Most Important Points (NCERT BASED)
- जीवित जीवों में विभिन्न क्रियाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने की प्रक्रिया को नियंत्रण और समन्वय कहा जाता है।
- नियंत्रण और समन्वय के कारण शरीर के सभी अंग एक साथ मिलकर कार्य करते हैं।
- मनुष्य और अन्य जीवों में यह कार्य मुख्यतः तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र द्वारा किया जाता है।
- शरीर में होने वाले परिवर्तन के प्रति प्रतिक्रिया देना जीवों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
- बाहरी वातावरण में होने वाले बदलाव को उत्तेजना (Stimulus) कहा जाता है।
- उत्तेजना के प्रति शरीर द्वारा दी जाने वाली प्रतिक्रिया को प्रतिक्रिया (Response) कहते हैं।
- जीवों में प्रतिक्रिया देने की क्षमता उन्हें वातावरण के अनुसार ढलने में सहायता करती है।
- एककोशिकीय जीवों में नियंत्रण और समन्वय अपेक्षाकृत सरल होता है।
- बहुकोशिकीय जीवों में यह प्रक्रिया अधिक जटिल और संगठित होती है।
- मनुष्यों में नियंत्रण का मुख्य केंद्र मस्तिष्क (Brain) होता है।
- तंत्रिका तंत्र शरीर के विभिन्न अंगों तक संदेश पहुँचाने का कार्य करता है।
- तंत्रिका तंत्र के मुख्य भाग हैं – मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाएँ।
- तंत्रिका कोशिका को न्यूरॉन (Neuron) कहा जाता है।
- न्यूरॉन शरीर में संदेशों के संचरण का मुख्य माध्यम है।
- न्यूरॉन तीन मुख्य भागों से बना होता है – डेंड्राइट, कोशिका शरीर और ऐक्सॉन।
- तंत्रिका तंत्र में संदेश विद्युत संकेतों के रूप में चलते हैं।
- तंत्रिकाएँ शरीर के विभिन्न भागों को मस्तिष्क से जोड़ती हैं।
- मेरुरज्जु (Spinal Cord) मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाओं का मुख्य मार्ग है।
- मेरुरज्जु कई त्वरित प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करती है।
- ऐसी त्वरित और स्वतः होने वाली क्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) कहा जाता है।
- प्रतिवर्ती क्रिया शरीर को अचानक होने वाले नुकसान से बचाती है।
- उदाहरण – गर्म वस्तु को छूते ही हाथ तुरंत पीछे हट जाना।
- प्रतिवर्ती क्रिया का मार्ग प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) कहलाता है।
- प्रतिवर्ती चाप में संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु और प्रेरक तंत्रिका शामिल होते हैं।
- तंत्रिका तंत्र बहुत तेज गति से संदेश भेजता है।
- लेकिन इसका प्रभाव सामान्यतः थोड़े समय तक रहता है।
- पौधों में भी नियंत्रण और समन्वय पाया जाता है।
- पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता।
- पौधों में नियंत्रण मुख्यतः रासायनिक संकेतों द्वारा होता है।
- पौधों में होने वाली वृद्धि और गति को पादप हार्मोन नियंत्रित करते हैं।
- पौधों की वृद्धि को प्रभावित करने वाले हार्मोन को ऑक्सिन (Auxin) कहते हैं।
- ऑक्सिन पौधों की कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।
- प्रकाश की दिशा में पौधे का मुड़ना प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहलाता है।
- गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से होने वाली वृद्धि को गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) कहते हैं।
- जल के प्रति प्रतिक्रिया को जलानुवर्तन (Hydrotropism) कहते हैं।
- स्पर्श के कारण होने वाली गति को स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) कहते हैं।
- पौधों में वृद्धि धीमी लेकिन लगातार होती है।
- पौधों की गतिविधियाँ हार्मोन के संतुलन पर निर्भर करती हैं।
- मनुष्यों में अंतःस्रावी तंत्र हार्मोन के माध्यम से नियंत्रण करता है।
- हार्मोन विशेष रासायनिक पदार्थ होते हैं जो रक्त द्वारा शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं।
- हार्मोन का उत्पादन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा किया जाता है।
- ये ग्रंथियाँ सीधे रक्त में हार्मोन छोड़ती हैं।
- पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) को “मास्टर ग्रंथि” कहा जाता है।
- यह अन्य ग्रंथियों के कार्य को नियंत्रित करती है।
- थायरॉयड ग्रंथि शरीर के चयापचय की गति को नियंत्रित करती है।
- थायरॉयड हार्मोन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक होता है।
- आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो सकता है।
- अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) आपात स्थितियों में शरीर को सक्रिय करती है।
- इंसुलिन हार्मोन रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।
- इंसुलिन की कमी से मधुमेह (Diabetes) हो सकता है।
- हार्मोन का प्रभाव तंत्रिका संकेतों की तुलना में धीमा होता है।
- लेकिन हार्मोन का प्रभाव अधिक समय तक बना रहता है।
- तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र मिलकर शरीर का समन्वय बनाए रखते हैं।
- दोनों तंत्र शरीर की आंतरिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक होते हैं।
- नियंत्रण और समन्वय जीवों के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- इससे जीव वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया दे पाते हैं।
- शरीर के विभिन्न अंगों के बीच सामंजस्य बनाए रखना भी इसी प्रक्रिया का भाग है।
- पौधों और जानवरों में नियंत्रण के तरीके अलग-अलग होते हैं।
- तंत्रिका तंत्र तेज प्रतिक्रिया देता है जबकि हार्मोन दीर्घकालिक प्रभाव डालते हैं।
- नियंत्रण और समन्वय के बिना किसी भी जीव का जीवन सुचारु रूप से संभव नहीं है।
Short Answer type Question (NCERT BASED)
1. नियंत्रण और समन्वय से क्या अभिप्राय है?
नियंत्रण और समन्वय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी जीव के शरीर के विभिन्न अंग मिलकर संतुलित तरीके से कार्य करते हैं। शरीर के अलग-अलग भागों को एक-दूसरे से जुड़े रहना आवश्यक होता है ताकि सभी क्रियाएँ सही समय पर पूरी हो सकें। मनुष्यों में यह कार्य मुख्यतः तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र द्वारा किया जाता है। ये दोनों तंत्र शरीर में संदेशों का आदान-प्रदान कर अंगों को निर्देश देते हैं। इसके कारण जीव बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार प्रतिक्रिया दे पाते हैं। इसलिए नियंत्रण और समन्वय जीवन की नियमित क्रियाओं के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
2. उत्तेजना (Stimulus) और प्रतिक्रिया (Response) क्या होती है?
जब वातावरण में कोई परिवर्तन होता है जो जीव के शरीर को प्रभावित करता है, उसे उत्तेजना कहा जाता है। जैसे तेज प्रकाश, गर्मी या ठंड। जीव इस उत्तेजना को महसूस करके उसके अनुसार जो क्रिया करता है, उसे प्रतिक्रिया कहते हैं। उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु को छूते ही हाथ तुरंत पीछे हटा लेना प्रतिक्रिया है। यह प्रक्रिया जीव को संभावित खतरे से बचाने में सहायक होती है। उत्तेजना और प्रतिक्रिया का यह संबंध जीवों को अपने वातावरण के अनुरूप ढलने में मदद करता है।
3. तंत्रिका तंत्र क्या है? इसके मुख्य भाग बताइए।
तंत्रिका तंत्र शरीर का वह तंत्र है जो विभिन्न अंगों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करता है। इसके कारण शरीर की सभी क्रियाएँ नियंत्रित और समन्वित रहती हैं। तंत्रिका तंत्र के तीन मुख्य भाग होते हैं—मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाएँ। मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र होता है। मेरुरज्जु मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों के बीच संदेशों को पहुँचाने का कार्य करती है। तंत्रिकाएँ शरीर के अलग-अलग अंगों तक संकेतों को ले जाने और लाने का कार्य करती हैं। इस प्रकार तंत्रिका तंत्र शरीर की गतिविधियों को व्यवस्थित बनाए रखता है।
4. न्यूरॉन क्या है? इसकी संरचना समझाइए।
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की विशेष कोशिका होती है जो संदेशों के संचार का कार्य करती है। यह शरीर में विद्युत संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाती है। न्यूरॉन मुख्यतः तीन भागों से मिलकर बना होता है—डेंड्राइट, कोशिका शरीर और ऐक्सॉन। डेंड्राइट बाहरी संकेतों को प्राप्त करते हैं। कोशिका शरीर इन संकेतों को संसाधित करता है। ऐक्सॉन इन संकेतों को आगे दूसरी कोशिकाओं तक पहुँचाता है। इस प्रकार न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली का मूल आधार होता है।
5. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) क्या है?
प्रतिवर्ती क्रिया वह त्वरित और स्वतः होने वाली प्रतिक्रिया है जो बिना सोचे-समझे तुरंत हो जाती है। यह क्रिया शरीर को अचानक होने वाले नुकसान से बचाने के लिए होती है। उदाहरण के लिए, गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का तुरंत पीछे हट जाना। इस क्रिया का नियंत्रण मुख्यतः मेरुरज्जु द्वारा किया जाता है। इसमें मस्तिष्क को सोचने का समय नहीं मिलता। इसलिए यह प्रतिक्रिया बहुत तेजी से होती है। प्रतिवर्ती क्रिया शरीर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
6. पौधों में नियंत्रण और समन्वय कैसे होता है?
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, इसलिए वे जानवरों की तरह तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। पौधों में नियंत्रण और समन्वय मुख्यतः रासायनिक पदार्थों द्वारा होता है जिन्हें पादप हार्मोन कहा जाता है। ये हार्मोन पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, ऑक्सिन नामक हार्मोन पौधों की कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है। इसी कारण पौधे प्रकाश की दिशा में बढ़ते हैं। इस प्रकार पौधों में समन्वय धीमा होता है लेकिन निरंतर चलता रहता है।
7. अंतःस्रावी तंत्र क्या है?
अंतःस्रावी तंत्र शरीर की उन ग्रंथियों का समूह है जो हार्मोन का निर्माण करती हैं। ये ग्रंथियाँ अपने हार्मोन सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त के माध्यम से ये हार्मोन शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं और उनके कार्यों को प्रभावित करते हैं। हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास और चयापचय जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। अंतःस्रावी तंत्र का प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देता है लेकिन इसका असर लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए यह शरीर के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
8. पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि क्यों कहा जाता है?
पीयूष ग्रंथि शरीर की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथि है। इसे मास्टर ग्रंथि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करती है। यह कई प्रकार के हार्मोन बनाती है जो शरीर की वृद्धि और विकास को प्रभावित करते हैं। पीयूष ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन थायरॉयड, अधिवृक्क और अन्य ग्रंथियों को सक्रिय करते हैं। इस प्रकार यह पूरे हार्मोन तंत्र का संचालन करती है। इसलिए इसे शरीर की “मास्टर ग्रंथि” कहा जाता है।
9. हार्मोन क्या होते हैं?
हार्मोन विशेष प्रकार के रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा बनाया जाता है। ये हार्मोन रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं। वहाँ पहुँचकर ये अंगों के कार्यों को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, इंसुलिन हार्मोन रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है। हार्मोन का प्रभाव धीरे-धीरे होता है लेकिन यह लंबे समय तक बना रहता है।
10. तंत्रिका तंत्र और हार्मोन तंत्र में क्या अंतर है?
तंत्रिका तंत्र और हार्मोन तंत्र दोनों शरीर के नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र में संदेश विद्युत संकेतों के रूप में बहुत तेजी से चलते हैं। इसका प्रभाव तुरंत दिखाई देता है लेकिन कम समय तक रहता है। दूसरी ओर, हार्मोन तंत्र में संदेश रासायनिक पदार्थों के माध्यम से रक्त द्वारा पहुँचते हैं। इसका प्रभाव धीरे-धीरे शुरू होता है लेकिन लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए दोनों तंत्र मिलकर शरीर की क्रियाओं को संतुलित बनाए रखते हैं।
11. मनुष्य में मस्तिष्क का क्या कार्य है?
मस्तिष्क मनुष्य के तंत्रिका तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसे शरीर का नियंत्रण केंद्र माना जाता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों से आने वाली सूचनाओं को ग्रहण करता है और उनके आधार पर उचित निर्देश देता है। मस्तिष्क सोचने, समझने, स्मरण करने तथा निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। इसके माध्यम से शरीर की स्वैच्छिक क्रियाएँ नियंत्रित होती हैं। यह संतुलन बनाए रखने और शरीर की गतिविधियों का समन्वय करने में भी मदद करता है। इस प्रकार मस्तिष्क पूरे शरीर की क्रियाओं को व्यवस्थित बनाए रखता है।
12. मेरुरज्जु (Spinal Cord) का क्या महत्व है?
मेरुरज्जु तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है जो मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करता है। यह रीढ़ की हड्डी के भीतर सुरक्षित रहता है। मेरुरज्जु कई प्रतिवर्ती क्रियाओं को नियंत्रित करता है जिससे शरीर तुरंत प्रतिक्रिया दे पाता है। इसके माध्यम से संवेदी और प्रेरक तंत्रिकाएँ कार्य करती हैं। यह शरीर के विभिन्न अंगों तक मस्तिष्क के निर्देश पहुँचाने में सहायक होता है। इसलिए मेरुरज्जु शरीर के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
13. संवेदी तंत्रिकाएँ क्या होती हैं?
