Most Important Points (NCERT BASED)
🔬 1. जीवन प्रक्रिया की मूल अवधारणा
- वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाए रखती हैं, जीवन प्रक्रियाएँ कहलाती हैं।
- पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन प्रमुख जीवन प्रक्रियाएँ हैं।
- जीवन प्रक्रियाएँ ऊर्जा प्राप्त करने और शरीर की मरम्मत के लिए आवश्यक हैं।
- जीवित और निर्जीव में मुख्य अंतर जीवन प्रक्रियाओं की उपस्थिति है।
- कोशिका जीवन की मूल इकाई है जहाँ अधिकांश जीवन प्रक्रियाएँ होती हैं।
🌱 2. पोषण (Nutrition)
- पोषण वह प्रक्रिया है जिसमें जीव भोजन प्राप्त कर उसका उपयोग करता है।
- पोषण दो प्रकार का होता है – स्वपोषी और परपोषी।
- हरे पौधे स्वपोषी होते हैं क्योंकि वे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
- प्रकाश संश्लेषण पौधों में भोजन बनाने की प्रक्रिया है।
- प्रकाश संश्लेषण में सूर्य का प्रकाश, जल, कार्बन डाइऑक्साइड और क्लोरोफिल आवश्यक हैं।
🌿 प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया
- प्रकाश संश्लेषण में ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन का निर्माण होता है।
- क्लोरोफिल पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट में पाया जाता है।
- रंध्र (Stomata) गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं।
- परपोषी जीव भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं।
- मनुष्य सर्वाहारी है।
🍽 3. मानव में पाचन तंत्र
- पाचन भोजन को सरल अणुओं में बदलने की प्रक्रिया है।
- मुख में लार ग्रंथि एमाइलेज एंजाइम स्रावित करती है।
- भोजन ग्रासनली से होते हुए आमाशय में पहुँचता है।
- आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और पेप्सिन एंजाइम पाए जाते हैं।
- छोटी आंत पाचन और अवशोषण का मुख्य स्थान है।
- यकृत (Liver) पित्त रस बनाता है।
- अग्न्याशय (Pancreas) पाचक एंजाइम बनाता है।
- बड़ी आंत जल का अवशोषण करती है।
- अवांछित पदार्थ मल के रूप में बाहर निकलते हैं।
🫀 मानव पाचन तंत्र
🌬 4. श्वसन (Respiration)
- श्वसन ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया है।
- कोशिकीय श्वसन कोशिका के भीतर होता है।
- माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का पावरहाउस कहते हैं।
- एरोबिक श्वसन में ऑक्सीजन आवश्यक है।
- एनेरोबिक श्वसन बिना ऑक्सीजन के होता है।
- मनुष्य में श्वसन फेफड़ों द्वारा होता है।
- श्वास और श्वसन अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं।
- अल्वियोली गैसों के आदान-प्रदान का स्थान हैं।
🫁 मानव श्वसन तंत्र
❤️ 5. परिवहन (Transportation)
- परिवहन प्रणाली शरीर में पदार्थों का संचार करती है।
- मनुष्य में रक्त परिवहन माध्यम है।
- रक्त में प्लाज्मा, लाल रक्त कण, श्वेत रक्त कण और प्लेटलेट्स होते हैं।
- लाल रक्त कण ऑक्सीजन का वहन करते हैं।
- हृदय एक पेशीय अंग है जो रक्त पंप करता है।
- हृदय में चार कक्ष होते हैं।
- धमनियाँ रक्त को हृदय से बाहर ले जाती हैं।
- शिराएँ रक्त को हृदय की ओर लाती हैं।
- केशिकाएँ सूक्ष्म रक्त वाहिकाएँ हैं।
- पौधों में परिवहन जाइलम और फ्लोएम द्वारा होता है।
- जाइलम जल का परिवहन करता है।
- फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है।
🫀 मानव हृदय संरचना
🚽 6. उत्सर्जन (Excretion)
- उत्सर्जन शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया है।
- मनुष्य में वृक्क (किडनी) मुख्य उत्सर्जन अंग है।
- नेफ्रॉन वृक्क की कार्यात्मक इकाई है।
- मूत्र में यूरिया, जल और लवण होते हैं।
- मूत्राशय में मूत्र संचित होता है।
- पसीना भी एक उत्सर्जन माध्यम है।
- पौधों में अपशिष्ट पदार्थ पत्तियों के झड़ने से निकलते हैं।
- रंध्र और लेंटिसेल गैसों के उत्सर्जन में सहायक हैं।
🧪 मानव उत्सर्जन तंत्र
📚 7. अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Booster Points)
जीवन प्रक्रियाएँ ऊर्जा पर निर्भर हैं।
- ATP ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
- एंजाइम जैव उत्प्रेरक होते हैं।
- पौधों में गैसों का आदान-प्रदान विसरण द्वारा होता है।
- डबल सर्कुलेशन मनुष्य की विशेषता है।
- पाचन, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन आपस में जुड़े हैं।
- प्रत्येक जीवन प्रक्रिया संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
- जीवन प्रक्रियाएँ जीव के अस्तित्व और वृद्धि के लिए अनिवार्य हैं।
Short Answer type Question (NCERT BASED)
प्रश्न 1. जीवन प्रक्रियाएँ किसे कहते हैं और ये क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर: जीवन प्रक्रियाएँ वे सभी जैविक क्रियाएँ हैं जो किसी जीव को जीवित बनाए रखने के लिए आवश्यक होती हैं। इनमें मुख्य रूप से पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन शामिल हैं। ये प्रक्रियाएँ शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं और कोशिकाओं की मरम्मत तथा वृद्धि में सहायता करती हैं। यदि ये रुक जाएँ तो शरीर के अंग कार्य करना बंद कर देते हैं। जीवन प्रक्रियाएँ जीवित और निर्जीव वस्तुओं के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट करती हैं। इसलिए ये अस्तित्व के लिए अनिवार्य हैं।
प्रश्न 2. पोषण की प्रक्रिया जीवों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: पोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव भोजन प्राप्त कर उसे उपयोगी रूप में परिवर्तित करते हैं। भोजन शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है जो विभिन्न क्रियाओं के लिए आवश्यक है। यह नई कोशिकाओं के निर्माण और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत में सहायक होता है। पोषण के बिना वृद्धि और विकास संभव नहीं है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। इसलिए सभी जीवों के लिए पोषण अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 3. स्वपोषी और परपोषी पोषण में क्या अंतर है?
