महत्वपूर्ण तथ्य
- ई–कॉमर्स (E-Commerce) इंटरनेट पर वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार है।
- व्यवसाय, ई–शॉपिंग एवं विज्ञापन प्रणाली ई–कॉमर्स के भाग हैं।
- इंटरनेट पर व्यापार के लिए विभिन्न साइट्स (जिनमें छोटी से लेकर बड़ी कंपनियाँ भी इंटरनेट व्यापर करती हैं)।
- व्यापार के प्रकार जैसे– व्यापार टू व्यापार (B2B) तथा व्यापार टू कंज्यूमर (C2C)।
- इंटरनेट में व्यापारिक सूचनाओं का आदान–प्रदान करने हेतु निम्नलिखित सेवाएँ —
- टेलीफोन, फिक्स्ड सेट, टेलीविजन, मोबाइल, वॉयस बॉक्सेस, अल्ट्रावॉयस, पेपर्स, मोडेम, फैक्स, टेलीटाइप, आदि।
- इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली से माल एवं सेवाओं का मूल्य तुरंत प्राप्त हो जाता है।
- आर.बी.आई. भारत में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों को नियंत्रित करता है।
- डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, स्मार्टकार्ड आदि उपयोगी है जो कार्डों के माध्यम से भुगतान होता है।
- इंटरनेट, आधुनिक कम्प्यूटरों की आंतरिकता तथा बैंकों के बीच इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया देता है।
- क्रेडिट, व्यापार भुगतान, कर्मचारियों के भुगतान, भुगतान आदि जैसे कार्यों हेतु कार्ड प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
- RBI ने 1990 दशक में इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ECS) क्रेडिट प्रणाली शुरू की।
- Electronic Payment के कई तरीके हैं, जैसे—Smart card, Online credit card, Internet banking आदि।
- किसी वस्तु या सेवा का भुगतान करने के लिए डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या मोबाइल बैंकिंग का उपयोग किया जाता है।
- टेलीफोनिक पेमेंट सिस्टम सबसे तेज होती है अर्थात इसके द्वारा तुरंत ही पेमेंट होता है।
- ई–गवर्नेन्स का अर्थ, किसी देश के नागरिकों को सरकारी सूचना एवं सेवाओं को प्रदान करने के लिए इंटरनेट एवं सूचना तकनीकी का सर्वाधिक प्रयोग करना है।
- 1970 में इलेक्ट्रॉनिक व्यापारिक प्रणाली भारत में ई–गवर्नेन्स की दिशा में पहला कदम था क्योंकि इसमें सूचना और संचार पर ध्यान केन्द्रित किया गया था।
- ई–गवर्नेन्स को बढ़ावा देने की दिशा में 1987 में लॉन्च NICNET (राष्ट्रीय उपग्रह आधारित कम्प्यूटर नेटवर्क) एक क्रांतिकारी कदम था।
- ई–गवर्नेन्स का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सेवा प्रदान करना, पारदर्शिता और जवाबदेही का पालन करना शासन, व्यवस्था में सुधार आदि है।
- ई–गवर्नेन्स में सहभागिता के कई प्रकार हैं, जैसे—
- (i) G2G यानि सरकार से सरकार
- (ii) G2C यानि सरकार से नागरिक
- (iii) G2B यानि सरकार से व्यापार
- (iv) G2E यानि सरकार से कर्मचारी
- (v) ई–गवर्नेन्स हेतु भारत सरकार में नवाचार।
- चुनाव समय मतदान केन्द्रों के माध्यम से ज्यादा करना, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल एवं EVM मशीनों का प्रयोग किया गया।
- ई–गवर्नेन्स को सुलभता से समझना करना, एल्गोरिथम का डिजिटल रूप से देना।
- सरकार द्वारा G2G, G2C, G2B, G2E इन चार क्रियाओं के उपयोग से E-Governance में मजबूती किया गया।
- खरीद, बिक्री प्रणाली, GST, E मेल, लाइसेंसिंग व्यवस्था के माध्यम से E-Governance को मजबूत किया गया।
- E-governance के प्रमुख क्षेत्र टूरिज्म, e–हेल्थ, ट्रांसपोर्ट आदि।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