संवेदी तंत्रिकाएँ वे तंत्रिकाएँ होती हैं जो शरीर के विभिन्न अंगों से सूचना प्राप्त करके मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचाती हैं। ये तंत्रिकाएँ बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों को महसूस करने में सहायता करती हैं। उदाहरण के लिए त्वचा, आँख और नाक से आने वाली सूचनाएँ संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचती हैं। मस्तिष्क इन सूचनाओं का विश्लेषण करता है। इसके बाद आवश्यक प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। इस प्रकार संवेदी तंत्रिकाएँ सूचना संचार की महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं।
14. प्रेरक तंत्रिकाएँ (Motor Nerves) क्या होती हैं?
प्रेरक तंत्रिकाएँ वे तंत्रिकाएँ होती हैं जो मस्तिष्क या मेरुरज्जु से संदेश लेकर शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाती हैं। इनके माध्यम से मांसपेशियों और ग्रंथियों को निर्देश प्राप्त होते हैं। उदाहरण के लिए जब मस्तिष्क हाथ को उठाने का संकेत देता है तो यह संकेत प्रेरक तंत्रिकाओं द्वारा मांसपेशियों तक पहुँचता है। इसके परिणामस्वरूप हाथ ऊपर उठता है। इस प्रकार प्रेरक तंत्रिकाएँ शरीर में क्रिया को संभव बनाती हैं। ये तंत्रिकाएँ प्रतिक्रिया को पूरा करने में सहायक होती हैं।
15. तंत्रिका संकेत कैसे संचरित होते हैं?
तंत्रिका संकेत न्यूरॉन के माध्यम से विद्युत आवेगों के रूप में संचरित होते हैं। जब किसी न्यूरॉन को उत्तेजना मिलती है तो उसमें एक विद्युत संकेत उत्पन्न होता है। यह संकेत ऐक्सॉन के माध्यम से आगे बढ़ता है और अगले न्यूरॉन तक पहुँचता है। न्यूरॉनों के बीच संकेत रासायनिक पदार्थों की सहायता से स्थानांतरित होते हैं। इस प्रक्रिया को सिनैप्स कहा जाता है। इस प्रकार तंत्रिका संकेत बहुत तेजी से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँच जाते हैं।
16. सिनैप्स (Synapse) क्या होता है?
सिनैप्स दो न्यूरॉनों के बीच का वह सूक्ष्म अंतराल होता है जहाँ से तंत्रिका संकेत एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक पहुँचते हैं। जब एक न्यूरॉन के ऐक्सॉन से संकेत निकलता है तो वह सीधे दूसरे न्यूरॉन को नहीं छूता। इसके बीच एक छोटा सा स्थान होता है जिसे सिनैप्स कहते हैं। यहाँ रासायनिक पदार्थों की सहायता से संकेत आगे भेजा जाता है। इस प्रक्रिया के कारण संकेत सही दिशा में आगे बढ़ता है। इसलिए सिनैप्स तंत्रिका संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
17. अनुवर्तन (Tropism) क्या है?
अनुवर्तन पौधों में होने वाली वह प्रतिक्रिया है जिसमें पौधे किसी बाहरी उत्तेजना की दिशा में बढ़ते या मुड़ते हैं। यह प्रतिक्रिया मुख्यतः वृद्धि के कारण होती है। विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाओं जैसे प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण और जल के कारण अलग-अलग अनुवर्तन दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए पौधों का प्रकाश की ओर झुकना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। यह प्रक्रिया पौधों को बेहतर वातावरण प्राप्त करने में सहायता करती है। इसलिए अनुवर्तन पौधों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
18. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) क्या है?
प्रकाशानुवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे प्रकाश की दिशा में मुड़कर बढ़ते हैं। यह प्रतिक्रिया पौधों को प्रकाश प्राप्त करने में सहायता करती है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है। इस प्रक्रिया में ऑक्सिन नामक हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब प्रकाश एक दिशा से आता है तो ऑक्सिन छाया वाले भाग में अधिक एकत्र हो जाता है। इससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं। परिणामस्वरूप पौधा प्रकाश की ओर झुक जाता है।
19. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) क्या है?
गुरुत्वानुवर्तन पौधों की वह प्रतिक्रिया है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में दिखाई देती है। पौधों की जड़ें सामान्यतः नीचे की ओर बढ़ती हैं क्योंकि वे गुरुत्वाकर्षण की दिशा का अनुसरण करती हैं। इसे धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन कहा जाता है। इसके विपरीत तना ऊपर की ओर बढ़ता है जिसे ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन कहा जाता है। यह प्रक्रिया पौधों को उचित दिशा में बढ़ने में मदद करती है। इससे पौधों को जल और पोषक तत्व प्राप्त करने में भी सहायता मिलती है।
20. जलानुवर्तन (Hydrotropism) क्या है?
जलानुवर्तन पौधों की जड़ों की वह प्रतिक्रिया है जिसमें वे जल की दिशा में बढ़ती हैं। जड़ों का यह व्यवहार पौधे को मिट्टी से पर्याप्त पानी प्राप्त करने में सहायता करता है। जब मिट्टी के किसी भाग में जल अधिक होता है तो जड़ें उसी दिशा में फैलने लगती हैं। यह प्रतिक्रिया पौधे के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जल के बिना पौधे का विकास संभव नहीं है। इसलिए जलानुवर्तन पौधों की अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।
21. स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) क्या है?
स्पर्शानुवर्तन पौधों की वह प्रतिक्रिया है जो स्पर्श या संपर्क के कारण होती है। कुछ पौधों की बेलें जब किसी सहारे को छूती हैं तो वे उसी के चारों ओर लिपटकर बढ़ने लगती हैं। यह प्रक्रिया पौधे को ऊपर की ओर बढ़ने में सहायता करती है। इससे पौधा अधिक प्रकाश प्राप्त कर पाता है। स्पर्शानुवर्तन मुख्यतः वृद्धि से संबंधित प्रतिक्रिया होती है। यह पौधों की अनुकूलन क्षमता का एक अच्छा उदाहरण है।
22. पादप हार्मोन क्या होते हैं?
पादप हार्मोन वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। ये बहुत कम मात्रा में बनते हैं लेकिन इनका प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण होता है। विभिन्न प्रकार के पादप हार्मोन अलग-अलग कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए ऑक्सिन वृद्धि को बढ़ावा देता है जबकि एब्सिसिक अम्ल वृद्धि को रोकता है। ये हार्मोन पौधों की गतिविधियों को संतुलित बनाए रखते हैं। इसलिए पौधों में समन्वय बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
23. ऑक्सिन (Auxin) हार्मोन का क्या कार्य है?
ऑक्सिन पौधों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वृद्धि हार्मोन है। यह मुख्य रूप से तने की कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है। इसके कारण पौधे तेजी से ऊपर की ओर बढ़ते हैं। प्रकाशानुवर्तन में भी ऑक्सिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह छाया वाले भाग में अधिक एकत्र हो जाता है जिससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं। इसके परिणामस्वरूप पौधा प्रकाश की ओर झुक जाता है। इसलिए ऑक्सिन पौधों की वृद्धि और दिशा को प्रभावित करता है।
24. एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid) क्या है?
एब्सिसिक अम्ल एक ऐसा पादप हार्मोन है जो पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करता है। इसे वृद्धि अवरोधक हार्मोन भी कहा जाता है। यह पौधों की पत्तियों के झड़ने और बीजों की निष्क्रिय अवस्था को बनाए रखने में सहायता करता है। प्रतिकूल परिस्थितियों में यह पौधों को ऊर्जा बचाने में मदद करता है। इसके कारण पौधे कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह पाते हैं। इसलिए यह पौधों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
25. नियंत्रण और समन्वय जीवों के लिए क्यों आवश्यक है?
नियंत्रण और समन्वय जीवों के जीवन को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके माध्यम से शरीर के सभी अंग एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य करते हैं। यह जीवों को बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। इसके कारण जीव अपने वातावरण के अनुसार अनुकूलन कर पाते हैं। साथ ही यह शरीर की आंतरिक क्रियाओं को संतुलित बनाए रखता है। इसलिए नियंत्रण और समन्वय जीवन की निरंतरता के लिए अनिवार्य माना जाता है।
26. मस्तिष्क के मुख्य भाग कौन-कौन से होते हैं?
मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसे तीन मुख्य भागों में बाँटा जाता है—अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क। अग्र मस्तिष्क सोचने, निर्णय लेने और स्मरण शक्ति से संबंधित कार्यों को नियंत्रित करता है। मध्य मस्तिष्क दृष्टि तथा श्रवण से जुड़े संकेतों का समन्वय करता है। पश्च मस्तिष्क शरीर के संतुलन और गति को नियंत्रित करता है। इन सभी भागों का संयुक्त कार्य शरीर की गतिविधियों को व्यवस्थित बनाए रखता है। इस प्रकार मस्तिष्क पूरे शरीर की क्रियाओं का प्रभावी नियंत्रण करता है।
27. अग्र मस्तिष्क (Forebrain) का क्या कार्य है?
अग्र मस्तिष्क मस्तिष्क का सबसे विकसित और महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। यह मनुष्य की बुद्धि, विचार, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता को नियंत्रित करता है। शरीर के संवेदी अंगों से आने वाली सूचनाओं को यही भाग ग्रहण करता है और उनका विश्लेषण करता है। इसके आधार पर यह शरीर को उचित प्रतिक्रिया देने के लिए निर्देश देता है। इसके कारण मनुष्य जटिल परिस्थितियों में भी सही निर्णय ले सकता है। इसलिए अग्र मस्तिष्क को मस्तिष्क का मुख्य नियंत्रण केंद्र माना जाता है।
28. पश्च मस्तिष्क (Hindbrain) का क्या महत्व है?
पश्च मस्तिष्क शरीर की संतुलन संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें सेरिबेलम, पोंस और मेडुला जैसे भाग शामिल होते हैं। सेरिबेलम शरीर की गति और संतुलन को बनाए रखने में सहायता करता है। मेडुला हृदय की धड़कन, श्वसन और रक्तचाप जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह शरीर की कई आवश्यक क्रियाओं को स्वतः संचालित करता है। इसलिए पश्च मस्तिष्क जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
29. अनैच्छिक क्रियाएँ क्या होती हैं?
अनैच्छिक क्रियाएँ वे क्रियाएँ होती हैं जो बिना हमारी इच्छा के स्वतः होती रहती हैं। इन क्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए हमें सोचने या प्रयास करने की आवश्यकता नहीं होती। उदाहरण के लिए हृदय की धड़कन, श्वसन प्रक्रिया और पाचन क्रिया। इन सभी क्रियाओं का नियंत्रण मुख्य रूप से मस्तिष्क के मेडुला भाग द्वारा किया जाता है। ये क्रियाएँ शरीर के सामान्य कार्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक होती हैं। इसलिए अनैच्छिक क्रियाएँ जीवन की निरंतरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
30. स्वैच्छिक क्रियाएँ क्या होती हैं?
स्वैच्छिक क्रियाएँ वे क्रियाएँ होती हैं जिन्हें हम अपनी इच्छा से नियंत्रित कर सकते हैं। जैसे चलना, लिखना, बोलना या किसी वस्तु को उठाना। इन क्रियाओं को करने के लिए मस्तिष्क को सक्रिय रूप से निर्देश देना पड़ता है। मस्तिष्क से संकेत प्रेरक तंत्रिकाओं के माध्यम से मांसपेशियों तक पहुँचते हैं। इसके परिणामस्वरूप मांसपेशियाँ संकुचित होकर क्रिया को पूरा करती हैं। इस प्रकार स्वैच्छिक क्रियाएँ मनुष्य की इच्छानुसार संचालित होती हैं।
31. तंत्रिका तंत्र शरीर के अंगों का समन्वय कैसे करता है?
तंत्रिका तंत्र शरीर के विभिन्न अंगों के बीच संदेशों का तेज आदान-प्रदान करता है। जब शरीर के किसी भाग में उत्तेजना उत्पन्न होती है, तो संवेदी तंत्रिकाएँ उसे मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं। मस्तिष्क उस सूचना का विश्लेषण करता है और उचित निर्णय लेता है। इसके बाद प्रेरक तंत्रिकाएँ मांसपेशियों या ग्रंथियों तक निर्देश पहुँचाती हैं। इस प्रक्रिया के कारण शरीर तुरंत प्रतिक्रिया दे पाता है। इस प्रकार तंत्रिका तंत्र सभी अंगों के बीच समन्वय बनाए रखता है।
32. मनुष्य के शरीर में हार्मोन का क्या महत्व है?
हार्मोन शरीर के रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा निर्मित होते हैं और रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में पहुँचते हैं। हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास और चयापचय जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इनके कारण शरीर के अंगों के बीच संतुलन बना रहता है। हार्मोन का प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देता है लेकिन यह लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए हार्मोन शरीर के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
33. थायरॉयड ग्रंथि का क्या कार्य है?
थायरॉयड ग्रंथि गले के पास स्थित एक महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथि है। यह थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का निर्माण करती है। यह हार्मोन शरीर के चयापचय की गति को नियंत्रित करता है। इसके कारण शरीर में ऊर्जा का उत्पादन और उपयोग संतुलित रहता है। थायरॉयड हार्मोन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक होता है। यदि आयोडीन की कमी हो जाए तो घेंघा रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।
34. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का क्या कार्य है?
अधिवृक्क ग्रंथि गुर्दों के ऊपर स्थित होती है और कई महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती है। इनमें से एड्रेनालिन हार्मोन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। यह शरीर को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करता है। तनाव या भय की स्थिति में यह हार्मोन हृदय की गति और रक्तचाप को बढ़ा देता है। इसके कारण शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हो जाता है। इसलिए इसे “आपातकालीन हार्मोन” भी कहा जाता है।
35. इंसुलिन हार्मोन का क्या कार्य है?