उत्तर: स्वपोषी पोषण में जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, जैसे हरे पौधे। वे सूर्य के प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से भोजन तैयार करते हैं। परपोषी पोषण में जीव अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। मनुष्य और पशु इसका उदाहरण हैं। स्वपोषी जीव खाद्य श्रृंखला का आधार होते हैं। दोनों प्रकार के पोषण प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 4. प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर: प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में भोजन बनाते हैं। इस प्रक्रिया में जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग होता है। क्लोरोफिल प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करता है और उसे रासायनिक ऊर्जा में बदलता है। परिणामस्वरूप ग्लूकोज़ का निर्माण होता है। ऑक्सीजन इस प्रक्रिया का उपउत्पाद है। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 5. रंध्र का क्या कार्य है?
उत्तर: रंध्र पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्र होते हैं। ये गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड अंदर प्रवेश करती है और ऑक्सीजन बाहर निकलती है। रंध्र वाष्पोत्सर्जन की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करते हैं। इनके खुलने और बंद होने से जल की मात्रा संतुलित रहती है। इस प्रकार ये पौधों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 6. मानव पाचन तंत्र के प्रमुख अंगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मानव पाचन तंत्र में मुख, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत और बड़ी आंत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त यकृत और अग्न्याशय सहायक ग्रंथियाँ हैं। मुख में भोजन का प्रारंभिक पाचन होता है। आमाशय में अम्ल और एंजाइम भोजन को तोड़ते हैं। छोटी आंत में पाचन पूर्ण होता है और अवशोषण होता है। बड़ी आंत जल को पुनः अवशोषित करती है।
प्रश्न 7. आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की क्या भूमिका है?
उत्तर: आमाशय में स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन को अम्लीय माध्यम प्रदान करता है। यह पेप्सिन एंजाइम को सक्रिय बनाता है। अम्ल हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। इससे पाचन सुरक्षित रूप से होता है। यह प्रोटीन के विघटन में सहायता करता है। इसलिए इसका संतुलित स्राव आवश्यक है।
प्रश्न 8. छोटी आंत में अवशोषण कैसे होता है?
उत्तर: छोटी आंत की आंतरिक सतह पर विली नामक उभार पाए जाते हैं। ये सतह क्षेत्र को बढ़ाते हैं। विली के भीतर रक्त वाहिकाएँ होती हैं। पचे हुए पोषक तत्व रक्त में अवशोषित हो जाते हैं। यह प्रक्रिया शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषण देती है। इसलिए छोटी आंत अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है।
प्रश्न 9. श्वसन और श्वास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: श्वास एक भौतिक प्रक्रिया है जिसमें हम हवा को अंदर और बाहर लेते हैं। श्वसन एक रासायनिक प्रक्रिया है जो कोशिकाओं के भीतर होती है। श्वसन में ग्लूकोज़ का ऑक्सीकरण होता है। इससे ऊर्जा ATP के रूप में उत्पन्न होती है। श्वास श्वसन की बाहरी क्रिया है। दोनों मिलकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
प्रश्न 10. एरोबिक श्वसन की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: एरोबिक श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। इसमें ग्लूकोज़ पूरी तरह टूट जाता है। इससे अधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनते हैं। यह प्रक्रिया माइटोकॉन्ड्रिया में होती है। यह सामान्य परिस्थितियों में होने वाली श्वसन क्रिया है।
प्रश्न 11. एनेरोबिक श्वसन कब और कैसे होता है?
उत्तर: एनेरोबिक श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। यह कम ऊर्जा उत्पन्न करता है। तीव्र व्यायाम के समय मांसपेशियों में होता है। इससे लैक्टिक अम्ल बनता है। यह अस्थायी ऊर्जा स्रोत है। अधिक समय तक रहने पर थकान उत्पन्न करता है।
प्रश्न 12. हृदय की संरचना और कार्य समझाइए।
उत्तर: हृदय एक पेशीय अंग है जो छाती के मध्य स्थित होता है। इसमें चार कक्ष होते हैं – दो आलिंद और दो निलय। यह रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है। ऑक्सीजनयुक्त और अशुद्ध रक्त को अलग रखता है। इसकी नियमित धड़कन जीवन के लिए आवश्यक है। यह परिसंचरण तंत्र का मुख्य अंग है।
प्रश्न 13. रक्त के घटकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: रक्त में प्लाज्मा, लाल रक्त कण, श्वेत रक्त कण और प्लेटलेट्स होते हैं। प्लाज्मा तरल भाग है। लाल रक्त कण ऑक्सीजन का वहन करते हैं। श्वेत रक्त कण रोगों से रक्षा करते हैं। प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनाने में सहायक होते हैं। ये सभी मिलकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं।
प्रश्न 14. धमनियाँ और शिराएँ कैसे भिन्न हैं?
उत्तर: धमनियाँ रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती हैं। इनमें रक्त का दबाव अधिक होता है। शिराएँ रक्त को वापस हृदय तक लाती हैं। इनमें वाल्व पाए जाते हैं। धमनियों की दीवार मोटी होती है। शिराओं की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है।
प्रश्न 15. डबल सर्कुलेशन क्या है?
उत्तर: डबल सर्कुलेशन वह प्रक्रिया है जिसमें रक्त हृदय से दो बार गुजरता है। एक बार फेफड़ों के लिए और दूसरी बार शरीर के लिए। इससे ऑक्सीजनयुक्त और अशुद्ध रक्त अलग रहता है। यह ऊर्जा की आपूर्ति को प्रभावी बनाता है। मनुष्य में यह प्रणाली पाई जाती है। यह उच्च स्तर के जीवों की विशेषता है।
प्रश्न 16. पौधों में जल का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर: पौधों में जल का परिवहन जाइलम द्वारा होता है। जड़ें मिट्टी से जल अवशोषित करती हैं। यह जल तने के माध्यम से ऊपर पहुँचता है। वाष्पोत्सर्जन इस प्रक्रिया को सहारा देता है। जाइलम नलिकाएँ इसे पत्तियों तक पहुँचाती हैं। यह पौधों के जीवन के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 17. फ्लोएम का कार्य क्या है?
