Li, Be, B, C, N, O, F, Ne।
- Exam Tip: Short question में अक्सर “Period number बताइए” या “Period में element कौन‑सा है” पूछा जाता है।
3. s-block
- Meaning: s‑block में वो elements आते हैं जिनका outermost electron s-orbital में होता है।
- Significance:
- इसमें Group 1 (Alkali metals) और Group 2 (Alkaline earth metals) आते हैं।
- ये अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु होते हैं
-
Exam Tip: S‑block को अलग shade या color से दिखाना जरूरी होता है।
4. p-block
- Meaning: p‑block में वो elements होते हैं जिनके outermost electron p-orbital में होते हैं।
- Significance:
- इसमें Groups 13–18 आते हैं।
- इसमें धातु, अधातु और उपधातु सभी पाए जाते हैं।
- Example: Carbon, Nitrogen, Oxygen, Fluorine।
- Exam Tip: Exam में p-block elements की classification या trend diagram पूछ सकते हैं।
5. d-block (Transition metals)
- Meaning: d‑block में वो elements आते हैं जिनका outermost d-orbital partially filled होता है।
- Significance:
- इनमें लोहा, तांबा, जस्ता जैसे metals आते हैं।
- ये रंगीन यौगिक बनाते हैं, उत्प्रेरक के रूप में उपयोगी होते हैं।
-
Exam Tip: अक्सर short answer या MCQ में d-block के properties पूछे जाते हैं।
6. f-block (Lanthanides & Actinides)
- Meaning: f‑block elements में वो elements आते हैं जिनका outermost f-orbital partially filled होता है।
Significance:
- Lanthanides → Rare earth elements (Period 6)
- Actinides → Mostly radioactive (Period 7)
-
Exam Tip: हमेशा diagram में bottom rows दिखाए जाते हैं, यह exam trick के लिए important है।
7. Alkali Metals (Group 1)
- Meaning: समूह 1 के धातु।
- Significance: अत्यधिक अभिक्रियाशील।
- Example: Li, Na, K
- Exam Tip: अक्सर properties + reactions diagram-based question में पूछते हैं।
8. Alkaline Earth Metals (Group 2)
- Meaning: समूह 2 के धातु।
- Significance: थोड़ा कम अभिक्रियाशील, जीव विज्ञान में और industry में उपयोग।
- Example: Be, Mg, Ca
- Exam Tip: Group trends + reactions exam में पूछे जाते हैं।
9. Halogens (Group 17)
- Meaning: अत्यधिक अभिक्रियाशील अधातु।
- Significance: Salt formation, disinfectants।
- Example: F, Cl, Br
- Exam Tip: Diagram में group highlight करना और symbol label करना जरूरी।
10. Noble Gases (Group 18)
- Meaning: पूरी outer shell वाले तत्व।
- Significance: रासायनिक रूप से स्थिर, ज्यादातर गैसें।
- Example: He, Ne, Ar
- Exam Tip: सबसे right side में दिखाना जरूरी है।
11. Atomic Numbers in boxes
- Meaning: हर element के box में उसका atomic number लिखा होता है।
- Significance: यह बताता है कि element में कितने प्रोटॉन हैं और placement क्यों हुआ।
- Exam Tip: Short answer में atomic number + symbol से question पूछ सकते हैं।
12. Color-coded blocks
- Meaning: s, p, d, f blocks अलग color या shading में दिखाए जाते हैं।
- Significance: Easy visual differentiation।
- Exam Tip: Handwritten diagram में color/ shading show करना recommended।
2). Periodic Table S,P,D,F Blocks
Diagram 2: s, p, d, f Block Elements Layout
Purpose of diagram:
- यह diagram बताता है कि आवर्त सारणी में कौन-सा element किस block में आता है।
- Exam में diagram + short answer questions में अक्सर पूछते हैं।
Labels in the diagram:
1. s‑block
- Meaning: Elements जिनका outermost electron s-orbital में होता है।
- Position: Groups 1–2 (left-most columns)
- Significance:
- अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ।
- बाहरी इलेक्ट्रॉन = 1 या 2।
- Alkali metals (Group 1) और Alkaline earth metals (Group 2) इसमें शामिल।
- Example: Li, Na, K, Be, Mg
- Exam Tip: S‑block को अलग shade या underline करना चाहिए।
2. p‑block
- Meaning: Elements जिनका outermost electron p-orbital में होता है।
- Position: Groups 13–18 (right-most columns)
- Significance:
- Contains metals, non-metals, semi-metals (उपधातु)।
- Diverse chemical properties।
- Example: C, N, O, F, Si, Cl
- Exam Tip: Group trends (atomic size, electronegativity) diagram में दिखा सकते हैं।
3. d‑block
- Meaning: Transition elements जिनका outermost electron d-orbital में partially filled होता है।
- Position: Groups 3–12 (middle block)
- Significance:
- Multiple oxidation states।
- Colourful compounds, catalysts।
- Example: Fe, Cu, Zn
- Exam Tip: Color-coded shading में दिखाना recommended।
4. f‑block
- Meaning: Elements जिनका outermost electron f-orbital partially filled होता है।
- Position: Separate bottom two rows of periodic table.