1. B2C मॉडल क्या है?
उत्तर:B2C (Business to Consumer) मॉडल वह व्यापारिक प्रणाली है जिसमें कंपनियाँ सीधे उपभोक्ताओं को उत्पाद या सेवाएं बेचती हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण ई-कॉमर्स वेबसाइटें हैं जैसे Amazon, Flipkart आदि। इसमें ग्राहक ऑनलाइन सामान खरीदता है और भुगतान करता है। यह मॉडल उपभोक्ता केंद्रित होता है।
2. B2C में ई-भुगतान तंत्र का व्यापक उपयोग किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर:B2C मॉडल में ई-भुगतान तंत्र का उपयोग मुख्य रूप से उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है। ग्राहक विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों जैसे नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, UPI, वॉलेट आदि से भुगतान करते हैं। इससे लेन-देन तेजी से और सुरक्षित तरीके से संपन्न होता है।
3. गुप्त कुंजी का उपयोग किसके लिए किया जाता है?
उत्तर:गुप्त कुंजी का उपयोग डेटा को एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट करने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से डेटा की सुरक्षा हेतु किया जाता है ताकि अनधिकृत उपयोगकर्ता उसे पढ़ न सके। यह साइबर सुरक्षा और गोपनीय संचार में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
4. भारत क्यू आर (QR) लेन-देन पी.ओ.एस. लेन-देन से कैसे भिन्न है?
उत्तर:QR कोड लेन-देन में उपभोक्ता केवल QR स्कैन कर भुगतान करता है जबकि POS मशीन में कार्ड स्वाइप करना पड़ता है। QR लेन-देन मोबाइल आधारित होता है और हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं होती, जबकि POS में मशीन की आवश्यकता होती है। QR सरल, तेज और सुलभ होता है।
5. भारत क्यू आर (QR) को सक्षम करने के लिए बुनियादी आवश्यकताएं क्या हैं?
उत्तर:QR कोड को सक्षम करने के लिए स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्शन, बैंक खाता और मोबाइल बैंकिंग ऐप जैसे कि PhonePe, Paytm, GPay होना आवश्यक है। इसके अलावा, व्यापारी के पास एक यूनिक QR कोड होना चाहिए जिसे स्कैन करके ग्राहक भुगतान करता है।
6. क्या भारत क्यू आर (QR) और भीम क्यू आर (QR) एक ही हैं?
उत्तर:नहीं, भारत क्यू आर और भीम क्यू आर अलग हैं लेकिन दोनों UPI पर आधारित होते हैं। भारत क्यू आर विभिन्न बैंकों का एकीकृत QR होता है जबकि भीम QR भीम ऐप से जुड़ा होता है। दोनों का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है।
7. ई-गवर्नेंस से क्या लाभ है?
उत्तर:ई-गवर्नेंस से प्रशासन में पारदर्शिता, समय की बचत, सेवाओं की त्वरित डिलीवरी, भ्रष्टाचार में कमी और नागरिकों की भागीदारी बढ़ती है। इससे सेवाएं 24x7 ऑनलाइन मिलती हैं और दस्तावेज़ी प्रक्रिया डिजिटल रूप में सरल हो जाती है।
8. ई-गवर्नेंस के कितने चरण होते हैं?
उत्तर:ई-गवर्नेंस के चार प्रमुख चरण होते हैं: (1) सूचना प्रसार, (2) संवाद, (3) लेन-देन और (4) परिवर्तन। ये सभी चरण मिलकर नागरिकों को डिजिटल सेवाओं का समुचित लाभ दिलाने में मदद करते हैं।
9. सुशासन के द्वार की कुंजी है ई-गवर्नेंस। इसके चार कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:- पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
- सेवाओं की त्वरित और कुशल डिलीवरी करता है।
- नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाता है।
- भ्रष्टाचार में कमी लाता है।
10. भारत में ई-शासन की शुरुआत कब हुई?