उत्तर: फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को अन्य भागों तक पहुँचाता है। यह भोजन घुलनशील रूप में परिवहन होता है। फ्लोएम ऊतक जीवित कोशिकाओं से बना होता है। यह ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में कार्य करता है। इससे पौधे का संपूर्ण विकास संभव होता है।
प्रश्न 18. उत्सर्जन की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर: शरीर में चयापचय क्रियाओं से अपशिष्ट पदार्थ बनते हैं। यदि ये जमा हो जाएँ तो विषैले प्रभाव डाल सकते हैं। उत्सर्जन इन पदार्थों को बाहर निकालता है। वृक्क रक्त को छानकर मूत्र बनाता है। यह शरीर का संतुलन बनाए रखता है। स्वस्थ जीवन के लिए उत्सर्जन आवश्यक है।
प्रश्न 19. नेफ्रॉन की संरचना बताइए।
उत्तर: नेफ्रॉन वृक्क की सूक्ष्म इकाई है। इसमें ग्लोमेरुलस और बोमैन कैप्सूल होते हैं। यह रक्त को छानने का कार्य करता है। आवश्यक पदार्थ पुनः अवशोषित होते हैं। शेष अपशिष्ट मूत्र के रूप में निकलते हैं। प्रत्येक वृक्क में लाखों नेफ्रॉन होते हैं।
प्रश्न 20. ATP को ऊर्जा मुद्रा क्यों कहा जाता है?
उत्तर: ATP कोशिका में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। श्वसन प्रक्रिया से इसका निर्माण होता है। यह रासायनिक ऊर्जा संग्रहीत करता है। आवश्यकता पड़ने पर ऊर्जा मुक्त करता है। सभी जीवन प्रक्रियाएँ ATP पर निर्भर करती हैं। इसलिए इसे ऊर्जा मुद्रा कहा जाता है।
प्रश्न 21. जीवन प्रक्रियाओं में ऊर्जा की क्या भूमिका है?
उत्तर: जीवन प्रक्रियाओं के संचालन के लिए ऊर्जा अत्यंत आवश्यक होती है। बिना ऊर्जा के कोई भी जैविक क्रिया संभव नहीं है। भोजन से प्राप्त रासायनिक ऊर्जा श्वसन के माध्यम से ATP में परिवर्तित होती है। यही ATP कोशिकाओं को कार्य करने की शक्ति देता है। वृद्धि, संचलन, पाचन और उत्सर्जन जैसी सभी प्रक्रियाएँ ऊर्जा पर निर्भर करती हैं। यदि ऊर्जा की आपूर्ति रुक जाए तो कोशिकाएँ निष्क्रिय हो जाती हैं। इसलिए ऊर्जा जीवन का आधार मानी जाती है।
प्रश्न 22. एंजाइम क्या हैं और इनका महत्व क्या है?
उत्तर: एंजाइम जैव उत्प्रेरक होते हैं जो रासायनिक क्रियाओं की गति बढ़ाते हैं। ये प्रोटीन से बने विशेष पदार्थ होते हैं। पाचन प्रक्रिया में विभिन्न एंजाइम भोजन को सरल अणुओं में तोड़ते हैं। एंजाइम विशेष परिस्थितियों में ही कार्य करते हैं, जैसे उचित तापमान और pH। इनके बिना शरीर की रासायनिक क्रियाएँ बहुत धीमी हो जातीं। इसलिए एंजाइम जीवन प्रक्रियाओं के सुचारु संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 23. कोशिकीय श्वसन क्या है?
उत्तर: कोशिकीय श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिका के अंदर ग्लूकोज़ का ऑक्सीकरण होता है। यह प्रक्रिया मुख्यतः माइटोकॉन्ड्रिया में संपन्न होती है। इसमें ऊर्जा ATP के रूप में उत्पन्न होती है। इस दौरान कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनते हैं। कोशिकीय श्वसन शरीर की प्रत्येक जीवित कोशिका में होता है। यही प्रक्रिया जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करती है।
प्रश्न 24. माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का पावरहाउस क्यों कहा जाता है?
उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के भीतर ऊर्जा उत्पादन का मुख्य केंद्र है। यहीं पर एरोबिक श्वसन की प्रक्रिया पूरी होती है। यह ग्लूकोज़ को तोड़कर ATP का निर्माण करता है। ATP कोशिका की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करता है। ऊर्जा के बिना कोशिका कार्य नहीं कर सकती। इसलिए माइटोकॉन्ड्रिया को पावरहाउस कहा जाता है।
प्रश्न 25. वाष्पोत्सर्जन क्या है और इसका क्या महत्व है?
उत्तर: वाष्पोत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों की पत्तियों से जल वाष्प के रूप में बाहर निकलता है। यह मुख्यतः रंध्रों के माध्यम से होता है। इससे पौधे में जल का ऊपर की ओर प्रवाह बना रहता है। यह तापमान को नियंत्रित करने में भी सहायक है। वाष्पोत्सर्जन पौधे को शीतल बनाए रखता है। यह जल चक्र का भी महत्वपूर्ण भाग है।
प्रश्न 26. मनुष्य में गैसों का आदान-प्रदान कहाँ और कैसे होता है?
उत्तर: मनुष्य में गैसों का आदान-प्रदान फेफड़ों की अल्वियोली में होता है। अल्वियोली की दीवारें पतली और रक्त वाहिकाओं से घिरी होती हैं। यहाँ ऑक्सीजन रक्त में प्रवेश करती है। कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से बाहर निकलती है। यह प्रक्रिया विसरण के सिद्धांत पर आधारित है। इससे शरीर को निरंतर ऑक्सीजन मिलती रहती है।
प्रश्न 27. लाल रक्त कणों का क्या महत्व है?
उत्तर: लाल रक्त कणों में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन पाया जाता है। यह ऑक्सीजन को बाँधकर पूरे शरीर में पहुँचाता है। ये कोशिकाओं को ऊर्जा उत्पादन के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं। इनकी संख्या कम होने पर एनीमिया हो सकता है। यह शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। इसलिए लाल रक्त कण जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
प्रश्न 28. श्वेत रक्त कणों का कार्य क्या है?