- Lanthanides → Period 6
- Actinides → Period 7
-
Significance:
-
Rare earth elements, radioactive elements.
-
- Example: La, Ce, Th, U
- Exam Tip: Bottom rows में अलग दिखाना जरूरी।
5. Block Labels
- Meaning: s, p, d, f को diagram में visible label के रूप में दिखाना।
- Significance:
- Helps in quick recognition of element properties।
- Exam में diagram-based question के लिए essential।
- Example: Label “s-block”, “p-block” with arrows pointing to columns.
6. Group Numbers in Columns
- Meaning: Columns के ऊपर 1–18 group numbers।
- Significance:
- Shows number of valence electrons.
- Helps in identifying group trends (reactivity, metallic/non-metallic behavior)।
7. Period Numbers in Rows
- Meaning: Rows के बाईं ओर 1–7 periods।
- Significance:
- Shows electron filling order।
- Helps in drawing trends like atomic radius and ionization energy।
8. Color Coding / Shading
- Meaning: अलग blocks को अलग रंग में दिखाया जाता है।
- Significance:
- Quick visual understanding of s, p, d, f blocks।
- Exam में handwritten diagrams में shading/colored pencil recommended
9. Example Elements
-
Meaning: Each block में कुछ example elements लिखना।
-
Significance:
-
Helps in memorizing which element belongs to which block।
-
-
Example: Li, Be → s‑block; C, N, O → p‑block; Fe, Cu → d‑block; La, Ce → f‑block।
10. Arrows/Notes for trends (Optional)
- Meaning: Optional arrows showing trends in block (like electronegativity, atomic size)।
- Significance:
- Makes diagram more informative।
- Board exam में extra mark मिल सकता है।
3). Trends in Atomic Size
Diagram 3: Trends in Atomic Size (परमाणु आकार प्रवृत्ति)
Purpose of diagram:
- यह diagram दिखाता है कि period और group में atomic size कैसे बदलता है।
- Exam में trend-based questions में अक्सर इस्तेमाल होता है।
Labels in the diagram:
1. Periodic Table Fragment
- Meaning: पूरे table का छोटा हिस्सा जिसमें कुछ periods और groups दिखाए गए हैं।
Significance:
- Focused section दिखाकर atomic size trend समझाया जा सके।
- Example Elements: Li, Be, B, C, N, O, F, Ne (Period 2)
- Exam Tip: Exam में full periodic table नहीं, सिर्फ trend वाला fragment दिखाना चाहिए।
2. Horizontal Arrow (→) across Period
- Meaning: Period में left to right (वाम से दाहिने) arrow।
- Significance:
- Indicates atomic size decreases across period।
- कारण: Nucleus में प्रोटॉन्स की संख्या बढ़ती है → electron को nucleus की ओर अधिक खींचता है → atomic radius घटता है।
- Example: Li → Be → B → C → N → O → F → Ne (size घटता है)
- Exam Tip: Arrow और explanation दोनों handwritten style में लिखें।
3. Vertical Arrow (↓) down Group
- Meaning: Group में ऊपर से नीचे arrow।
- Significance:
- Shows atomic size increases down a group।
- कारण: हर नीचे आने वाले element में एक extra electron shell जुड़ता है → nucleus से electron दूर → size बढ़ता है।
- Example: Li → Na → K → Rb (size बढ़ता है)
- Exam Tip: Group trends का यह arrow diagram में जरूरी है।
4. Example Elements in Groups
- Meaning: Arrow के पास कुछ elements label किए जाते हैं।
Significance:
- Helps students visualize trend in real elements।
- Example: Group 1: Li, Na, K; Period 2: Li, Be, B, C, N, O, F, Ne
- Exam Tip: Labels handwritten और clear होना चाहिए।
5. Atomic Radius Labels
- Meaning: हर element के पास उसकी atomic size का approximate radius लिखा जा सकता है।
- Significance:
- Quantitative understanding।
- Helps in comparing sizes.