इंसुलिन अग्न्याशय द्वारा निर्मित एक महत्वपूर्ण हार्मोन है। इसका मुख्य कार्य रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करना होता है। यह शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज ग्रहण करने में सहायता करता है। इससे शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है और रक्त में शर्करा का स्तर संतुलित रहता है। यदि शरीर में इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में न बने तो मधुमेह रोग हो सकता है। इसलिए इंसुलिन शरीर के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
36. मधुमेह (Diabetes) क्या है?
मधुमेह एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। यह मुख्यतः इंसुलिन हार्मोन की कमी या उसके सही ढंग से कार्य न करने के कारण होता है। जब कोशिकाएँ ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पातीं तो वह रक्त में जमा होने लगता है। इससे शरीर की ऊर्जा संतुलन प्रणाली प्रभावित होती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर कई स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए मधुमेह का समय पर नियंत्रण आवश्यक होता है।
37. तंत्रिका तंत्र की गति तेज क्यों होती है?
तंत्रिका तंत्र में संदेश विद्युत संकेतों के रूप में संचरित होते हैं। ये संकेत न्यूरॉनों के माध्यम से बहुत तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचते हैं। विद्युत संकेतों की गति रासायनिक संकेतों की तुलना में अधिक होती है। इसी कारण तंत्रिका तंत्र तुरंत प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकता है। यह तेज गति शरीर को अचानक होने वाले खतरों से बचाने में मदद करती है। इसलिए तंत्रिका तंत्र की प्रतिक्रिया बहुत शीघ्र दिखाई देती है।
38. हार्मोन का प्रभाव लंबे समय तक क्यों रहता है?
हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैलते हैं। इन्हें अपने लक्ष्य अंग तक पहुँचने में कुछ समय लगता है। लेकिन एक बार प्रभाव शुरू होने पर यह लंबे समय तक बना रहता है। इसका कारण यह है कि हार्मोन कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को धीरे-धीरे प्रभावित करते हैं। इससे शरीर की प्रक्रियाओं में स्थायी परिवर्तन दिखाई देते हैं। इसलिए हार्मोन का प्रभाव तंत्रिका संकेतों की तुलना में अधिक समय तक रहता है।
39. पौधों में वृद्धि हार्मोन क्यों आवश्यक हैं?
पौधों में वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने के लिए विशेष रासायनिक पदार्थ आवश्यक होते हैं। इन्हें वृद्धि हार्मोन या पादप हार्मोन कहा जाता है। ये पौधों की कोशिकाओं की वृद्धि और विभाजन को नियंत्रित करते हैं। इनके कारण पौधे सही दिशा में बढ़ते हैं। साथ ही ये पौधों को प्रकाश, जल और गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया करने में सहायता करते हैं। इसलिए पौधों के विकास के लिए वृद्धि हार्मोन अत्यंत आवश्यक होते हैं।
40. पौधों में गति धीमी क्यों होती है?
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता इसलिए वे तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकते। उनकी अधिकांश गतिविधियाँ वृद्धि से संबंधित होती हैं। वृद्धि एक धीमी जैविक प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाओं का विभाजन और विस्तार शामिल होता है। इसी कारण पौधों की गति धीरे-धीरे दिखाई देती है। हालांकि यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। इसलिए पौधों में प्रतिक्रिया धीमी लेकिन स्थिर होती है।
41. समन्वय से जीवों को क्या लाभ होता है?
समन्वय शरीर के विभिन्न अंगों को एक साथ मिलकर कार्य करने में सहायता करता है। इसके कारण शरीर की क्रियाएँ व्यवस्थित ढंग से संचालित होती हैं। समन्वय के माध्यम से जीव वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार प्रतिक्रिया दे पाते हैं। इससे उनका अस्तित्व सुरक्षित रहता है। साथ ही शरीर की आंतरिक क्रियाओं में संतुलन बना रहता है। इसलिए समन्वय जीवों के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
42. तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र एक-दूसरे के पूरक कैसे हैं?
तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र दोनों शरीर के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र तुरंत प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है जबकि अंतःस्रावी तंत्र लंबे समय तक प्रभाव डालता है। तंत्रिका तंत्र विद्युत संकेतों द्वारा कार्य करता है जबकि अंतःस्रावी तंत्र हार्मोन के माध्यम से कार्य करता है। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की गतिविधियों को संतुलित बनाए रखते हैं। इसलिए इन्हें एक-दूसरे का पूरक माना जाता है।
43. पौधों की जड़ें नीचे की ओर क्यों बढ़ती हैं?
पौधों की जड़ें गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के कारण नीचे की ओर बढ़ती हैं। इस प्रक्रिया को धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन कहा जाता है। जड़ों का नीचे की ओर बढ़ना पौधे को मिट्टी से जल और खनिज प्राप्त करने में सहायता करता है। यह पौधे को स्थिरता भी प्रदान करता है। इसके कारण पौधा मिट्टी में मजबूती से स्थापित रहता है। इसलिए जड़ों का नीचे की ओर बढ़ना पौधे के जीवन के लिए आवश्यक होता है।
44. पौधों का तना ऊपर की ओर क्यों बढ़ता है?
पौधों का तना सामान्यतः गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में बढ़ता है। इस प्रक्रिया को ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन कहा जाता है। तने का ऊपर की ओर बढ़ना पौधे को अधिक प्रकाश प्राप्त करने में मदद करता है। प्रकाश पौधों में प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक होता है। इससे पौधा भोजन का निर्माण कर पाता है। इसलिए तने का ऊपर की ओर बढ़ना पौधों की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
45. पादप हार्मोन संतुलन क्यों आवश्यक है?
पौधों में विभिन्न प्रकार के हार्मोन मिलकर कार्य करते हैं। कुछ हार्मोन वृद्धि को बढ़ाते हैं जबकि कुछ वृद्धि को नियंत्रित करते हैं। यदि इन हार्मोनों का संतुलन बिगड़ जाए तो पौधे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। संतुलित हार्मोन पौधे को सही दिशा में बढ़ने में मदद करते हैं। साथ ही वे पौधे को वातावरण के अनुसार अनुकूल बनने में सहायता करते हैं। इसलिए पादप हार्मोन का संतुलन आवश्यक होता है।
46. एड्रेनालिन हार्मोन को “फाइट या फ्लाइट हार्मोन” क्यों कहा जाता है?
एड्रेनालिन हार्मोन शरीर को अचानक उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के लिए तैयार करता है। जब शरीर को खतरे या तनाव का अनुभव होता है तो यह हार्मोन तेजी से स्रावित होता है। इसके कारण हृदय की गति और श्वसन दर बढ़ जाती है। साथ ही मांसपेशियों तक अधिक रक्त पहुँचता है। इससे शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हो जाता है। इसलिए इसे “फाइट या फ्लाइट हार्मोन” कहा जाता है।
47. समन्वय में मांसपेशियों की क्या भूमिका होती है?
मांसपेशियाँ शरीर की गतिविधियों को संभव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब मस्तिष्क किसी क्रिया का निर्देश देता है तो प्रेरक तंत्रिकाएँ यह संदेश मांसपेशियों तक पहुँचाती हैं। इसके बाद मांसपेशियाँ संकुचित या शिथिल होकर क्रिया को पूरा करती हैं। इससे शरीर में गति उत्पन्न होती है। इस प्रकार मांसपेशियाँ तंत्रिका संकेतों को वास्तविक क्रिया में बदलने का कार्य करती हैं।
48. शरीर में संतुलन बनाए रखने में सेरिबेलम की क्या भूमिका है?
सेरिबेलम मस्तिष्क के पश्च भाग में स्थित होता है और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। यह मांसपेशियों की गतिविधियों का समन्वय करता है। इसके कारण शरीर की गति सुचारु और नियंत्रित रहती है। चलने, दौड़ने और खड़े रहने के दौरान संतुलन बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि सेरिबेलम सही तरह से कार्य न करे तो शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है।
49. तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियाँ मिलकर कैसे कार्य करती हैं?
तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियाँ मिलकर शरीर की गतिविधियों को संचालित करते हैं। जब मस्तिष्क किसी क्रिया का निर्णय लेता है तो प्रेरक तंत्रिकाएँ संदेश मांसपेशियों तक पहुँचाती हैं। इसके बाद मांसपेशियाँ संकुचन और प्रसार के माध्यम से गति उत्पन्न करती हैं। इस प्रकार तंत्रिका संकेत क्रिया में परिवर्तित हो जाते हैं। यह समन्वय शरीर की स्वैच्छिक गतिविधियों के लिए आवश्यक होता है।
50. नियंत्रण और समन्वय शरीर की स्थिरता कैसे बनाए रखते हैं?
शरीर की विभिन्न क्रियाएँ तभी सुचारु रूप से चल सकती हैं जब उनमें संतुलन बना रहे। नियंत्रण और समन्वय इस संतुलन को बनाए रखने में सहायता करते हैं। तंत्रिका तंत्र तुरंत प्रतिक्रिया देता है जबकि हार्मोन तंत्र लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखता है। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की आंतरिक परिस्थितियों को स्थिर रखते हैं। इससे शरीर बाहरी परिवर्तनों के बावजूद सामान्य रूप से कार्य करता रहता है। इसलिए नियंत्रण और समन्वय शरीर की स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।
51. न्यूरॉन क्या है और इसका महत्व क्या है?
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूल संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। यह एक विशेष प्रकार की कोशिका होती है जो शरीर में संदेशों का आदान-प्रदान करती है। न्यूरॉन के मुख्य भाग डेंड्राइट, कोशिका शरीर और ऐक्सॉन होते हैं। डेंड्राइट संदेश प्राप्त करते हैं जबकि ऐक्सॉन उन्हें आगे भेजता है। इसके माध्यम से विद्युत संकेत तेजी से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं। इस प्रकार न्यूरॉन शरीर की प्रतिक्रिया और समन्वय को संभव बनाता है।
52. डेंड्राइट का क्या कार्य होता है?
डेंड्राइट न्यूरॉन का वह भाग है जो अन्य कोशिकाओं से आने वाले संकेतों को ग्रहण करता है। यह छोटी-छोटी शाखाओं के रूप में फैला होता है जिससे अधिक जानकारी प्राप्त हो सके। जब कोई उत्तेजना उत्पन्न होती है तो संकेत पहले डेंड्राइट तक पहुँचते हैं। इसके बाद ये संकेत कोशिका शरीर की ओर भेजे जाते हैं। डेंड्राइट की संरचना संकेतों को प्रभावी रूप से ग्रहण करने में सहायक होती है। इसलिए यह तंत्रिका संचार की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
53. ऐक्सॉन का क्या कार्य होता है?
ऐक्सॉन न्यूरॉन का लंबा भाग होता है जो संकेतों को कोशिका शरीर से आगे की ओर भेजता है। इसके माध्यम से तंत्रिका संकेत दूसरे न्यूरॉन या लक्ष्य अंग तक पहुँचते हैं। ऐक्सॉन की लंबाई कई बार काफी अधिक होती है जिससे दूर स्थित अंगों तक संदेश पहुँचाना संभव होता है। इसके अंत में छोटी शाखाएँ होती हैं जो अन्य कोशिकाओं से जुड़ती हैं। इस प्रकार ऐक्सॉन सूचना के संचार का मुख्य मार्ग होता है। यह तंत्रिका तंत्र की गति को तेज बनाने में मदद करता है।
54. प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc) क्या है?
प्रतिवर्ती चाप वह मार्ग है जिसके माध्यम से प्रतिवर्ती क्रिया पूरी होती है। इसमें संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु और प्रेरक तंत्रिका शामिल होते हैं। जब कोई उत्तेजना उत्पन्न होती है तो संवेदी तंत्रिका उसे मेरुरज्जु तक पहुँचाती है। मेरुरज्जु तुरंत प्रतिक्रिया का संकेत प्रेरक तंत्रिका को भेज देता है। इसके बाद मांसपेशियाँ क्रिया को पूरा करती हैं। इस पूरी प्रक्रिया को प्रतिवर्ती चाप कहा जाता है।
55. प्रतिवर्ती क्रिया का क्या महत्व है?
प्रतिवर्ती क्रिया शरीर की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। यह अचानक होने वाली खतरनाक परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है। उदाहरण के लिए गर्म वस्तु को छूते ही हाथ का तुरंत पीछे हट जाना। यह प्रतिक्रिया मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है जिससे समय की बचत होती है। इससे शरीर को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है। इसलिए प्रतिवर्ती क्रिया जीवन रक्षा की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
56. मानव तंत्रिका तंत्र के प्रमुख भाग कौन-कौन से हैं?
मानव तंत्रिका तंत्र मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित होता है—मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाएँ। मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र होता है। मेरुरज्जु मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करता है। तंत्रिकाएँ इन दोनों को शरीर के विभिन्न अंगों से जोड़ती हैं। इन तीनों भागों के संयुक्त कार्य से शरीर की गतिविधियाँ संचालित होती हैं। इस प्रकार पूरा तंत्रिका तंत्र समन्वय बनाए रखता है।
57. पिट्यूटरी ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि क्यों कहा जाता है?
पिट्यूटरी ग्रंथि शरीर की एक प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथि है। इसे मास्टर ग्रंथि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अन्य कई ग्रंथियों के कार्य को नियंत्रित करती है। यह विभिन्न हार्मोन का स्राव करती है जो अन्य ग्रंथियों को सक्रिय करते हैं। इसके प्रभाव से शरीर की वृद्धि और विकास नियंत्रित होते हैं। यह ग्रंथि मस्तिष्क के नीचे स्थित होती है। इसलिए इसका शरीर के समन्वय में विशेष महत्व है।
58. अंतःस्रावी ग्रंथियाँ क्या होती हैं?