उत्तर: श्वेत रक्त कण शरीर की रक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। ये हानिकारक जीवाणुओं और वायरस को नष्ट करते हैं। संक्रमण होने पर इनकी संख्या बढ़ जाती है। ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। शरीर को बाहरी खतरों से बचाते हैं। इस प्रकार ये स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।
प्रश्न 29. प्लेटलेट्स की भूमिका क्या है?
उत्तर: प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनाने में सहायता करते हैं। जब शरीर में चोट लगती है तो ये सक्रिय हो जाते हैं। ये रक्तस्राव को रोकने में मदद करते हैं। थक्का बनने से अधिक रक्त की हानि नहीं होती। यह जीवन रक्षक प्रक्रिया है। प्लेटलेट्स की कमी होने पर रक्तस्राव अधिक हो सकता है।
प्रश्न 30. डायलिसिस क्या है और कब आवश्यक होता है?
उत्तर: डायलिसिस एक चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें मशीन द्वारा रक्त को शुद्ध किया जाता है। जब वृक्क सही ढंग से कार्य नहीं करते तब यह आवश्यक होता है। मशीन अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालती है। यह अस्थायी रूप से वृक्क का कार्य करती है। इससे रोगी का जीवन बचाया जा सकता है। यह आधुनिक चिकित्सा की महत्वपूर्ण तकनीक है।
प्रश्न 31. मनुष्य में श्वसन की प्रक्रिया चरणबद्ध रूप में समझाइए।
उत्तर: मनुष्य में श्वसन दो मुख्य चरणों में होता है – श्वास और कोशिकीय श्वसन। श्वास के दौरान हम ऑक्सीजन युक्त वायु को अंदर लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं। यह प्रक्रिया फेफड़ों द्वारा संपन्न होती है। फेफड़ों से ऑक्सीजन रक्त में मिल जाती है। रक्त इसे कोशिकाओं तक पहुँचाता है जहाँ ग्लूकोज़ का ऑक्सीकरण होता है। इस प्रकार ऊर्जा उत्पन्न होती है जो शरीर की सभी क्रियाओं के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 32. डायफ्राम का श्वसन में क्या योगदान है?
उत्तर: डायफ्राम एक पेशीय झिल्ली है जो छाती और पेट की गुहा को अलग करती है। श्वास लेते समय यह नीचे की ओर खिंचता है जिससे फेफड़ों में स्थान बढ़ता है। इससे वायु अंदर प्रवेश करती है। श्वास छोड़ते समय यह ऊपर उठता है। इससे फेफड़ों से वायु बाहर निकलती है। इस प्रकार डायफ्राम श्वसन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 33. अमीबा में पोषण की प्रक्रिया कैसे होती है?
उत्तर: अमीबा में पोषण होलोज़ोइक प्रकार का होता है। यह अपने छद्मपादों की सहायता से भोजन को घेर लेता है। भोजन एक खाद्य रिक्तिका में बंद हो जाता है। एंजाइम भोजन को सरल रूप में बदलते हैं। अवशोषण के बाद शेष पदार्थ बाहर निकाल दिए जाते हैं। यह एककोशिकीय जीव में पोषण का सरल उदाहरण है।
प्रश्न 34. पाचन और अवशोषण में क्या अंतर है?
उत्तर: पाचन वह प्रक्रिया है जिसमें जटिल भोजन को सरल अणुओं में बदला जाता है। यह मुख्यतः पाचन तंत्र में होता है। अवशोषण वह प्रक्रिया है जिसमें पचे हुए पोषक तत्व रक्त में प्रवेश करते हैं। यह छोटी आंत में होता है। पाचन के बिना अवशोषण संभव नहीं है। दोनों प्रक्रियाएँ मिलकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती हैं।
प्रश्न 35. बड़ी आंत का क्या कार्य है?
उत्तर: बड़ी आंत पाचन तंत्र का अंतिम भाग है। यहाँ अपचे भोजन से जल का पुनः अवशोषण होता है। यह शरीर में जल संतुलन बनाए रखने में सहायक है। शेष अपशिष्ट मल के रूप में एकत्रित होता है। यह मलद्वार द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रकार बड़ी आंत उत्सर्जन प्रक्रिया में सहायक है।
प्रश्न 36. यकृत का पाचन में क्या महत्व है?
उत्तर: यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। यह पित्त रस का निर्माण करता है। पित्त वसा के पाचन में सहायता करता है। यह वसा को छोटे-छोटे कणों में तोड़ता है। इससे एंजाइम आसानी से कार्य कर पाते हैं। यकृत शरीर में कई अन्य चयापचय क्रियाओं को भी नियंत्रित करता है।
प्रश्न 37. अग्न्याशय की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि है। यह पाचक एंजाइमों का स्राव करता है। ये एंजाइम कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा को तोड़ते हैं। अग्न्याशय इंसुलिन हार्मोन भी बनाता है। इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर नियंत्रित करता है। इसलिए यह पाचन और चयापचय दोनों में महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 38. रक्तचाप क्या है और इसका महत्व क्या है?
उत्तर: रक्तचाप वह दबाव है जो रक्त धमनियों की दीवारों पर डालता है। यह हृदय की धड़कन से उत्पन्न होता है। सामान्य रक्तचाप शरीर के लिए आवश्यक है। अत्यधिक रक्तचाप स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यह परिसंचरण की स्थिति को दर्शाता है। संतुलित रक्तचाप स्वस्थ जीवन का संकेत है।
प्रश्न 39. परिसंचरण तंत्र के मुख्य घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: परिसंचरण तंत्र में हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाएँ शामिल हैं। हृदय रक्त को पंप करता है। रक्त ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का परिवहन करता है। धमनियाँ और शिराएँ रक्त को विभिन्न भागों तक पहुँचाती हैं। केशिकाएँ सूक्ष्म आदान-प्रदान का कार्य करती हैं। यह तंत्र शरीर को सक्रिय बनाए रखता है।
प्रश्न 40. पौधों में भोजन का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर: पौधों में भोजन का परिवहन फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है। पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनता है। यह घुलनशील रूप में अन्य भागों तक पहुँचाया जाता है। फ्लोएम द्विदिशीय परिवहन करता है। इससे जड़, तना और फल पोषण प्राप्त करते हैं। यह पौधे की वृद्धि के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 41. नेफ्रॉन मूत्र निर्माण में किस प्रकार कार्य करता है?