उत्तर:भारत में ई-शासन की शुरुआत 2006 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के तहत हुई थी। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध कराना था। इसके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारें IT का उपयोग कर नागरिक सेवाएं प्रदान करती हैं।
11. ई-शासन की विशेषताओं को बताइए।
उत्तर:ई-शासन की प्रमुख विशेषताएँ हैं – पारदर्शिता, जवाबदेही, समयबद्ध सेवाएं, नागरिकों की सहभागिता, लागत में कमी, और भ्रष्टाचार नियंत्रण। यह सरकारी सेवाओं को सरल और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराता है।
12. सार्वजनिक कार्यवृत्त के तीन क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग क्या है?
उत्तर:- नागरिकों को सेवाएं प्रदान करना (जैसे प्रमाण पत्र, पेंशन)।
- प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना (फाइल मैनेजमेंट, MIS)।
- शासन में पारदर्शिता लाना (ऑनलाइन पोर्टल, जनहित सूचना)।
13. ई-कॉमर्स के प्रकार लिखिए।
उत्तर:ई-कॉमर्स मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं –
- B2B (Business to Business)
- B2C (Business to Consumer)
- C2C (Consumer to Consumer)
- C2B (Consumer to Business)
1. ई-कॉमर्स से समाज को होने वाले लाभों को बताइए।
उत्तर:ई-कॉमर्स से समाज को कई लाभ होते हैं, जैसे कि वस्तुएं और सेवाएं घर बैठे आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। यह समय और धन की बचत करता है तथा ग्रामीण क्षेत्रों को भी बाजार से जोड़ता है। इससे बेरोजगारी में कमी आती है, व्यापारी और ग्राहक दोनों को पारदर्शिता मिलती है। यह डिजिटल इंडिया अभियान को भी समर्थन देता है।
2. बताइए कि बाजार में कौन-कौन से सेक्टर के ई-कॉमर्स एप्लीकेशन उपलब्ध हैं।
उत्तर:ई-कॉमर्स एप्लीकेशन आज लगभग हर क्षेत्र में उपलब्ध हैं जैसे- खुदरा व्यापार (Amazon, Flipkart), खाद्य डिलीवरी (Zomato, Swiggy), टूरिज्म और ट्रैवल (MakeMyTrip), बैंकिंग और फाइनेंस, स्वास्थ्य सेवाएं (1MG, Practo), शिक्षा (Byju’s, Unacademy) आदि। यह सभी जीवन को आसान बनाते हैं।
3. ई-कॉमर्स की कमियाँ क्या-क्या हैं?
उत्तर:
ई-कॉमर्स की प्रमुख कमियाँ हैं – उत्पाद की गुणवत्ता का आकलन न कर पाना, साइबर धोखाधड़ी का खतरा, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा का जोखिम, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सीमित पहुंच और कस्टमर सर्विस की कमी। साथ ही, कई बार उत्पाद देर से या गलत भी डिलीवर होता है।
4. भीम (BHIM) ऐप क्या है?
उत्तर:BHIM (Bharat Interface for Money) ऐप एक डिजिटल पेमेंट एप्लिकेशन है जिसे NPCI द्वारा विकसित किया गया है। यह UPI आधारित है और इसे मोबाइल नंबर से जोड़कर बैंक से सीधा लेन-देन किया जा सकता है। इसका उद्देश्य कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देना है। यह सुरक्षित, सरल और तेज़ है।
5. क्या भीम ऐप का उपयोग करने के लिए शुल्क है?
उत्तर:नहीं, BHIM ऐप का उपयोग करना पूरी तरह से निशुल्क है। इसे डाउनलोड करने, इंस्टॉल करने और उपयोग करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि कुछ बैंकों द्वारा UPI लेन-देन की सीमा पार करने पर मामूली शुल्क लिया जा सकता है, पर सामान्य उपयोगकर्ता के लिए यह मुफ्त है।
6. वी.पी.ए. (VPA) क्या है?