अंतःस्रावी ग्रंथियाँ वे ग्रंथियाँ होती हैं जो हार्मोन का स्राव सीधे रक्त में करती हैं। इनके पास कोई नलिका नहीं होती इसलिए इन्हें नलिकाहीन ग्रंथियाँ भी कहा जाता है। ये हार्मोन शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचकर उनकी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के रूप में थायरॉयड, पिट्यूटरी और अधिवृक्क ग्रंथियाँ आती हैं। इनका कार्य शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं में संतुलन बनाए रखना है। इसलिए ये समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
59. हार्मोन शरीर में कैसे कार्य करते हैं?
हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैलते हैं। ये विशेष लक्ष्य अंगों तक पहुँचकर उनकी गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। प्रत्येक हार्मोन का अपना विशिष्ट कार्य होता है। इनके प्रभाव से शरीर की वृद्धि, विकास और चयापचय नियंत्रित होते हैं। हार्मोन का प्रभाव धीरे-धीरे प्रकट होता है। लेकिन यह प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।
60. तंत्रिका तंत्र और हार्मोन में क्या अंतर है?
तंत्रिका तंत्र विद्युत संकेतों के माध्यम से कार्य करता है जबकि हार्मोन रासायनिक संकेतों के रूप में कार्य करते हैं। तंत्रिका संकेत बहुत तेज गति से संचरित होते हैं और उनका प्रभाव कम समय तक रहता है। इसके विपरीत हार्मोन का प्रभाव धीरे-धीरे शुरू होता है लेकिन अधिक समय तक बना रहता है। तंत्रिका तंत्र विशेष अंगों तक संदेश भेजता है जबकि हार्मोन पूरे शरीर में फैलते हैं। दोनों मिलकर शरीर का नियंत्रण और समन्वय बनाए रखते हैं।
61. पौधों में समन्वय कैसे होता है?
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता इसलिए उनका समन्वय रासायनिक पदार्थों द्वारा होता है। इन रासायनिक पदार्थों को पादप हार्मोन कहा जाता है। ये हार्मोन पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। इनके प्रभाव से पौधे विभिन्न उत्तेजनाओं के प्रति प्रतिक्रिया देते हैं। उदाहरण के लिए प्रकाश, जल और गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया। इस प्रकार पौधों में समन्वय हार्मोन के माध्यम से होता है।
62. जिबरेलिन (Gibberellin) हार्मोन का क्या कार्य है?
जिबरेलिन पौधों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वृद्धि हार्मोन है। यह तने की लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है। इसके प्रभाव से पौधों की वृद्धि तेज हो जाती है। यह बीजों के अंकुरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके कारण पौधे तेजी से विकसित होते हैं। इसलिए जिबरेलिन को वृद्धि को बढ़ाने वाला हार्मोन माना जाता है।
63. साइटोकाइनिन (Cytokinin) हार्मोन का क्या कार्य है?
साइटोकाइनिन पौधों में कोशिका विभाजन को बढ़ावा देने वाला हार्मोन है। यह नई कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करता है। इसके कारण पौधों की वृद्धि और विकास तेज होता है। यह पत्तियों को लंबे समय तक हरा बनाए रखने में भी मदद करता है। इसके प्रभाव से पौधों की उम्र बढ़ जाती है। इसलिए साइटोकाइनिन पौधों की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
64. पौधों में बीजों का अंकुरण कैसे नियंत्रित होता है?
बीजों का अंकुरण विभिन्न हार्मोनों के संतुलन पर निर्भर करता है। जिबरेलिन जैसे हार्मोन अंकुरण को बढ़ावा देते हैं। वहीं एब्सिसिक अम्ल अंकुरण को रोकने का कार्य करता है। जब अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध होती हैं तो वृद्धि हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप बीज अंकुरित होकर नया पौधा बनाता है। इस प्रकार हार्मोन बीजों के विकास को नियंत्रित करते हैं।
65. पौधों में पत्तियों का झड़ना क्यों होता है?
पत्तियों का झड़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे एब्सिसन कहा जाता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से एब्सिसिक अम्ल हार्मोन के प्रभाव से होती है। जब पौधे को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है तो पत्तियाँ झड़ने लगती हैं। इससे पौधा अपनी ऊर्जा बचा सकता है। यह प्रक्रिया पौधे के संरक्षण में सहायक होती है। इसलिए पत्तियों का झड़ना पौधे के जीवन चक्र का सामान्य भाग है।
66. नियंत्रण और समन्वय में पर्यावरण की क्या भूमिका है?
पर्यावरण में होने वाले परिवर्तन जीवों को प्रभावित करते हैं। इन परिवर्तनों के प्रति प्रतिक्रिया देने के लिए नियंत्रण और समन्वय आवश्यक होता है। इसके माध्यम से जीव वातावरण के अनुसार स्वयं को अनुकूल बना सकते हैं। उदाहरण के लिए तापमान, प्रकाश और जल की उपलब्धता। इन परिस्थितियों के अनुसार शरीर की क्रियाएँ बदल जाती हैं। इसलिए पर्यावरण नियंत्रण और समन्वय की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
67. मानव शरीर में वृद्धि कैसे नियंत्रित होती है?
मानव शरीर की वृद्धि मुख्य रूप से हार्मोन के नियंत्रण में होती है। पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा स्रावित वृद्धि हार्मोन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर की कोशिकाओं के विकास और विभाजन को बढ़ावा देता है। इसके प्रभाव से हड्डियों और मांसपेशियों की वृद्धि होती है। यदि यह हार्मोन संतुलित मात्रा में न बने तो वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसलिए यह शरीर के विकास के लिए आवश्यक है।
68. तंत्रिका तंत्र शरीर को खतरे से कैसे बचाता है?
तंत्रिका तंत्र शरीर में उत्पन्न होने वाली उत्तेजनाओं को तुरंत पहचानता है। जब कोई खतरा महसूस होता है तो संवेदी तंत्रिकाएँ सूचना मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं। इसके बाद मस्तिष्क तुरंत प्रतिक्रिया का निर्देश देता है। कई बार प्रतिवर्ती क्रिया के माध्यम से तुरंत प्रतिक्रिया हो जाती है। इससे शरीर को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है। इसलिए तंत्रिका तंत्र सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
69. पौधों में प्रकाश की ओर झुकाव क्यों होता है?
पौधे प्रकाश प्राप्त करने के लिए प्रकाश की दिशा में झुकते हैं। यह प्रक्रिया प्रकाशानुवर्तन कहलाती है। इसमें ऑक्सिन हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब प्रकाश एक दिशा से आता है तो ऑक्सिन छाया वाले भाग में अधिक एकत्र हो जाता है। इससे उस भाग की कोशिकाएँ अधिक बढ़ती हैं। परिणामस्वरूप पौधा प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
70. शरीर में समन्वय की आवश्यकता क्यों होती है?
शरीर के सभी अंगों को सही ढंग से कार्य करने के लिए एक-दूसरे के साथ तालमेल की आवश्यकता होती है। समन्वय इस तालमेल को बनाए रखने में मदद करता है। इसके माध्यम से शरीर की क्रियाएँ व्यवस्थित रूप से संचालित होती हैं। यह बाहरी परिवर्तनों के प्रति उचित प्रतिक्रिया देने में सहायता करता है। इससे शरीर का संतुलन बना रहता है। इसलिए समन्वय जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
71. तंत्रिका तंत्र की संरचना जटिल क्यों होती है?
तंत्रिका तंत्र को शरीर के सभी अंगों से सूचनाएँ प्राप्त करनी होती हैं। साथ ही उसे उचित प्रतिक्रिया भी उत्पन्न करनी होती है। इस कारण इसकी संरचना अत्यंत जटिल होती है। इसमें लाखों न्यूरॉन आपस में जुड़े होते हैं। इनके माध्यम से सूचनाओं का तेज आदान-प्रदान होता है। यह जटिल संरचना शरीर के समन्वय को प्रभावी बनाती है।
72. हार्मोन का असंतुलन शरीर को कैसे प्रभावित करता है?
यदि शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाए तो कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इससे शरीर की वृद्धि, चयापचय और ऊर्जा संतुलन प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए थायरॉयड हार्मोन की कमी से घेंघा रोग हो सकता है। इसी प्रकार इंसुलिन की कमी से मधुमेह हो सकता है। इसलिए हार्मोन का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है।
73. पौधों की जड़ें जल की ओर क्यों बढ़ती हैं?
पौधों की जड़ें जल की दिशा में बढ़ती हैं क्योंकि उन्हें जल की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया जलानुवर्तन कहलाती है। जड़ें मिट्टी में उस दिशा में फैलती हैं जहाँ जल की मात्रा अधिक होती है। इससे पौधे को पर्याप्त पानी प्राप्त होता है। जल पौधों की वृद्धि और पोषण के लिए आवश्यक है। इसलिए जड़ों का जल की ओर बढ़ना पौधे के जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।
74. शरीर में तंत्रिकाओं का क्या महत्व है?
तंत्रिकाएँ मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों के बीच संपर्क स्थापित करती हैं। इनके माध्यम से संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचते हैं। तंत्रिकाएँ संवेदी और प्रेरक दोनों प्रकार की होती हैं। संवेदी तंत्रिकाएँ सूचना मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं जबकि प्रेरक तंत्रिकाएँ निर्देश अंगों तक पहुँचाती हैं। इस प्रकार तंत्रिकाएँ शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं।
75. नियंत्रण और समन्वय जीवों के अस्तित्व के लिए क्यों आवश्यक है?
नियंत्रण और समन्वय जीवों को अपने वातावरण के अनुसार प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाते हैं। इनके माध्यम से शरीर की विभिन्न क्रियाएँ संतुलित रहती हैं। इससे जीव बाहरी परिवर्तनों के बावजूद सामान्य रूप से कार्य कर पाते हैं। साथ ही यह शरीर के अंगों के बीच तालमेल बनाए रखता है। इसके बिना जीवन की प्रक्रियाएँ व्यवस्थित रूप से नहीं चल सकतीं। इसलिए यह जीवों के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Long Answer type Question (NCERT BASED)
1. नियंत्रण और समन्वय से आप क्या समझते हैं? इसका जीवों के जीवन में क्या महत्व है?
नियंत्रण और समन्वय वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से शरीर के विभिन्न अंग मिलकर व्यवस्थित रूप से कार्य करते हैं। यह शरीर को बाहरी तथा आंतरिक परिवर्तनों के प्रति उचित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। जीवों के वातावरण में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए उनके अनुसार प्रतिक्रिया देना आवश्यक होता है। तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र इस प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र तेजी से संदेश भेजता है जबकि हार्मोन लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखते हैं। इनके संयुक्त कार्य से शरीर की गतिविधियाँ संतुलित रहती हैं। इसलिए नियंत्रण और समन्वय जीवों के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
2. मानव तंत्रिका तंत्र की संरचना और कार्य को समझाइए।
मानव तंत्रिका तंत्र शरीर का प्रमुख नियंत्रण तंत्र है जो विभिन्न अंगों की गतिविधियों का संचालन करता है। यह मुख्य रूप से मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाओं से मिलकर बना होता है। मस्तिष्क शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है जो सोचने, स्मरण करने और निर्णय लेने का कार्य करता है। मेरुरज्जु मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करती है। तंत्रिकाएँ शरीर के विभिन्न भागों को मस्तिष्क से जोड़ती हैं। इनके माध्यम से संवेदी और प्रेरक संदेशों का संचार होता है। इस प्रकार तंत्रिका तंत्र शरीर में नियंत्रण और समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. न्यूरॉन की संरचना और कार्य का वर्णन कीजिए।
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई है जो शरीर में संदेशों का संचार करती है। इसकी संरचना तीन मुख्य भागों से मिलकर बनी होती है—डेंड्राइट, कोशिका शरीर और ऐक्सॉन। डेंड्राइट अन्य कोशिकाओं से आने वाले संकेतों को ग्रहण करते हैं। कोशिका शरीर इन संकेतों को संसाधित करता है। इसके बाद ऐक्सॉन संकेतों को आगे की कोशिकाओं या मांसपेशियों तक पहुँचाता है। न्यूरॉन के माध्यम से विद्युत संकेत तेजी से संचरित होते हैं। यही प्रक्रिया शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है। इसलिए न्यूरॉन तंत्रिका संचार की मूल आधार इकाई है।
4. प्रतिवर्ती क्रिया क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
प्रतिवर्ती क्रिया वह त्वरित और स्वतः होने वाली प्रतिक्रिया है जो किसी उत्तेजना के उत्तर में तुरंत उत्पन्न होती है। यह क्रिया मुख्य रूप से मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। इसमें मस्तिष्क की भूमिका बहुत कम होती है इसलिए प्रतिक्रिया बहुत तेजी से होती है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति गर्म वस्तु को छू लेता है तो उसका हाथ तुरंत पीछे हट जाता है। यह क्रिया शरीर को संभावित चोट से बचाने में मदद करती है। प्रतिवर्ती क्रिया प्रतिवर्ती चाप के माध्यम से पूरी होती है। इसलिए यह शरीर की सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
5. अंतःस्रावी ग्रंथियाँ क्या होती हैं? उनके कार्य को समझाइए।
अंतःस्रावी ग्रंथियाँ वे ग्रंथियाँ होती हैं जो हार्मोन का स्राव सीधे रक्त में करती हैं। इन्हें नलिकाहीन ग्रंथियाँ भी कहा जाता है क्योंकि इनमें नलिकाएँ नहीं होतीं। ये हार्मोन शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचकर उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए पिट्यूटरी, थायरॉयड और अधिवृक्क ग्रंथियाँ। हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास और चयापचय को नियंत्रित करते हैं। इनके प्रभाव से शरीर की कई प्रक्रियाएँ संतुलित रहती हैं। इसलिए अंतःस्रावी ग्रंथियाँ शरीर के नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
6. एड्रेनालिन हार्मोन का शरीर में क्या कार्य है?