- Example: Li > Be > B …
- Exam Tip: Optional, लेकिन diagram में डालने से diagram full marks के लिए strong बन जाता है।
6. Trend Explanation Box (Optional)
- Meaning: छोटे diagram के पास trend का short note लिख सकते हैं।
Significance:
- Arrow + explanation together → examiner को full clarity दिखाता है।
- Example: “Atomic size decreases → across period; increases ↓ down group”
- Exam Tip: Handwritten box with arrows enhances diagram marks।
7. Color Coding / Shading (Optional)
- Meaning: Trend को visually दिखाने के लिए arrow/color shading use करना।
- Significance:
- High clarity → easy to read
- Students often get extra marks for clarity.
💡 Summary:
-
Atomic size diagram के main labels:
- Periodic table fragment
- Horizontal arrow → across period
- Vertical arrow ↓ down group
- Example elements (Li, Be, Na, K …)
- Atomic radius values (optional)
- Trend explanation box (optional)
- Color-coded arrows (optional)
-
Key Exam Tip:
-
Arrow direction + handwritten labels + example elements show the trend clearly → full marks in diagram questions।
4). Ionization Energy Trend
Diagram 4: Ionization Energy Trend (आयनीकरण ऊर्जा प्रवृत्ति)
Purpose of diagram:
- यह diagram दिखाता है कि period और group में ionization energy (IE) कैसे बदलती है।
- Exam में trend-based question या diagram-based question में अक्सर पूछा जाता है।
Labels in the diagram:
1. Periodic Table Fragment
- Meaning: पूरे table का छोटा हिस्सा जिसमें कुछ periods और groups दिखाए गए हैं।
Significance:
- Focused section दिखाकर IE trend समझाया जा सके।
- Example Elements: Li, Be, B, C, N, O, F, Ne (Period 2)
- Exam Tip: Exam में full periodic table नहीं, सिर्फ trend वाला fragment दिखाना चाहिए।
2. Horizontal Arrow (→) across Period
- Meaning: Left to right arrow in a period।
- Significance:
- Shows IE increases across a period।
- कारण: Nucleus में प्रोटॉन्स की संख्या बढ़ती है → electrons nucleus के करीब खिंचते हैं → बाहर के electron को निकालना मुश्किल → ionization energy बढ़ती है।
- Example: Li → Be → B → C → N → O → F → Ne (IE बढ़ता है)
- Exam Tip: Arrow और short explanation handwritten में दिखाना जरूरी है।
3. Vertical Arrow (↓) down Group
- Meaning: Top to bottom arrow in a group।
- Significance:
- Shows IE decreases down a group।
- कारण: Electron shell बढ़ जाती है → outer electron nucleus से दूर → ionization energy कम।
- Example: Li → Na → K → Rb (IE घटता है)
- Exam Tip: Group trend diagram में arrow essential है।
4. Example Elements in Groups
- Meaning: Arrow के पास कुछ elements के symbols लिखे जाते हैं।
Significance:
- Helps in visualizing trend in real elements।
- Example: Group 1: Li, Na, K; Period 2: Li, Be, B, C, N, O, F, Ne
- Exam Tip: Handwritten labels और clear element symbols दिखाना exam में scoring point है।
5. Ionization Energy Values (Optional)
- Meaning: प्रत्येक element के पास उसकी approximate first ionization energy (kJ/mol) लिख सकते हैं।
- Significance:
- Quantitative understanding।
- Trends को numerical रूप में दिखाने में मदद करता है।
- Example: Li (520) < Be (900) < B (800)…
- Exam Tip: Optional, लेकिन diagram में डालने से diagram अधिक informative बन जाता है।
6. Trend Explanation Box (Optional)
- Meaning: छोटे diagram के पास short note लिख सकते हैं।
Significance:
- Arrow + explanation together → examiner को clear understanding।
- Example: “Ionization energy increases → across period; decreases ↓ down group”
- Exam Tip: Handwritten box with arrows enhances diagram marks।
7. Color Coding / Shading (Optional)
- Meaning: Increasing IE → light to dark color gradient
Significance:
- Visual clarity, trends दिखाने में मदद।