उत्तर: नेफ्रॉन वृक्क की सूक्ष्म कार्यात्मक इकाई है जो रक्त को छानने का कार्य करती है। सबसे पहले ग्लोमेरुलस में रक्त का निस्यंदन होता है। इसके बाद उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज़ और लवण पुनः अवशोषित कर लिए जाते हैं। शेष अपशिष्ट द्रव नलिका से आगे बढ़ता है। यह द्रव अंततः मूत्र का रूप ले लेता है। इस पूरी प्रक्रिया से शरीर का रासायनिक संतुलन बना रहता है।
प्रश्न 42. वृक्क शरीर का संतुलन कैसे बनाए रखते हैं?
उत्तर: वृक्क रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को अलग करते हैं। ये अतिरिक्त जल और लवण को नियंत्रित मात्रा में बाहर निकालते हैं। इससे शरीर में द्रव संतुलन बना रहता है। वृक्क अम्ल-क्षार संतुलन को भी नियंत्रित करते हैं। यदि यह संतुलन बिगड़ जाए तो शरीर की क्रियाएँ प्रभावित होती हैं। इसलिए वृक्क का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 43. पसीना आना किस जीवन प्रक्रिया से संबंधित है?
उत्तर: पसीना आना उत्सर्जन और ताप नियंत्रण से जुड़ी प्रक्रिया है। त्वचा की ग्रंथियाँ जल और लवण बाहर निकालती हैं। इससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है। अधिक गर्मी में पसीना वाष्पीकृत होकर शरीर को ठंडा करता है। यह अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन में भी सहायक है। इस प्रकार यह शरीर की रक्षा में भूमिका निभाता है।
प्रश्न 44. लेंटिसेल क्या होते हैं और इनका कार्य क्या है?
उत्तर: लेंटिसेल तने की सतह पर पाए जाने वाले छोटे छिद्र होते हैं। ये पौधों में गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करते हैं। इनके माध्यम से ऑक्सीजन अंदर जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है। ये विशेषकर लकड़ीदार तनों में पाए जाते हैं। इससे पौधों में श्वसन की प्रक्रिया संभव होती है।
प्रश्न 45. विसरण की प्रक्रिया जीवन प्रक्रियाओं में कैसे सहायक है?
उत्तर: विसरण वह प्रक्रिया है जिसमें अणु उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर जाते हैं। यह गैसों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अल्वियोली में ऑक्सीजन का प्रवेश इसी सिद्धांत से होता है। पौधों में भी गैसों का संचलन विसरण से होता है। यह ऊर्जा रहित लेकिन आवश्यक प्रक्रिया है। जीवन के लिए यह आधारभूत तंत्र है।
प्रश्न 46. भोजन में कार्बोहाइड्रेट का क्या महत्व है?
उत्तर: कार्बोहाइड्रेट शरीर का प्रमुख ऊर्जा स्रोत है। पाचन के बाद यह ग्लूकोज़ में परिवर्तित होता है। ग्लूकोज़ श्वसन के दौरान टूटकर ऊर्जा देता है। यह मस्तिष्क और मांसपेशियों के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से कमजोरी महसूस होती है। संतुलित मात्रा में इसका सेवन आवश्यक है।
प्रश्न 47. प्रोटीन शरीर के लिए क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर: प्रोटीन शरीर के निर्माणकारी तत्व हैं। ये कोशिकाओं और ऊतकों की मरम्मत में सहायक होते हैं। एंजाइम और हार्मोन भी प्रोटीन से बने होते हैं। वृद्धि के लिए प्रोटीन अनिवार्य है। बच्चों और किशोरों के लिए इसका विशेष महत्व है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।
प्रश्न 48. वसा का पाचन कैसे होता है?
उत्तर: वसा का पाचन मुख्यतः छोटी आंत में होता है। यकृत द्वारा निर्मित पित्त वसा को छोटे कणों में तोड़ता है। इसके बाद लाइपेस एंजाइम इसे सरल अणुओं में बदलता है। ये अणु रक्त में अवशोषित हो जाते हैं। वसा ऊर्जा का सघन स्रोत है। यह शरीर को गर्म रखने में भी सहायक है।
प्रश्न 49. फेफड़ों की संरचना श्वसन के लिए कैसे अनुकूलित है?
उत्तर: फेफड़े स्पंजी और लचीले अंग होते हैं। इनमें लाखों अल्वियोली पाई जाती हैं। अल्वियोली की दीवारें पतली होती हैं। ये रक्त के संपर्क में रहती हैं। इससे गैसों का तीव्र आदान-प्रदान संभव होता है। यह संरचना प्रभावी श्वसन सुनिश्चित करती है।
प्रश्न 50. केशिकाएँ परिसंचरण तंत्र में क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर: केशिकाएँ अत्यंत पतली रक्त वाहिकाएँ होती हैं। ये धमनियों और शिराओं को जोड़ती हैं। इनके माध्यम से ऑक्सीजन और पोषक तत्व कोशिकाओं तक पहुँचते हैं। अपशिष्ट पदार्थ रक्त में वापस आते हैं। इनकी दीवार एक कोशिका मोटी होती है। इससे सूक्ष्म स्तर पर आदान-प्रदान संभव होता है।
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अब मैं प्रश्न 51 से 60 तक लिख रहा हूँ।
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प्रश्न 51. हृदय की धड़कन का नियंत्रण कैसे होता है?
उत्तर: हृदय की धड़कन विशेष पेशीय कोशिकाओं द्वारा नियंत्रित होती है। ये कोशिकाएँ स्वतः विद्युत संकेत उत्पन्न करती हैं। यह संकेत हृदय को संकुचित और प्रसारित करते हैं। इससे रक्त पूरे शरीर में पंप होता है। सामान्य धड़कन स्वास्थ्य का संकेत है। इसका अनियमित होना रोग का संकेत हो सकता है।
प्रश्न 52. रक्त में हीमोग्लोबिन का महत्व बताइए।
उत्तर: हीमोग्लोबिन लाल रक्त कणों में पाया जाता है। यह ऑक्सीजन को बाँधने की क्षमता रखता है। इससे ऑक्सीजन शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचती है। इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है। पर्याप्त हीमोग्लोबिन ऊर्जा स्तर बनाए रखता है। यह जीवन प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 53. भोजन का शरीर में वितरण कैसे होता है?