एड्रेनालिन हार्मोन अधिवृक्क ग्रंथि द्वारा स्रावित किया जाता है। यह शरीर को अचानक उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के लिए तैयार करता है। जब व्यक्ति भय, तनाव या खतरे की स्थिति में होता है तो यह हार्मोन तेजी से स्रावित होता है। इसके प्रभाव से हृदय की गति बढ़ जाती है और रक्तचाप भी बढ़ता है। साथ ही मांसपेशियों तक अधिक रक्त पहुँचने लगता है। इससे शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हो जाता है। इसलिए एड्रेनालिन को “आपातकालीन हार्मोन” कहा जाता है।
7. तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र दोनों शरीर के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र विद्युत संकेतों के माध्यम से कार्य करता है और इसकी प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है। इसके विपरीत अंतःस्रावी तंत्र हार्मोन के माध्यम से कार्य करता है। हार्मोन का प्रभाव धीरे-धीरे शुरू होता है लेकिन अधिक समय तक बना रहता है। तंत्रिका तंत्र विशेष अंगों तक संदेश भेजता है जबकि हार्मोन पूरे शरीर में फैल जाते हैं। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की गतिविधियों को संतुलित बनाए रखते हैं।
8. पौधों में नियंत्रण और समन्वय कैसे होता है?
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता इसलिए उनका नियंत्रण रासायनिक पदार्थों द्वारा होता है। इन रासायनिक पदार्थों को पादप हार्मोन कहा जाता है। ये हार्मोन पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए ऑक्सिन, जिबरेलिन और साइटोकाइनिन। इनके प्रभाव से पौधे प्रकाश, जल और गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। पौधों की गति मुख्यतः वृद्धि पर आधारित होती है। इस प्रकार पादप हार्मोन पौधों में समन्वय की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
9. ऑक्सिन हार्मोन की भूमिका को समझाइए।
ऑक्सिन पौधों में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण वृद्धि हार्मोन है। यह मुख्य रूप से तने के शीर्ष भाग में निर्मित होता है। इसका कार्य कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाना और पौधे की वृद्धि को नियंत्रित करना है। ऑक्सिन पौधों को प्रकाश की दिशा में झुकने में मदद करता है। इसके कारण पौधे प्रकाश की ओर मुड़ जाते हैं जिससे उन्हें अधिक प्रकाश प्राप्त होता है। यह प्रक्रिया प्रकाशानुवर्तन कहलाती है। इसलिए ऑक्सिन पौधों की वृद्धि और दिशा निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
10. नियंत्रण और समन्वय शरीर के संतुलन को कैसे बनाए रखते हैं?
शरीर के विभिन्न अंगों को सही ढंग से कार्य करने के लिए एक-दूसरे के साथ तालमेल की आवश्यकता होती है। नियंत्रण और समन्वय इस तालमेल को बनाए रखते हैं। तंत्रिका तंत्र शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है। वहीं हार्मोन शरीर की दीर्घकालिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इन दोनों तंत्रों के संयुक्त कार्य से शरीर की गतिविधियाँ संतुलित रहती हैं। इससे शरीर बाहरी और आंतरिक परिवर्तनों के अनुसार स्वयं को अनुकूल बना पाता है। इसलिए नियंत्रण और समन्वय शरीर की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
11. नियंत्रण और समन्वय की आवश्यकता क्यों होती है?
जीवित प्राणियों के शरीर में अनेक प्रकार की क्रियाएँ लगातार होती रहती हैं। इन सभी क्रियाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए नियंत्रण और समन्वय की आवश्यकता होती है। यदि शरीर के अंग आपस में तालमेल बनाकर काम न करें तो शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार प्रतिक्रिया देना भी आवश्यक होता है। नियंत्रण और समन्वय की सहायता से शरीर सही समय पर उचित प्रतिक्रिया दे पाता है। इससे जीवित प्राणी अपने वातावरण के साथ अनुकूलन कर पाते हैं। इसलिए जीवन क्रियाओं को व्यवस्थित बनाए रखने में नियंत्रण और समन्वय का विशेष महत्व है।
12. तंत्रिका कोशिका (Neuron) की विशेषताएँ क्या हैं?
तंत्रिका कोशिका तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई होती है जो संदेशों के संचार का कार्य करती है। इसकी संरचना विशेष रूप से संकेतों को ग्रहण करने और आगे भेजने के लिए अनुकूलित होती है। न्यूरॉन में डेंड्राइट, कोशिका शरीर और ऐक्सॉन नामक भाग होते हैं। डेंड्राइट बाहरी संकेतों को प्राप्त करते हैं जबकि ऐक्सॉन उन्हें अन्य कोशिकाओं तक पहुँचाता है। न्यूरॉन विद्युत तथा रासायनिक संकेतों के माध्यम से कार्य करता है। इसकी सहायता से शरीर के विभिन्न अंगों के बीच सूचना का आदान-प्रदान संभव होता है। इस प्रकार न्यूरॉन शरीर के नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
13. संवेदी तंत्रिकाएँ और प्रेरक तंत्रिकाएँ क्या होती हैं?
तंत्रिका तंत्र में विभिन्न प्रकार की तंत्रिकाएँ होती हैं जिनका कार्य अलग-अलग होता है। संवेदी तंत्रिकाएँ शरीर के संवेदन अंगों से सूचना को मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचाती हैं। इसके विपरीत प्रेरक तंत्रिकाएँ मस्तिष्क से आदेश प्राप्त कर मांसपेशियों या ग्रंथियों तक पहुँचाती हैं। इन दोनों प्रकार की तंत्रिकाओं के सहयोग से शरीर में प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए जब हम किसी वस्तु को छूते हैं तो संवेदी तंत्रिका सूचना देती है और प्रेरक तंत्रिका हाथ को हटाने का आदेश देती है। इस प्रकार दोनों तंत्रिकाएँ मिलकर शरीर में समन्वित क्रियाएँ कराती हैं।
14. सिनेप्स (Synapse) क्या होता है?
सिनेप्स दो न्यूरॉनों के बीच पाया जाने वाला सूक्ष्म अंतर होता है जहाँ से तंत्रिका संकेत एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक पहुँचते हैं। जब संकेत ऐक्सॉन के अंतिम भाग तक पहुँचता है तो वहाँ से रासायनिक पदार्थ निकलते हैं। ये रसायन अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट को उत्तेजित करते हैं और संकेत आगे बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया के कारण तंत्रिका संदेशों का प्रवाह एक दिशा में बना रहता है। सिनेप्स तंत्रिका तंत्र में संचार की गति और दिशा को नियंत्रित करता है। इसलिए यह सूचना के आदान-प्रदान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
15. रिफ्लेक्स आर्क (Reflex Arc) की प्रक्रिया समझाइए।
रिफ्लेक्स आर्क वह मार्ग है जिसके माध्यम से प्रतिवर्ती क्रिया संपन्न होती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले संवेदी अंग उत्तेजना को ग्रहण करता है। इसके बाद संवेदी तंत्रिका उस सूचना को मेरुरज्जु तक पहुँचाती है। मेरुरज्जु इस संकेत को तुरंत संसाधित कर प्रेरक तंत्रिका को आदेश देती है। प्रेरक तंत्रिका मांसपेशियों को सक्रिय करती है जिससे तुरंत प्रतिक्रिया उत्पन्न होती है। यह पूरी प्रक्रिया बहुत तेज होती है और इसमें मस्तिष्क की भूमिका कम होती है। इस प्रकार रिफ्लेक्स आर्क शरीर को अचानक होने वाले खतरों से बचाने में सहायता करता है।
16. मानव शरीर में मस्तिष्क का क्या महत्व है?
मस्तिष्क मानव शरीर का मुख्य नियंत्रण केंद्र है जो सभी महत्वपूर्ण क्रियाओं को संचालित करता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है और उचित प्रतिक्रिया देता है। सोचने, समझने, याद रखने और निर्णय लेने जैसी क्षमताएँ मस्तिष्क से ही नियंत्रित होती हैं। इसके अतिरिक्त यह मांसपेशियों की गतिविधियों और संतुलन को भी नियंत्रित करता है। मस्तिष्क के बिना शरीर की क्रियाओं का समन्वय संभव नहीं है। इसलिए इसे तंत्रिका तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
17. मानव शरीर में हार्मोन का क्या महत्व है?
हार्मोन शरीर में बनने वाले विशेष रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। ये रक्त के माध्यम से विभिन्न अंगों तक पहुँचकर उनकी क्रियाओं को प्रभावित करते हैं। हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास और चयापचय क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इसके अलावा ये भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और प्रजनन प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करते हैं। हार्मोन की मात्रा संतुलित होना आवश्यक है क्योंकि असंतुलन से कई प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए हार्मोन शरीर के दीर्घकालिक नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
18. अग्न्याशय (Pancreas) की भूमिका क्या है?
अग्न्याशय एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है जो पाचन और हार्मोन स्राव दोनों कार्य करती है। यह इंसुलिन और ग्लूकागन नामक हार्मोन का स्राव करती है। इंसुलिन रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है और कोशिकाओं को ऊर्जा प्राप्त करने में सहायता करता है। यदि शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाए तो मधुमेह जैसी बीमारी हो सकती है। अग्न्याशय का संतुलित कार्य शरीर के ऊर्जा स्तर को बनाए रखने में सहायक होता है। इस प्रकार यह शरीर के चयापचय नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
19. पादपों में हार्मोन का क्या महत्व है?
पौधों में हार्मोन उनकी वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने वाले रासायनिक पदार्थ होते हैं। ये पौधों की कोशिकाओं की वृद्धि की गति को प्रभावित करते हैं। इनके प्रभाव से पौधे प्रकाश, गुरुत्व और जल जैसी परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देते हैं। विभिन्न प्रकार के हार्मोन पौधों के अलग-अलग कार्यों को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए ऑक्सिन तनों की वृद्धि को बढ़ाता है जबकि एथिलीन फलों के पकने में सहायता करता है। इस प्रकार पादप हार्मोन पौधों के जीवन चक्र को संतुलित बनाए रखते हैं।
20. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) क्या है?
प्रकाशानुवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे प्रकाश की दिशा में बढ़ते हैं। यह प्रतिक्रिया मुख्य रूप से ऑक्सिन हार्मोन के प्रभाव से होती है। जब पौधे के एक भाग पर अधिक प्रकाश पड़ता है तो ऑक्सिन दूसरे भाग में अधिक मात्रा में जमा हो जाता है। इसके कारण उस भाग की कोशिकाएँ अधिक तेजी से बढ़ती हैं। परिणामस्वरूप तना प्रकाश की ओर मुड़ जाता है। यह प्रक्रिया पौधों को प्रकाश प्राप्त करने में मदद करती है जिससे प्रकाश संश्लेषण अच्छी तरह हो सके। इसलिए प्रकाशानुवर्तन पौधों के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
25. तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र दोनों शरीर के नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तंत्रिका तंत्र विद्युत संकेतों के माध्यम से बहुत तेजी से कार्य करता है और इसकी प्रतिक्रिया तुरंत दिखाई देती है। इसके विपरीत अंतःस्रावी तंत्र हार्मोन के माध्यम से कार्य करता है जो रक्त के द्वारा शरीर में फैलते हैं। हार्मोन की क्रिया अपेक्षाकृत धीमी होती है लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। तंत्रिका तंत्र अल्पकालिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है जबकि अंतःस्रावी तंत्र दीर्घकालिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। इस प्रकार दोनों तंत्र मिलकर शरीर का संतुलन बनाए रखते हैं।
21. मनुष्य के शरीर में तंत्रिका तंत्र (Nervous System) का क्या महत्व है?
तंत्रिका तंत्र शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित और समन्वित करने का मुख्य माध्यम है। यह शरीर के अलग-अलग अंगों से सूचनाएँ प्राप्त करता है और आवश्यक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। मस्तिष्क, मेरुरज्जु और नसें मिलकर तंत्रिका तंत्र का निर्माण करती हैं। जब कोई बाहरी या आंतरिक परिवर्तन होता है तो तंत्रिका तंत्र तुरंत संकेतों का आदान-प्रदान करता है। इसके कारण शरीर सही समय पर सही क्रिया कर पाता है। यह सोचने, याद रखने और निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। इस प्रकार तंत्रिका तंत्र शरीर के संतुलन और क्रियाशीलता को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
22. न्यूरॉन की संरचना का वर्णन कीजिए।
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की मूलभूत संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। इसकी मुख्य संरचना तीन भागों से मिलकर बनी होती है—डेंड्राइट, कोशिका शरीर (Cell Body) और ऐक्सॉन। डेंड्राइट बाहरी संकेतों को ग्रहण करते हैं और उन्हें कोशिका शरीर तक पहुँचाते हैं। कोशिका शरीर इन संकेतों को संसाधित करता है। इसके बाद ऐक्सॉन संकेतों को आगे दूसरे न्यूरॉन या अंगों तक पहुँचाता है। ऐक्सॉन के अंत में सिनैप्स नामक स्थान होता है जहाँ से रासायनिक पदार्थों के माध्यम से संकेत आगे बढ़ते हैं। इस प्रकार न्यूरॉन शरीर में सूचना के संचार का मुख्य माध्यम है।
23. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
प्रतिवर्ती क्रिया वह स्वचालित प्रतिक्रिया है जो किसी उत्तेजना के उत्तर में तुरंत होती है। यह प्रतिक्रिया बहुत तेज होती है क्योंकि इसमें मस्तिष्क की बजाय मेरुरज्जु मुख्य भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए यदि हम गलती से गर्म वस्तु को छू लें तो हाथ तुरंत पीछे हट जाता है। इस क्रिया में संवेदी तंत्रिकाएँ संकेत को मेरुरज्जु तक पहुँचाती हैं और वहाँ से मोटर तंत्रिकाएँ मांसपेशियों को प्रतिक्रिया देने का आदेश देती हैं। इस प्रक्रिया को रिफ्लेक्स आर्क कहा जाता है। प्रतिवर्ती क्रियाएँ शरीर को अचानक होने वाले खतरों से बचाने में मदद करती हैं।
24. हार्मोन क्या होते हैं और उनका शरीर में क्या कार्य है?