- Exam Tip: Optional लेकिन diagrams ज्यादा attractive और marks-worthy बन जाते हैं।
💡 Summary:
-
Ionization Energy Trend Diagram Labels:
-
Periodic table fragment
- Horizontal arrow → across period (IE increases)
- Vertical arrow ↓ down group (IE decreases)
- Example elements (Li, Be, Na, K, F, Ne)
- Ionization energy values (optional)
- Trend explanation box (optional)
- Color-coded shading (optional)
-
Exam Tip:
- Handwritten + arrows + element labels + trend explanation → full marks diagram।
- Example elements लिखने से diagram clear और conceptually strong बनता है।
5). Increasing Electromagnetically
Diagram 5: Electronegativity Trend (वैद्युत ऋणात्मकता प्रवृत्ति)
Purpose of diagram:
- यह diagram दिखाता है कि period और group में electronegativity कैसे बदलती है।
- Exam में trend-based questions या diagram-based questions में frequently पूछा जाता है।
Labels in the diagram:
1. Periodic Table Fragment
- Meaning: पूरे table का छोटा हिस्सा जिसमें कुछ periods और groups दिखाए गए हैं।
- Significance:
- Focused section से trend समझाना आसान होता है।
- Example Elements: Li, Be, B, C, N, O, F (Period 2); Na, Mg, Al, Si (Period 3)
- Exam Tip: Exam में full periodic table नहीं, सिर्फ trend वाला fragment चाहिए।
2. Horizontal Arrow (→) across Period
- Meaning: Left to right arrow across a period।
Significance:
- Indicates electronegativity increases across a period।
- कारण: Nucleus में प्रोटॉन्स की संख्या बढ़ती है → electron को nucleus की ओर अधिक खींचते हैं → atom अधिक इलेक्ट्रॉन आकर्षित करता है।
- Example: Li → Be → B → C → N → O → F (Electronegativity बढ़ती है)
- Exam Tip: Arrow और short handwritten explanation दोनों जरूरी हैं।
3. Vertical Arrow (↓) down Group
- Meaning: Top to bottom arrow in a group।
- Significance:
- Shows electronegativity decreases down a group।
- कारण: Outer electron nucleus से दूर होता है → atom कम electron खींचता है।
- Example: F → Cl → Br → I (Electronegativity घटती है)
- Exam Tip: Group trend arrow handwritten में दिखाना marks-worthy है।
4. Example Elements in Groups
- Meaning: Arrow के पास कुछ elements label किए जाते हैं।
Significance:
- Helps students visualize trend in real elements।
- Example: Group 1: Li, Na, K; Group 17: F, Cl, Br, I
- Exam Tip: Handwritten element symbols + arrows → diagram clear।
5. Electronegativity Values (Optional)
- Meaning: प्रत्येक element के पास approximate Pauling scale value लिख सकते हैं।
Significance:
- Quantitative understanding।
- Helps in comparing elements across period/group.
- Example: F = 3.98, O = 3.44, N = 3.04, Cl = 3.16
- Exam Tip: Optional, लेकिन diagram और informative बनता है।
6. Trend Explanation Box (Optional)
- Meaning: छोटे diagram के पास short note on trend।
Significance:
- Arrow + explanation together → examiner को clarity मिलती है।
- Example: “Electronegativity increases → across period; decreases ↓ down group”
- Exam Tip: Handwritten box with arrows → diagram marks बढ़ता है।
7. Color Coding / Shading (Optional)
- Meaning: Increasing electronegativity → light to dark color gradient.
- Significance:
- Visual clarity, trend जल्दी समझ आता है।
- Exam Tip: Optional, लेकिन diagrams attractive और marks-worthy बन जाते हैं।
💡 Summary:
-
Electronegativity Trend Diagram Labels:
-
Periodic table fragment
- Horizontal arrow → across period (increases)
- Vertical arrow ↓ down group (decreases)
- Example elements (Li, Na, K, F, Cl)
- Electronegativity values (optional)
- Trend explanation box (optional)
- Color-coded shading (optional)
-
Exam Tip:
- Arrow direction + handwritten labels + example elements + optional values → full marks diagram।
- Trends समझने के लिए diagram + explanation दोनों जरूरी।