उत्तर: पाचन के बाद पोषक तत्व रक्त में प्रवेश करते हैं। रक्त इन्हें पूरे शरीर में पहुँचाता है। कोशिकाएँ इनका उपयोग ऊर्जा और निर्माण के लिए करती हैं। अतिरिक्त भोजन वसा के रूप में संग्रहित हो सकता है। यह वितरण संतुलित स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इससे शरीर सक्रिय बना रहता है।
प्रश्न 54. श्वसन दर किन कारकों से प्रभावित होती है?
उत्तर: श्वसन दर आयु, गतिविधि और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। व्यायाम के दौरान यह बढ़ जाती है। आराम की स्थिति में यह सामान्य रहती है। रोग या तनाव भी इसे प्रभावित कर सकते हैं। शरीर की ऊर्जा आवश्यकता के अनुसार यह बदलती है। यह जीवन की गतिशीलता को दर्शाती है।
प्रश्न 55. अम्ल-क्षार संतुलन क्यों आवश्यक है?
उत्तर: शरीर में रासायनिक क्रियाएँ संतुलित pH पर ही सही ढंग से होती हैं। अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय स्थिति हानिकारक होती है। वृक्क और श्वसन तंत्र इस संतुलन को बनाए रखते हैं। यह रक्त की स्थिरता के लिए आवश्यक है। असंतुलन से गंभीर रोग हो सकते हैं। इसलिए इसका नियंत्रण जरूरी है।
प्रश्न 56. पौधों में श्वसन कब होता है?
उत्तर: पौधों में श्वसन दिन और रात दोनों समय होता है। दिन में प्रकाश संश्लेषण भी साथ चलता है। रात में केवल श्वसन होता है। इस प्रक्रिया से ऊर्जा प्राप्त होती है। यह कोशिकीय स्तर पर संपन्न होता है। पौधों के जीवित रहने के लिए यह आवश्यक है।
प्रश्न 57. जल संतुलन बनाए रखना क्यों जरूरी है?
उत्तर: जल शरीर की अधिकांश क्रियाओं में भाग लेता है। यह पोषक तत्वों के परिवहन में सहायक है। तापमान नियंत्रित करता है। अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है। जल की कमी से निर्जलीकरण हो सकता है। इसलिए संतुलित जल सेवन आवश्यक है।
प्रश्न 58. मूत्राशय का क्या कार्य है?
उत्तर: मूत्राशय मूत्र को अस्थायी रूप से संग्रहित करता है। यह एक पेशीय थैली है। मूत्र बनने के बाद यहाँ जमा होता है। आवश्यकता पड़ने पर यह बाहर निकाला जाता है। यह उत्सर्जन प्रक्रिया का अंतिम भाग है। इससे शरीर अपशिष्ट से मुक्त होता है।
प्रश्न 59. खाद्य श्रृंखला में स्वपोषी जीवों की भूमिका क्या है?
उत्तर: स्वपोषी जीव खाद्य श्रृंखला का आधार होते हैं। ये सूर्य की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। अन्य जीव इन्हीं पर निर्भर रहते हैं। यदि ये न हों तो ऊर्जा प्रवाह रुक जाएगा। ये पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं। इसलिए इनका महत्व अत्यधिक है।
प्रश्न 60. जीवन प्रक्रियाओं का आपसी संबंध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पोषण से प्राप्त भोजन श्वसन में ऊर्जा देता है। ऊर्जा से परिसंचरण और उत्सर्जन संभव होता है। परिवहन पोषक तत्व और गैसें कोशिकाओं तक पहुँचाता है। उत्सर्जन अपशिष्ट को बाहर निकालता है। ये सभी प्रक्रियाएँ परस्पर जुड़ी हैं। एक के बिना दूसरी पूर्ण नहीं हो सकती।
प्रश्न 61. पादपों में गैसीय विनिमय किस संरचना के माध्यम से होता है?
उत्तर: पादपों में गैसीय विनिमय मुख्य रूप से रंध्र (स्टोमेटा) के माध्यम से होता है, जो पत्तियों की सतह पर उपस्थित सूक्ष्म छिद्र होते हैं। इन रंध्रों के द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का प्रवेश और ऑक्सीजन का निष्कासन होता है। रंध्रों के खुलने और बंद होने की क्रिया संरक्षक कोशिकाओं द्वारा नियंत्रित की जाती है। दिन के समय प्रकाश की उपस्थिति में रंध्र अधिक खुले रहते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण सुचारु रूप से हो सके। इस प्रक्रिया के कारण पौधे अपने आंतरिक चयापचय को संतुलित रखते हैं।
प्रश्न 62. मानव शरीर में पाचन के दौरान एंजाइम की भूमिका क्या है?
उत्तर: एंजाइम जैव-उत्प्रेरक होते हैं जो पाचन क्रिया को तीव्र और प्रभावी बनाते हैं। ये जटिल खाद्य पदार्थों को सरल अणुओं में तोड़ते हैं ताकि उनका अवशोषण आसानी से हो सके। उदाहरण के लिए, एमाइलेज स्टार्च को शर्करा में बदलता है। इसी प्रकार प्रोटीज प्रोटीन को अमीनो अम्ल में परिवर्तित करते हैं। एंजाइम विशिष्ट होते हैं और केवल एक प्रकार के पदार्थ पर ही कार्य करते हैं। इनके बिना पाचन प्रक्रिया बहुत धीमी और अप्रभावी हो जाती।
प्रश्न 63. श्वसन और दहन में क्या अंतर है?
उत्तर: श्वसन एक जैविक प्रक्रिया है जो जीवित कोशिकाओं में धीरे-धीरे होती है, जबकि दहन एक तीव्र रासायनिक प्रक्रिया है। श्वसन में ऊर्जा नियंत्रित रूप से मुक्त होती है और एटीपी के रूप में संचित होती है। दहन में ऊर्जा अचानक ऊष्मा और प्रकाश के रूप में निकलती है। श्वसन शरीर के तापमान पर होता है, जबकि दहन के लिए उच्च तापमान आवश्यक होता है। श्वसन जीवों के लिए आवश्यक है, जबकि दहन सामान्य रासायनिक प्रतिक्रिया है।
प्रश्न 64. वृक्क (किडनी) का शरीर में क्या महत्व है?