हार्मोन शरीर में बनने वाले विशेष रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित किए जाते हैं। ये रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं और उनकी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास, चयापचय और प्रजनन प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए थायरॉक्सिन हार्मोन शरीर की ऊर्जा उपयोग की गति को नियंत्रित करता है। हार्मोन की मात्रा में असंतुलन होने पर शरीर की सामान्य क्रियाएँ प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए हार्मोन शरीर के समन्वय और संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
25. पादपों में नियंत्रण और समन्वय कैसे होता है?
पौधों में नियंत्रण और समन्वय मुख्य रूप से रासायनिक पदार्थों के माध्यम से होता है जिन्हें पादप हार्मोन कहा जाता है। ये हार्मोन पौधों की वृद्धि, विकास और विभिन्न प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए ऑक्सिन पौधों की लंबाई बढ़ाने में सहायक होता है। गिबरेलिन बीजों के अंकुरण और तनों की वृद्धि में मदद करता है। साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है। पौधे प्रकाश, गुरुत्व और स्पर्श जैसी उत्तेजनाओं के प्रति भी प्रतिक्रिया देते हैं। इस प्रकार पौधों में हार्मोन और उत्तेजना-प्रतिक्रिया प्रणाली मिलकर नियंत्रण और समन्वय स्थापित करती है।
26. अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands) क्या होती हैं?
अंतःस्रावी ग्रंथियाँ वे विशेष ग्रंथियाँ होती हैं जो हार्मोन का स्राव सीधे रक्त में करती हैं। इनके पास कोई नलिका (duct) नहीं होती, इसलिए इन्हें नलिकाहीन ग्रंथियाँ भी कहा जाता है। प्रमुख अंतःस्रावी ग्रंथियों में पिट्यूटरी, थायरॉइड, एड्रिनल और पैंक्रियास शामिल हैं। ये ग्रंथियाँ शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं जैसे वृद्धि, चयापचय और भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ। इनसे स्रावित हार्मोन शरीर के दूर स्थित अंगों पर भी प्रभाव डालते हैं। इस प्रकार अंतःस्रावी ग्रंथियाँ शरीर के समन्वय और संतुलन को बनाए रखने में अत्यंत आवश्यक हैं।
27. मानव मस्तिष्क के मुख्य भागों का वर्णन कीजिए।
मानव मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर की अधिकांश क्रियाओं को नियंत्रित करता है। इसके तीन मुख्य भाग होते हैं—अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क। अग्र मस्तिष्क सोचने, याद रखने और निर्णय लेने जैसी क्रियाओं का केंद्र होता है। मध्य मस्तिष्क दृष्टि और श्रवण से संबंधित संकेतों को नियंत्रित करता है। पश्च मस्तिष्क शरीर के संतुलन और मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क शरीर के सभी अंगों से सूचनाएँ प्राप्त कर उन्हें उचित प्रतिक्रिया देता है। इस प्रकार मस्तिष्क शरीर के समन्वय और नियंत्रण का मुख्य केंद्र है।
28. मेरुरज्जु (Spinal Cord) का कार्य क्या है?
मेरुरज्जु तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है जो मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करता है। यह रीढ़ की हड्डी के अंदर स्थित होती है और लंबी नली के समान दिखाई देती है। मेरुरज्जु का मुख्य कार्य शरीर के विभिन्न अंगों से प्राप्त संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाना और मस्तिष्क से आदेश वापस अंगों तक भेजना है। इसके अतिरिक्त यह प्रतिवर्ती क्रियाओं को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब कोई अचानक उत्तेजना मिलती है तो मेरुरज्जु तुरंत प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है। इस प्रकार यह शरीर को तुरंत सुरक्षा प्रदान करने में सहायक होती है।
29. पिट्यूटरी ग्रंथि को “मास्टर ग्रंथि” क्यों कहा जाता है?
पिट्यूटरी ग्रंथि को “मास्टर ग्रंथि” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है। यह मस्तिष्क के आधार पर स्थित एक छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथि है। इससे निकलने वाले हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास और विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। पिट्यूटरी ग्रंथि थायरॉइड, एड्रिनल और अन्य ग्रंथियों के कार्यों को भी नियंत्रित करती है। इसके द्वारा स्रावित हार्मोन शरीर के संतुलन को बनाए रखने में सहायता करते हैं। इसलिए इसे अंतःस्रावी तंत्र का मुख्य नियंत्रक माना जाता है।
30. थायरॉइड ग्रंथि का शरीर में क्या कार्य है?
थायरॉइड ग्रंथि गर्दन के सामने स्थित एक महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथि है। यह थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का स्राव करती है। यह हार्मोन शरीर की चयापचय क्रिया को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर ऊर्जा का सही उपयोग कर पाता है। इसके अलावा यह शरीर की वृद्धि और विकास को भी प्रभावित करता है। यदि शरीर में थायरॉक्सिन की कमी हो जाए तो व्यक्ति को घेंघा जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए इस हार्मोन के संतुलन के लिए आयोडीन युक्त भोजन का सेवन आवश्यक होता है। इस प्रकार थायरॉइड ग्रंथि शरीर की ऊर्जा और विकास के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
31. एड्रिनल ग्रंथि का कार्य समझाइए।
एड्रिनल ग्रंथि गुर्दों के ऊपर स्थित होती है और यह एड्रेनालिन हार्मोन का स्राव करती है। इस हार्मोन को आपातकालीन हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि यह तनाव या भय की स्थिति में सक्रिय हो जाता है। एड्रेनालिन हृदय की धड़कन को तेज करता है और शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करता है। इससे मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा मिलती है और व्यक्ति तेजी से प्रतिक्रिया दे पाता है। यह हार्मोन रक्तचाप और श्वसन की गति को भी प्रभावित करता है। इस प्रकार एड्रिनल ग्रंथि शरीर को कठिन परिस्थितियों से निपटने में सहायता करती है।
32. पादप हार्मोन क्या होते हैं? इनके प्रकार बताइए।
पादप हार्मोन वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। ये बहुत कम मात्रा में बनते हैं लेकिन उनका प्रभाव व्यापक होता है। प्रमुख पादप हार्मोन में ऑक्सिन, गिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एथिलीन और एब्सिसिक अम्ल शामिल हैं। ऑक्सिन तनों की वृद्धि को बढ़ाता है जबकि गिबरेलिन बीजों के अंकुरण में सहायता करता है। साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है। एथिलीन फलों के पकने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इस प्रकार पादप हार्मोन पौधों के विकास और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
33. उष्णकटिबंधीय गति (Tropic Movement) क्या होती है?
उष्णकटिबंधीय गति वह प्रक्रिया है जिसमें पौधे बाहरी उत्तेजनाओं के प्रभाव में दिशा बदलकर बढ़ते हैं। यह प्रतिक्रिया मुख्य रूप से प्रकाश, जल, गुरुत्व या स्पर्श के कारण होती है। उदाहरण के लिए पौधों की शाखाएँ प्रकाश की ओर बढ़ती हैं, जिसे प्रकाशानुवर्तन कहा जाता है। इसी प्रकार जड़ें गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ती हैं जिसे गुरुत्वानुवर्तन कहते हैं। इन गतियों में पादप हार्मोन विशेष रूप से ऑक्सिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये हार्मोन कोशिकाओं की वृद्धि की गति को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार उष्णकटिबंधीय गति पौधों को अनुकूल वातावरण प्राप्त करने में सहायता करती है।
34. मनुष्य में नियंत्रण और समन्वय के दो मुख्य तंत्र कौन-से हैं?
मनुष्य के शरीर में नियंत्रण और समन्वय मुख्य रूप से दो तंत्रों द्वारा होता है—तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र। तंत्रिका तंत्र तेजी से संकेतों का संचार करता है और तुरंत प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। इसमें मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाएँ शामिल होती हैं। दूसरी ओर अंतःस्रावी तंत्र हार्मोन के माध्यम से कार्य करता है जो रक्त के द्वारा शरीर में फैलते हैं। इसकी क्रियाएँ अपेक्षाकृत धीमी होती हैं लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक रहता है। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की विभिन्न गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार ये शरीर में संतुलन और समन्वय बनाए रखते हैं।
35. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) क्या है?
गुरुत्वानुवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों के भाग गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में बढ़ते हैं। सामान्यतः पौधों की जड़ें गुरुत्वाकर्षण की दिशा में नीचे की ओर बढ़ती हैं जबकि तना ऊपर की ओर बढ़ता है। जड़ों का नीचे बढ़ना सकारात्मक गुरुत्वानुवर्तन कहलाता है। इसके विपरीत तनों का ऊपर बढ़ना नकारात्मक गुरुत्वानुवर्तन कहलाता है। इस प्रतिक्रिया के कारण पौधों की जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह फैलकर जल और खनिज पदार्थों को अवशोषित कर पाती हैं। इसलिए गुरुत्वानुवर्तन पौधों के संतुलित विकास में सहायक होता है।
36. स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) क्या है?
स्पर्शानुवर्तन वह प्रतिक्रिया है जिसमें पौधे स्पर्श के प्रभाव से दिशा बदलकर बढ़ते हैं। यह प्रक्रिया विशेष रूप से लताओं और बेलों में देखी जाती है। जब पौधे का तना किसी सहारे को छूता है तो वह उसी दिशा में मुड़कर लिपट जाता है। इस प्रतिक्रिया के कारण पौधे को सहारा मिल जाता है और वह ऊपर की ओर बढ़ पाता है। स्पर्शानुवर्तन पौधों को प्रकाश प्राप्त करने में भी सहायता करता है। इसलिए यह पौधों के विकास और स्थिरता के लिए उपयोगी माना जाता है।
37. पौधों में नास्टिक गति (Nastic Movement) क्या होती है?
नास्टिक गति पौधों की ऐसी गति है जो किसी विशेष दिशा पर निर्भर नहीं होती। यह गति बाहरी उत्तेजनाओं जैसे प्रकाश, तापमान या स्पर्श के कारण होती है। उदाहरण के लिए छुई-मुई (मिमोसा) के पौधे की पत्तियाँ छूने पर तुरंत बंद हो जाती हैं। यह प्रतिक्रिया पौधे की सुरक्षा के लिए होती है। नास्टिक गति में वृद्धि की दिशा महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि प्रतिक्रिया का प्रकार महत्वपूर्ण होता है। इस प्रकार यह पौधों की अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है।
38. पौधों में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
पौधों में रासायनिक समन्वय मुख्य रूप से पादप हार्मोन के माध्यम से होता है। ये हार्मोन पौधों के विभिन्न भागों में बनते हैं और अन्य भागों तक पहुँचते हैं। इनके प्रभाव से कोशिकाओं की वृद्धि, विभाजन और विकास नियंत्रित होता है। हार्मोन पौधों को बाहरी परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया देने में सहायता करते हैं। इससे पौधे प्रकाश, जल और गुरुत्व जैसे कारकों के अनुसार अनुकूलन कर पाते हैं। इस प्रकार रासायनिक समन्वय पौधों के संतुलित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
39. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) क्या है?
स्वायत्त तंत्रिका तंत्र तंत्रिका तंत्र का वह भाग है जो शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह क्रियाएँ हमारी इच्छा के बिना स्वतः चलती रहती हैं। उदाहरण के रूप में हृदय की धड़कन, श्वसन की गति और पाचन क्रिया इसी तंत्र के नियंत्रण में होती हैं। स्वायत्त तंत्रिका तंत्र आंतरिक अंगों के कार्य को संतुलित बनाए रखता है। इसे मुख्य रूप से सहानुभूति तंत्र और परासहानुभूति तंत्र में विभाजित किया जाता है। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार स्वायत्त तंत्रिका तंत्र शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
40. एड्रेनालिन हार्मोन का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
एड्रेनालिन हार्मोन एड्रिनल ग्रंथि द्वारा स्रावित किया जाता है और इसे आपातकालीन हार्मोन भी कहा जाता है। यह हार्मोन तब सक्रिय होता है जब शरीर को तनाव, भय या खतरे का सामना करना पड़ता है। एड्रेनालिन हृदय की धड़कन को तेज करता है और रक्त संचार को बढ़ा देता है। इससे मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है और व्यक्ति तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाता है। यह श्वसन की गति को भी बढ़ा देता है जिससे शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। इस प्रकार एड्रेनालिन शरीर को कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करता है।
41. इंसुलिन हार्मोन का क्या कार्य है?
इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो अग्न्याशय द्वारा स्रावित किया जाता है। इसका मुख्य कार्य रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करना है। इंसुलिन कोशिकाओं को ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में उपयोग करने में सहायता करता है। इसके कारण रक्त में शर्करा का स्तर संतुलित बना रहता है। यदि शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाए तो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है और मधुमेह जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए शरीर के ऊर्जा संतुलन को बनाए रखने में इंसुलिन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
42. पौधों में एथिलीन हार्मोन का क्या महत्व है?
एथिलीन एक गैसीय पादप हार्मोन है जो फलों के पकने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इसके प्रभाव से फलों का रंग, स्वाद और सुगंध विकसित होते हैं। एथिलीन के कारण फल धीरे-धीरे परिपक्व होकर खाने योग्य बन जाते हैं। यह पत्तियों के झड़ने और फूलों के मुरझाने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। एथिलीन पौधों के विकास और जीवन चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसे पौधों के परिपक्वता से संबंधित हार्मोन माना जाता है।
43. एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid) का कार्य बताइए।
एब्सिसिक अम्ल एक महत्वपूर्ण पादप हार्मोन है जो पौधों की वृद्धि को नियंत्रित करता है। इसे वृद्धि अवरोधक हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि यह पौधों की वृद्धि को धीमा कर सकता है। यह बीजों को निष्क्रिय अवस्था में बनाए रखने में सहायता करता है। इसके प्रभाव से पत्तियों का झड़ना और पौधों की गतिविधियाँ कम हो सकती हैं। एब्सिसिक अम्ल पौधों को प्रतिकूल परिस्थितियों जैसे सूखा या अत्यधिक तापमान में जीवित रहने में मदद करता है। इस प्रकार यह पौधों के जीवन चक्र के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होता है।
44. मानव शरीर में नियंत्रण और समन्वय का क्या महत्व है?
मानव शरीर में विभिन्न अंग लगातार कार्य करते रहते हैं और इन सभी क्रियाओं के बीच तालमेल होना आवश्यक होता है। नियंत्रण और समन्वय के माध्यम से शरीर के सभी अंग एक व्यवस्थित तरीके से कार्य करते हैं। इससे शरीर बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार उचित प्रतिक्रिया दे पाता है। तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र मिलकर इस समन्वय को बनाए रखते हैं। इनके कारण शरीर की गतिविधियाँ संतुलित रूप से चलती रहती हैं। यदि नियंत्रण और समन्वय सही ढंग से न हो तो शरीर की सामान्य क्रियाएँ प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए यह जीवन की सभी प्रक्रियाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।
45. अंतःस्रावी ग्रंथि (Endocrine Gland) क्या होती है?
अंतःस्रावी ग्रंथियाँ वे विशेष ग्रंथियाँ होती हैं जो हार्मोन नामक रासायनिक पदार्थों का निर्माण करती हैं। इन ग्रंथियों में कोई नलिका नहीं होती, इसलिए इन्हें नलिकाहीन ग्रंथियाँ भी कहा जाता है। इनके द्वारा स्रावित हार्मोन सीधे रक्त में मिल जाते हैं और शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं। हार्मोन शरीर की वृद्धि, विकास और चयापचय क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। विभिन्न अंतःस्रावी ग्रंथियाँ मिलकर शरीर में रासायनिक समन्वय स्थापित करती हैं। इस प्रकार ये शरीर के नियंत्रण तंत्र का महत्वपूर्ण भाग होती हैं।
46. तंत्रिका तंत्र और हार्मोन तंत्र मिलकर कैसे कार्य करते हैं?
मानव शरीर में नियंत्रण और समन्वय दो प्रमुख तंत्रों द्वारा किया जाता है—तंत्रिका तंत्र और हार्मोन तंत्र। तंत्रिका तंत्र विद्युत संकेतों के माध्यम से बहुत तेजी से संदेशों का संचार करता है। इसके विपरीत हार्मोन तंत्र रासायनिक संकेतों के माध्यम से कार्य करता है और इसका प्रभाव अपेक्षाकृत धीमा होता है। तंत्रिका तंत्र तत्काल प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है जबकि हार्मोन तंत्र लंबे समय तक प्रभाव डालता है। दोनों तंत्र मिलकर शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इनके समन्वय से शरीर वातावरण के अनुसार सही प्रतिक्रिया दे पाता है।
47. पौधों में वृद्धि को नियंत्रित करने वाले हार्मोन कौन-कौन से हैं?
पौधों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न प्रकार के हार्मोन कार्य करते हैं। प्रमुख पादप हार्मोन में ऑक्सिन, गिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एथिलीन और एब्सिसिक अम्ल शामिल हैं। ऑक्सिन मुख्य रूप से तनों की वृद्धि को बढ़ाता है और प्रकाश की दिशा में झुकाव में सहायता करता है। गिबरेलिन बीजों के अंकुरण और पौधों की लंबाई बढ़ाने में सहायक होता है। साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित करता है। एथिलीन फलों के पकने में सहायता करता है जबकि एब्सिसिक अम्ल वृद्धि को नियंत्रित करता है। इन सभी हार्मोनों के संतुलन से पौधों का समुचित विकास संभव होता है।
48. पादपों में रासायनिक संदेश कैसे पहुँचते हैं?
पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, इसलिए वे रासायनिक संदेशों के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हैं। पादप हार्मोन पौधों के विभिन्न भागों में बनते हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचते हैं। ये हार्मोन कोशिकाओं की वृद्धि और विभाजन को नियंत्रित करते हैं। बाहरी परिस्थितियों जैसे प्रकाश, गुरुत्व और जल के अनुसार पौधे प्रतिक्रिया देते हैं। हार्मोन इन प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार पौधों में रासायनिक संदेशों का संचार हार्मोन के माध्यम से होता है।
49. तंत्रिका तंत्र में संकेतों का संचरण कैसे होता है?
तंत्रिका तंत्र में संकेतों का संचरण विशेष तंत्रिका कोशिकाओं के माध्यम से होता है जिन्हें न्यूरॉन कहा जाता है। जब कोई उत्तेजना प्राप्त होती है तो न्यूरॉन के डेंड्राइट उसे ग्रहण करते हैं। इसके बाद यह संकेत कोशिका शरीर से होते हुए ऐक्सॉन तक पहुँचता है। ऐक्सॉन के अंतिम भाग से रासायनिक पदार्थ निकलते हैं जो अगले न्यूरॉन को उत्तेजित करते हैं। इस प्रकार संकेत एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचते रहते हैं। यह प्रक्रिया बहुत तेज गति से होती है और शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने में सहायता करती है।
50. मनुष्य में प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) का महत्व क्या है?
प्रतिवर्ती क्रिया शरीर की एक त्वरित और स्वचालित प्रतिक्रिया होती है जो किसी अचानक उत्तेजना के कारण होती है। यह क्रिया मुख्य रूप से मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है। उदाहरण के लिए गरम वस्तु को छूते ही हाथ तुरंत पीछे हट जाना प्रतिवर्ती क्रिया का उदाहरण है। इस प्रक्रिया में शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है जिससे नुकसान से बचाव हो सकता है। प्रतिवर्ती क्रियाएँ शरीर की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। ये खतरनाक परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करती हैं।
51. तंत्रिका तंत्र में मेरुरज्जु की क्या भूमिका है?
मेरुरज्जु तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है जो मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करता है। यह रीढ़ की हड्डी के भीतर स्थित होती है और लंबी संरचना के रूप में दिखाई देती है। मेरुरज्जु संवेदी अंगों से प्राप्त संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती है। साथ ही मस्तिष्क से प्राप्त आदेशों को शरीर के विभिन्न भागों तक भेजती है। यह प्रतिवर्ती क्रियाओं के नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रकार मेरुरज्जु शरीर के नियंत्रण और समन्वय में महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करती है।
52. पादपों में वृद्धि की दिशा को कौन नियंत्रित करता है?
पौधों में वृद्धि की दिशा मुख्य रूप से पादप हार्मोन और बाहरी उत्तेजनाओं के प्रभाव से नियंत्रित होती है। ऑक्सिन नामक हार्मोन इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब पौधे के एक भाग पर अधिक प्रकाश पड़ता है तो ऑक्सिन दूसरे भाग में अधिक मात्रा में जमा हो जाता है। इसके कारण कोशिकाओं की वृद्धि असमान हो जाती है। परिणामस्वरूप पौधे का तना प्रकाश की दिशा में मुड़ जाता है। इस प्रकार हार्मोन और बाहरी परिस्थितियाँ मिलकर पौधों की वृद्धि की दिशा को नियंत्रित करती हैं।
53. पौधों में वृद्धि और विकास के लिए हार्मोन क्यों आवश्यक हैं?
पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने में हार्मोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये रासायनिक पदार्थ पौधों की कोशिकाओं की गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। हार्मोन के प्रभाव से कोशिका विभाजन, वृद्धि और परिपक्वता की प्रक्रियाएँ नियंत्रित होती हैं। इनके कारण पौधे बाहरी परिस्थितियों के अनुसार प्रतिक्रिया दे पाते हैं। हार्मोन पौधों के जीवन चक्र के विभिन्न चरणों को नियंत्रित करते हैं। इसलिए पौधों के संतुलित विकास के लिए हार्मोन अत्यंत आवश्यक होते हैं।
54. मानव शरीर में हार्मोन और एंजाइम में क्या अंतर है?
हार्मोन और एंजाइम दोनों ही शरीर में महत्वपूर्ण जैविक पदार्थ होते हैं, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग होते हैं। हार्मोन रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। इसके विपरीत एंजाइम जैविक उत्प्रेरक होते हैं जो रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ाते हैं। हार्मोन रक्त के माध्यम से दूर-दूर तक पहुँच सकते हैं। जबकि एंजाइम सामान्यतः उसी स्थान पर कार्य करते हैं जहाँ वे बनते हैं। इस प्रकार दोनों के कार्य और प्रभाव अलग होते हैं, लेकिन दोनों शरीर की क्रियाओं के लिए आवश्यक हैं।
55. मनुष्य के शरीर में पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland) का क्या महत्व है?