उत्तर:VPA (Virtual Payment Address) एक यूनिक एड्रेस होता है जो UPI आधारित लेन-देन के लिए प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए – name@upi। यह बैंक अकाउंट नंबर के स्थान पर काम करता है जिससे यूजर को बार-बार विवरण डालने की आवश्यकता नहीं होती। यह सुरक्षित और तेज़ ट्रांजैक्शन में सहायक है।
7. QR कोड क्या है?
उत्तर:QR (Quick Response) कोड एक दो-आयामी बारकोड होता है जिसमें जानकारी एन्क्रिप्टेड रूप में स्टोर होती है। इसे स्मार्टफोन द्वारा स्कैन किया जा सकता है। इसका उपयोग भुगतान, लिंक खोलने, लॉगिन, और प्रमोशन के लिए किया जाता है। यह तेज़ और सुरक्षित डेटा एक्सचेंज का माध्यम है।
8. भारत में QR कोड कैसे काम करता है?
उत्तर:
भारत में QR कोड भुगतान ऐप जैसे PhonePe, Google Pay, BHIM आदि के जरिए स्कैन किया जाता है। ग्राहक QR कोड स्कैन कर राशि डालता है और भुगतान करता है। यह UPI प्रणाली पर आधारित है, जो लेन-देन को रीयल टाइम में सुरक्षित तरीके से संपन्न करता है।
9. ई-गवर्नेंस का महत्व क्या है?
उत्तर:ई-गवर्नेंस प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रभावशीलता और गति लाता है। इससे नागरिकों को सरकारी सेवाएं ऑनलाइन प्राप्त होती हैं। यह भ्रष्टाचार को कम करता है, सेवा वितरण को बेहतर बनाता है और नागरिकों की भागीदारी को बढ़ाता है। यह डिजिटल इंडिया का प्रमुख स्तंभ है।
10. ई-गवर्नेंस क्या होता है?
उत्तर:ई-गवर्नेंस का अर्थ है सरकार द्वारा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग कर प्रशासनिक सेवाएं नागरिकों तक ऑनलाइन पहुँचाना। इसके माध्यम से प्रमाण पत्र, लाइसेंस, शिकायत समाधान, टैक्स भुगतान आदि सेवाएं ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती हैं।
11. भारत में ई-गवर्नेंस की अवधारणा क्या है?
उत्तर:भारत में ई-गवर्नेंस की अवधारणा वर्ष 2006 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के माध्यम से आई। इसका उद्देश्य नागरिकों को सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं प्रदान करना है। इसका प्रयोग सभी सरकारी विभागों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए किया गया।
12. अच्छे गवर्नेंस से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:अच्छे गवर्नेंस का अर्थ है – पारदर्शिता, जवाबदेही, सेवा की समयबद्धता, नागरिकों की भागीदारी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन। इसमें निर्णय जनहित में होते हैं और संसाधनों का उपयोग न्यायपूर्ण ढंग से किया जाता है। यह लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की रीढ़ है।
13. ए.आई. (AI) से आप क्या समझते हो?
उत्तर:AI (Artificial Intelligence) एक तकनीक है जो मशीनों को सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। इसका प्रयोग चैटबॉट, रोबोटिक्स, फेस रिकग्निशन, भाषा अनुवाद, और स्वचालित वाहनों में होता है। AI मानव जैसी बुद्धिमत्ता वाली मशीनों का निर्माण करता है।
14. Meity है? इसकी स्थापना कब हुई थी?
उत्तर:MeitY (Ministry of Electronics and Information Technology) भारत सरकार का एक मंत्रालय है जो डिजिटल सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी के विकास पर काम करता है। इसकी स्थापना वर्ष 2016 में हुई थी जब इसे संचार और आईटी मंत्रालय से अलग किया गया था।
15. ई-गवर्नेंस क्या होता है? यह कितने प्रकार का होता है? प्रत्येक प्रकार का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:ई-गवर्नेंस का अर्थ है – सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकारी सेवाओं की डिलीवरी। इसके चार प्रमुख प्रकार हैं:
- G2C (Government to Citizen) – नागरिकों को सेवाएं प्रदान करना।
- G2B (Government to Business) – व्यापार को डिजिटल सेवा देना।
- G2G (Government to Government) – विभागों के बीच सूचना का आदान-प्रदान।
- G2E (Government to Employee) – कर्मचारियों को सरकारी लाभ पहुँचाना