उत्तर: वृक्क शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को निकालने का मुख्य अंग है। यह रक्त को छानकर यूरिया, अतिरिक्त जल और लवणों को मूत्र के रूप में बाहर निकालता है। वृक्क शरीर के जल संतुलन और लवण संतुलन को बनाए रखता है। इसके अतिरिक्त यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी सहायक होता है। वृक्क की खराबी से शरीर में विषैले पदार्थ जमा हो सकते हैं। इसलिए यह उत्सर्जन तंत्र का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है।
प्रश्न 65. लार (सलाइवा) का पाचन में क्या योगदान है?
उत्तर: लार मुख में उपस्थित ग्रंथियों द्वारा स्रावित होती है और पाचन की प्रारंभिक अवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें एमाइलेज एंजाइम होता है जो स्टार्च को माल्टोज में परिवर्तित करता है। लार भोजन को मुलायम बनाकर निगलने में सहायक होती है। यह मुख को स्वच्छ रखने और जीवाणुओं को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। लार के अभाव में भोजन निगलना कठिन हो जाता है।
प्रश्न 66. रक्त में प्लाज्मा की क्या भूमिका है?
उत्तर: प्लाज्मा रक्त का तरल भाग है जिसमें रक्त कोशिकाएँ तैरती रहती हैं। यह पोषक तत्वों, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है। प्लाज्मा शरीर में तापमान संतुलन बनाए रखने में भी सहायक है। इसमें प्रोटीन, लवण और एंटीबॉडी उपस्थित रहते हैं जो रोगों से रक्षा करते हैं। प्लाज्मा के बिना रक्त का प्रवाह और परिवहन संभव नहीं होता।
प्रश्न 67. अवायवीय श्वसन कब और क्यों होता है?
उत्तर: अवायवीय श्वसन तब होता है जब कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती। यह प्रक्रिया मुख्यतः मांसपेशियों में तीव्र व्यायाम के समय होती है। इसमें ग्लूकोज का अपूर्ण अपघटन होता है और लैक्टिक अम्ल बनता है। इससे कम ऊर्जा उत्पन्न होती है, परंतु शरीर को तुरंत ऊर्जा मिल जाती है। अवायवीय श्वसन अस्थायी स्थिति में सहायक होता है।
प्रश्न 68. हृदय की संरचना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर: हृदय एक पेशीय अंग है जो छाती के मध्य भाग में स्थित होता है। यह चार कक्षों में विभाजित होता है – दो आलिंद और दो निलय। दायाँ भाग अशुद्ध रक्त को फेफड़ों की ओर भेजता है। बायाँ भाग शुद्ध रक्त को पूरे शरीर में पंप करता है। हृदय की नियमित धड़कन शरीर में रक्त संचार को बनाए रखती है।
प्रश्न 69. पादपों में वाष्पोत्सर्जन क्यों आवश्यक है?
उत्तर: वाष्पोत्सर्जन वह प्रक्रिया है जिसमें पत्तियों से जल वाष्प के रूप में बाहर निकलता है। यह प्रक्रिया पौधों में जल के प्रवाह को बनाए रखती है। इससे पौधों का तापमान नियंत्रित रहता है। वाष्पोत्सर्जन खनिज लवणों के परिवहन में भी सहायक होता है। इसके माध्यम से पौधे अपने आंतरिक संतुलन को बनाए रखते हैं।
प्रश्न 70. लसीका तंत्र का क्या कार्य है?
उत्तर: लसीका तंत्र शरीर में अतिरिक्त द्रव को पुनः रक्त में लौटाने का कार्य करता है। यह रोगाणुओं से रक्षा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लसीका ग्रंथियाँ प्रतिरक्षा कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। यह तंत्र वसा के अवशोषण में भी सहायक होता है। लसीका तंत्र शरीर की सुरक्षा और संतुलन बनाए रखता है।
प्रश्न 71. शरीर में प्रोटीन की कमी से क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर: प्रोटीन की कमी से वृद्धि रुक सकती है। मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं। घाव भरने में समय लगता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। बच्चों में विकास संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। इसलिए संतुलित आहार में प्रोटीन आवश्यक है।
प्रश्न 72. रक्तदान करने के बाद शरीर कैसे संतुलन बनाता है?
उत्तर: रक्तदान के बाद शरीर नई रक्त कोशिकाएँ बनाता है। अस्थि मज्जा इस निर्माण में सक्रिय हो जाती है। कुछ दिनों में सामान्य स्तर पुनः स्थापित हो जाता है। पर्याप्त जल और पोषण आवश्यक होता है। यह शरीर की अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।
प्रश्न 73. मूत्र में यूरिया क्यों पाया जाता है?
उत्तर: यूरिया प्रोटीन चयापचय का अपशिष्ट उत्पाद है। यकृत अमोनिया को यूरिया में बदलता है। यह कम विषैला होता है। वृक्क इसे मूत्र के माध्यम से बाहर निकालते हैं। यदि यह शरीर में जमा हो जाए तो हानिकारक हो सकता है। इसलिए इसका निष्कासन आवश्यक है।
प्रश्न 74. कोशिका स्तर पर पोषण का क्या महत्व है?
उत्तर: प्रत्येक कोशिका को ऊर्जा और निर्माण सामग्री की आवश्यकता होती है। पोषण से प्राप्त पदार्थ कोशिका तक पहुँचते हैं। ये विभाजन और मरम्मत में सहायक होते हैं। कोशिका की सक्रियता पोषण पर निर्भर है। संतुलित पोषण से शरीर स्वस्थ रहता है।
प्रश्न 75. श्वसन और दहन में क्या अंतर है?
उत्तर: श्वसन एक नियंत्रित जैविक प्रक्रिया है। यह कोशिकाओं में धीरे-धीरे होती है। दहन एक तीव्र रासायनिक क्रिया है। इसमें ऊर्जा तुरंत निकलती है। श्वसन में एंजाइमों की भूमिका होती है। दहन में ऐसी व्यवस्था नहीं होती।
प्रश्न 76. शरीर में तापमान नियंत्रण कैसे होता है?
उत्तर: शरीर पसीना और रक्त प्रवाह के माध्यम से तापमान नियंत्रित करता है। अधिक गर्मी में पसीना निकलता है। ठंड में रक्त वाहिकाएँ संकुचित होती हैं। यह संतुलन बनाए रखने की स्वचालित प्रक्रिया है। यह जीवन रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 77. पौधों में खनिजों का क्या महत्व है?