पिट्यूटरी ग्रंथि मानव शरीर की सबसे महत्वपूर्ण अंतःस्रावी ग्रंथियों में से एक मानी जाती है। इसे अक्सर “मास्टर ग्रंथि” कहा जाता है क्योंकि यह अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों की गतिविधियों को नियंत्रित करती है। यह मस्तिष्क के आधार भाग में स्थित होती है और कई प्रकार के हार्मोन का स्राव करती है। पिट्यूटरी ग्रंथि शरीर की वृद्धि, विकास और प्रजनन से संबंधित प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। इसके द्वारा स्रावित हार्मोन थायरॉइड, एड्रिनल और अन्य ग्रंथियों के कार्य को नियंत्रित करते हैं। यदि इस ग्रंथि का कार्य असंतुलित हो जाए तो शरीर की वृद्धि और अन्य महत्वपूर्ण क्रियाएँ प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए पिट्यूटरी ग्रंथि शरीर के नियंत्रण और समन्वय में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Most Important Defination (NCERT BASED)
1. नियंत्रण और समन्वय (Control and Coordination)
नियंत्रण और समन्वय वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों की गतिविधियों को व्यवस्थित किया जाता है ताकि वे मिलकर सही ढंग से कार्य कर सकें और वातावरण के अनुसार उचित प्रतिक्रिया दे सकें।
2. तंत्रिका तंत्र (Nervous System)
तंत्रिका तंत्र शरीर का वह तंत्र है जो विभिन्न अंगों से सूचनाएँ प्राप्त करके उन्हें मस्तिष्क तक पहुँचाता है और आवश्यक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
3. न्यूरॉन (Neuron)
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है जो विद्युत संकेतों के रूप में संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का कार्य करती है।
4. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)
प्रतिवर्ती क्रिया वह त्वरित और स्वचालित प्रतिक्रिया है जो किसी अचानक उत्तेजना के कारण होती है और जिसमें मस्तिष्क की बजाय मेरुरज्जु मुख्य भूमिका निभाती है।
5. प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)
प्रतिवर्ती चाप वह मार्ग है जिसके माध्यम से प्रतिवर्ती क्रिया के दौरान तंत्रिका संकेत संवेदी अंग से मेरुरज्जु और फिर प्रतिक्रिया करने वाले अंग तक पहुँचते हैं।
6. हार्मोन (Hormone)
हार्मोन वे रासायनिक संदेशवाहक पदार्थ होते हैं जो अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित होकर रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं और उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।
7. अंतःस्रावी ग्रंथि (Endocrine Gland)
अंतःस्रावी ग्रंथि वह नलिकाहीन ग्रंथि होती है जो हार्मोन का स्राव सीधे रक्त में करती है और शरीर की विभिन्न क्रियाओं को नियंत्रित करती है।
8. पादप हार्मोन (Plant Hormone)
पादप हार्मोन वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो पौधों की वृद्धि, विकास और विभिन्न जैविक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
9. उष्णकटिबंधीय गति (Tropic Movement)
उष्णकटिबंधीय गति वह दिशा-विशिष्ट गति है जिसमें पौधे किसी बाहरी उत्तेजना जैसे प्रकाश, जल या गुरुत्व के प्रभाव में एक निश्चित दिशा में बढ़ते हैं।
10. प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)
प्रकाशानुवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों के तने या पत्तियाँ प्रकाश की दिशा की ओर बढ़ती हैं।
11. गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism)
गुरुत्वानुवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें पौधों की जड़ें गुरुत्वाकर्षण की दिशा में नीचे की ओर बढ़ती हैं।
12. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System)
स्वायत्त तंत्रिका तंत्र तंत्रिका तंत्र का वह भाग है जो शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे हृदय की धड़कन, पाचन और श्वसन को नियंत्रित करता है।
13. आयनिक यौगिक (Ionic Compound)
संक्षिप्त परिचय:
जब धातु और अधातु के बीच इलेक्ट्रॉनों का आदान-प्रदान होता है तो एक विशेष प्रकार का यौगिक बनता है जिसे आयनिक यौगिक कहा जाता है।
परिभाषा:
धातु द्वारा इलेक्ट्रॉन खोने और अधातु द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से बनने वाले यौगिकों को आयनिक यौगिक (Ionic Compound) कहा जाता है।
उदाहरण – सोडियम क्लोराइड (NaCl)।
14. आयन (Ion)
संक्षिप्त परिचय:
रासायनिक अभिक्रियाओं में कई बार परमाणु इलेक्ट्रॉन खो देते हैं या प्राप्त कर लेते हैं, जिससे वे आवेशित कण बन जाते हैं।
परिभाषा:
वह परमाणु या परमाणुओं का समूह जिस पर धनात्मक या ऋणात्मक आवेश होता है, उसे आयन (Ion) कहते हैं।
15. धनायन (Cation)
संक्षिप्त परिचय:
जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन खो देता है तो उस पर धनात्मक आवेश उत्पन्न हो जाता है।
परिभाषा:
इलेक्ट्रॉन खोने के कारण बनने वाले धनात्मक आवेशित आयन को धनायन (Cation) कहा जाता है।
उदाहरण – Na⁺, Ca²⁺।
16. ऋणायन (Anion)
संक्षिप्त परिचय:
जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है तो उस पर ऋणात्मक आवेश बन जाता है।
परिभाषा:
इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से बनने वाले ऋणात्मक आवेशित आयन को ऋणायन (Anion) कहा जाता है।
उदाहरण – Cl⁻, O²⁻।
17. विद्युत अपघटन (Electrolysis)
संक्षिप्त परिचय:
कुछ रासायनिक यौगिकों को बिजली की सहायता से तोड़ा जा सकता है। यह प्रक्रिया प्रयोगशालाओं और उद्योगों में बहुत महत्वपूर्ण है।
परिभाषा:
विद्युत धारा की सहायता से किसी यौगिक को उसके घटकों में तोड़ने की प्रक्रिया को विद्युत अपघटन (Electrolysis) कहा जाता है।
18. खनिज (Mineral)
संक्षिप्त परिचय:
पृथ्वी की परत में धातुएँ शुद्ध रूप में नहीं मिलतीं, बल्कि अन्य पदार्थों के साथ मिश्रित रूप में पाई जाती हैं।
परिभाषा:
पृथ्वी की पपड़ी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले धातुओं के यौगिकों या मिश्रणों को खनिज (Mineral) कहा जाता है।
19. अयस्क (Ore)
संक्षिप्त परिचय:
पृथ्वी में पाए जाने वाले सभी खनिजों से धातु निकालना संभव नहीं होता। कुछ विशेष खनिज ऐसे होते हैं जिनसे धातु को आसानी और आर्थिक रूप से प्राप्त किया जा सकता है।
परिभाषा:
वे खनिज जिनसे धातु को आसानी और लाभदायक तरीके से प्राप्त किया जा सके, उन्हें अयस्क (Ore) कहा जाता है।
20. धातुकर्म (Metallurgy)
संक्षिप्त परिचय:
धातुओं को पृथ्वी से प्राप्त करने और उन्हें उपयोग योग्य बनाने के लिए कई प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं।
परिभाषा:
अयस्कों से धातु को निकालने तथा उसे शुद्ध करने की संपूर्ण प्रक्रिया को धातुकर्म (Metallurgy) कहा जाता है।
Most Important Diagram (NCERT BASED)
1. मानव मस्तिष्क का आरेख (Human Brain )
भागों का कार्य
1. Cerebrum (सेरेब्रुम)
यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग होता है। यह सोचने, याद रखने, निर्णय लेने और संवेदनाओं को पहचानने का कार्य करता है। मनुष्य की बुद्धि और तर्क क्षमता इसी भाग से नियंत्रित होती है।
2. Cerebellum (सेरिबेलम)
यह शरीर के संतुलन और मांसपेशियों के समन्वय को नियंत्रित करता है। चलने, दौड़ने और शरीर की सही मुद्रा बनाए रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. Medulla Oblongata (मेडुला ऑब्लोंगाटा)
यह मस्तिष्क का निचला भाग होता है जो अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। सांस लेना, दिल की धड़कन और रक्तचाप जैसी क्रियाएँ इसी के द्वारा नियंत्रित होती हैं।
4. Spinal Cord (मेरुरज्जु)
यह मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करता है। यह कई रिफ्लेक्स क्रियाओं को भी नियंत्रित करता है।
5. Pituitary Gland (पिट्यूटरी ग्रंथि)
इसे मास्टर ग्रंथि कहा जाता है क्योंकि यह अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है और कई महत्वपूर्ण हार्मोन स्रावित करती है।
6. Hypothalamus (हाइपोथैलेमस)
यह मस्तिष्क और अंतःस्रावी तंत्र के बीच समन्वय स्थापित करता है। यह शरीर का तापमान, भूख और प्यास जैसी क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
2. रिफ्लेक्स आर्क (Reflex Arc)
भागों का कार्य
1. Receptor (रिसेप्टर)
यह शरीर का वह भाग होता है जो बाहरी उत्तेजना को पहचानता है, जैसे त्वचा में दर्द या गर्मी का अनुभव।
2. Sensory Neuron (संवेदी तंत्रिका)
यह रिसेप्टर से प्राप्त संदेश को मेरुरज्जु तक पहुंचाती है।
3. Spinal Cord (मेरुरज्जु)
यह प्राप्त संदेश का तुरंत विश्लेषण करके प्रतिक्रिया का आदेश भेजता है।
4. Motor Neuron (प्रेरक तंत्रिका)
यह मेरुरज्जु से आदेश लेकर मांसपेशियों तक पहुंचाता है।
5. Effector Muscle (प्रभावक)
यह आदेश मिलने पर तुरंत प्रतिक्रिया करता है, जैसे हाथ को गर्म वस्तु से हटाना।
3. न्यूरॉन की संरचना (Structure of Neuron)
भागों का कार्य
1. Dendrites (डेंड्राइट)
ये शाखाओं जैसे भाग होते हैं जो अन्य न्यूरॉनों से संदेश प्राप्त करते हैं।
2. Cell Body (कोशिका द्रव्य)
यह न्यूरॉन का मुख्य भाग होता है जिसमें केंद्रक होता है और यह कोशिका की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
3. Nucleus (केंद्रक)
यह कोशिका की सभी जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
4. Axon (ऐक्सॉन)
यह लंबा भाग होता है जो संदेश को कोशिका से आगे दूसरी कोशिकाओं तक पहुंचाता है।
5. Myelin Sheath (मायलिन आवरण)
यह ऐक्सॉन को ढकने वाली परत होती है जो तंत्रिका संदेश को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करती है।
6. Axon Terminal (ऐक्सॉन टर्मिनल)
यह न्यूरॉन का अंतिम भाग होता है जो अगले न्यूरॉन या मांसपेशी तक संदेश पहुंचाता है।
Most Important Mcq (NCERT BASED)
1. शरीर में नियंत्रण और समन्वय का मुख्य कार्य क्या है?
A. भोजन का पाचन करना
B. शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों को नियंत्रित करना
C. रक्त का निर्माण करना
D. ऊर्जा उत्पन्न करना
उत्तर: B
2. मानव शरीर में संदेशों के आदान-प्रदान के लिए कौन-सा तंत्र जिम्मेदार है?
A. पाचन तंत्र
B. तंत्रिका तंत्र
C. श्वसन तंत्र
D. परिसंचरण तंत्र
उत्तर: B
3. न्यूरॉन का मुख्य कार्य क्या है?
A. रक्त बनाना
B. तंत्रिका संदेशों का संचार करना
C. भोजन पचाना
D. हार्मोन बनाना
उत्तर: B
4. मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग कौन-सा है?
A. सेरिबेलम
B. सेरेब्रुम
C. मेडुला
D. मेरुरज्जु
उत्तर: B
5. शरीर के संतुलन को नियंत्रित करने वाला मस्तिष्क का भाग कौन-सा है?
A. सेरेब्रुम
B. सेरिबेलम
C. मेडुला
D. हाइपोथैलेमस
उत्तर: B
6. अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करने वाला मस्तिष्क का भाग है:
A. सेरेब्रुम
B. सेरिबेलम
C. मेडुला ऑब्लोंगाटा
D. पिट्यूटरी
उत्तर: C
7. मेरुरज्जु का मुख्य कार्य क्या है?
A. हार्मोन बनाना
B. रक्त शुद्ध करना
C. मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेश पहुँचाना
D. भोजन पचाना
उत्तर: C
8. तंत्रिका कोशिका को क्या कहा जाता है?
A. न्यूरॉन
B. नेफ्रॉन
C. हार्मोन
D. रिसेप्टर
उत्तर: A
9. रिफ्लेक्स क्रिया का नियंत्रण मुख्यतः कहाँ होता है?
A. मस्तिष्क
B. मेरुरज्जु
C. हृदय
D. फेफड़े
उत्तर: B
10. रिफ्लेक्स क्रिया का उदाहरण क्या है?
A. पढ़ना
B. सोचना
C. गर्म वस्तु से हाथ तुरंत हटाना
D. चलना
उत्तर: C
11. न्यूरॉन का वह भाग जो संदेश प्राप्त करता है, कहलाता है:
A. ऐक्सॉन
B. डेंड्राइट
C. केंद्रक
D. सिनेप्स
उत्तर: B
12. न्यूरॉन का लंबा भाग जो संदेश आगे भेजता है, कहलाता है:
A. डेंड्राइट
B. ऐक्सॉन
C. कोशिका द्रव्य
D. सिनेप्स
उत्तर: B
13. हार्मोन का स्राव किस तंत्र से होता है?
A. तंत्रिका तंत्र
B. अंतःस्रावी तंत्र
C. श्वसन तंत्र
D. उत्सर्जन तंत्र
उत्तर: B
14. शरीर की “मास्टर ग्रंथि” किसे कहा जाता है?
A. थायरॉइड
B. पिट्यूटरी
C. एड्रिनल
D. अग्न्याशय
उत्तर: B
15. थायरॉइड ग्रंथि कहाँ स्थित होती है?
A. गर्दन में
B. हृदय में
C. पेट में
D. मस्तिष्क में
उत्तर: A
16. एड्रिनालिन हार्मोन किस ग्रंथि से स्रावित होता है?
A. पिट्यूटरी
B. एड्रिनल
C. थायरॉइड
D. अग्न्याशय
उत्तर: B
17. पौधों में वृद्धि का नियंत्रण किसके द्वारा होता है?
A. एंजाइम
B. हार्मोन
C. विटामिन
D. खनिज
उत्तर: B
18. पौधों में प्रकाश की दिशा में वृद्धि को क्या कहते हैं?
A. जियोट्रोपिज्म
B. हाइड्रोट्रोपिज्म
C. फोटोट्रोपिज्म
D. थिग्मोट्रोपिज्म
उत्तर: C
19. जड़ों का गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ना क्या कहलाता है?
A. फोटोट्रोपिज्म
B. जियोट्रोपिज्म
C. हाइड्रोट्रोपिज्म
D. केमोट्रोपिज्म
उत्तर: B
20. पौधों में स्पर्श के प्रति प्रतिक्रिया को क्या कहते हैं?
A. थिग्मोट्रोपिज्म
B. फोटोट्रोपिज्म
C. जियोट्रोपिज्म
D. हाइड्रोट्रोपिज्म
उत्तर: A
21. न्यूरॉन के बीच संपर्क स्थल को क्या कहते हैं?
A. सिनेप्स
B. डेंड्राइट
C. ऐक्सॉन
D. रिसेप्टर
उत्तर: A
22. तंत्रिका संदेश किस रूप में प्रवाहित होते हैं?
A. रासायनिक संकेत
B. विद्युत संकेत
C. दोनों
D. इनमें से कोई नहीं
उत्तर: C
23. इंसुलिन हार्मोन किस ग्रंथि से स्रावित होता है?
A. पिट्यूटरी
B. अग्न्याशय
C. थायरॉइड
D. एड्रिनल
उत्तर: B
24. पिट्यूटरी ग्रंथि कहाँ स्थित होती है?
A. गर्दन में
B. मस्तिष्क के नीचे
C. पेट में
D. हृदय में
उत्तर: B
25. तंत्रिका तंत्र के मुख्य भाग कौन-से हैं?
A. मस्तिष्क और मेरुरज्जु
B. हृदय और फेफड़े
C. पेट और यकृत
D. त्वचा और मांसपेशियाँ
उत्तर: A
26. रिफ्लेक्स क्रिया किस प्रकार की क्रिया है?
A. धीमी
B. सोच-समझकर की गई
C. तुरंत होने वाली
D. अनावश्यक
उत्तर: C
27. न्यूरॉन के केंद्र में कौन-सा भाग होता है?
A. केंद्रक
B. डेंड्राइट
C. ऐक्सॉन
D. सिनेप्स
उत्तर: A
28. पौधों में हार्मोन का उदाहरण है:
A. ऑक्सिन
B. इंसुलिन
C. एड्रिनालिन
D. थायरॉक्सिन
उत्तर: A
29. पौधों की वृद्धि में सहायक हार्मोन कौन-सा है?
A. ऑक्सिन
B. इंसुलिन
C. एड्रिनालिन
D. थायरॉक्सिन
उत्तर: A
30. नियंत्रण और समन्वय का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. शरीर के अंगों के कार्यों का समन्वय करना
B. भोजन पचाना
C. रक्त बनाना
D. ऊर्जा बनाना
उत्तर: A