उत्तर: खनिज लवण पौधों की वृद्धि में सहायक होते हैं। ये क्लोरोफिल निर्माण में आवश्यक हैं। नाइट्रोजन और मैग्नीशियम महत्वपूर्ण खनिज हैं। इनकी कमी से पत्तियाँ पीली पड़ सकती हैं। संतुलित खनिज पौधों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी हैं।
प्रश्न 78. रक्त परिसंचरण में वाल्व की भूमिका क्या है?
उत्तर: वाल्व शिराओं में पाए जाते हैं। ये रक्त को उल्टा बहने से रोकते हैं। इससे रक्त सही दिशा में चलता है। यह विशेषकर पैरों में महत्वपूर्ण है। गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध रक्त प्रवाह में सहायता मिलती है।
प्रश्न 79. श्वसन दर मापना क्यों उपयोगी है?
उत्तर: श्वसन दर स्वास्थ्य की स्थिति दर्शाती है। असामान्य दर रोग का संकेत हो सकती है। यह शारीरिक गतिविधि के स्तर को भी दर्शाती है। चिकित्सक इसका उपयोग निदान में करते हैं। यह जीवन संकेतों में से एक है।
प्रश्न 80. संतुलित आहार जीवन प्रक्रियाओं के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर: संतुलित आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। यह ऊर्जा, वृद्धि और मरम्मत में सहायक है। विटामिन और खनिज भी आवश्यक होते हैं। असंतुलित आहार से रोग हो सकते हैं। स्वस्थ जीवन के लिए संतुलन जरूरी है।
प्रश्न 80. मानव में डायफ्राम का श्वसन में क्या महत्व है?
उत्तर: डायफ्राम एक गुंबदाकार पेशीय झिल्ली है जो वक्ष गुहा और उदर गुहा को अलग करती है। श्वास लेते समय यह नीचे की ओर सिकुड़ता है जिससे फेफड़ों में स्थान बढ़ जाता है। इससे वायु फेफड़ों के अंदर प्रवेश करती है। श्वास छोड़ते समय डायफ्राम शिथिल होकर ऊपर उठता है और फेफड़ों से वायु बाहर निकलती है। इस प्रकार डायफ्राम श्वसन क्रिया को नियमित और प्रभावी बनाता है। इसके बिना फेफड़ों का फैलना और सिकुड़ना संभव नहीं होता।
प्रश्न 81. यकृत (लिवर) पाचन प्रक्रिया में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर: यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो पित्त रस का निर्माण करती है। पित्त रस वसा के कणों को छोटे-छोटे भागों में तोड़ने में सहायता करता है, जिससे उनका पाचन आसान हो जाता है। यह अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाकर एंजाइम की क्रिया के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। यकृत हानिकारक पदार्थों का विषहरण भी करता है। इसके अतिरिक्त यह ग्लाइकोजन के रूप में ऊर्जा का संचय करता है। इस प्रकार यकृत पाचन और चयापचय दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 82. अग्न्याशय (पैंक्रियास) का कार्य क्या है?
उत्तर: अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि है जो पाचन एंजाइम और हार्मोन दोनों का स्राव करती है। यह ट्रिप्सिन, एमाइलेज और लाइपेज जैसे एंजाइम बनाती है जो क्रमशः प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा के पाचन में सहायक होते हैं। इसके द्वारा स्रावित इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। अग्न्याशय की खराबी से मधुमेह जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। यह छोटी आंत में पाचन क्रिया को पूर्ण करने में सहायता करता है। इसलिए यह पाचन और अंतःस्रावी तंत्र का महत्वपूर्ण अंग है।
प्रश्न 83. लाल रक्त कणिकाओं की संरचना और कार्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लाल रक्त कणिकाएँ गोल और द्वि-अवतल आकार की होती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन पाया जाता है जो ऑक्सीजन से संयोजन करता है। ये फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचाती हैं। साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक लाने में सहायता करती हैं। इनका जीवनकाल लगभग 120 दिन होता है। लाल रक्त कणिकाएँ शरीर में ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक गैसों का परिवहन करती हैं।
प्रश्न 84. श्वसन दर किन परिस्थितियों में बदलती है?
उत्तर: श्वसन दर व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य और गतिविधि पर निर्भर करती है। व्यायाम या दौड़ते समय शरीर को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे श्वसन दर बढ़ जाती है। बीमारी या बुखार की स्थिति में भी श्वसन तेज हो सकता है। आराम की अवस्था में श्वसन दर सामान्य रहती है। ऊँचाई वाले स्थानों पर ऑक्सीजन की कमी के कारण श्वसन दर बढ़ जाती है। इस प्रकार विभिन्न परिस्थितियों में श्वसन दर में परिवर्तन होता है।
प्रश्न 85. छोटी आंत का पाचन में क्या महत्व है?
उत्तर: छोटी आंत पाचन तंत्र का सबसे लंबा भाग है जहाँ भोजन का अंतिम पाचन और अवशोषण होता है। यहाँ अग्न्याशय और यकृत से स्रावित रस मिलकर भोजन को सरल अणुओं में बदलते हैं। छोटी आंत की भीतरी सतह पर विल्ली नामक संरचनाएँ होती हैं। ये विल्ली पोषक तत्वों को रक्त में अवशोषित करती हैं। यहाँ से पोषक तत्व शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाए जाते हैं। इस प्रकार छोटी आंत पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 86. मूत्राशय की क्या भूमिका है?
उत्तर: मूत्राशय एक पेशीय थैली है जो मूत्र को अस्थायी रूप से संचित करता है। वृक्क द्वारा निर्मित मूत्र मूत्रवाहिनी के माध्यम से यहाँ पहुँचता है। मूत्राशय में मूत्र एकत्रित होकर समय-समय पर शरीर से बाहर निकाला जाता है। इसकी दीवारें लचीली होती हैं जो मूत्र की मात्रा के अनुसार फैलती और सिकुड़ती हैं। यह उत्सर्जन तंत्र का महत्वपूर्ण अंग है। मूत्राशय शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
प्रश्न 87. पौधों में जाइलम का कार्य क्या है?
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